क्या विपक्ष की इस 'लीला' से मोदी-शाह को परेशान होना चाहिए? व्यापारी ही नहीं आम आदमी भी बेबस! पढ़िए रामलीला Ground की Exclusive Report
INDIA Rally Ground Report: रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली से मोदी-शाह को कितनी चुनौती? 10 लाख की भीड़ के दावे के बीच जाम में फंसे व्यापारी और आम लोग
INDIA Rally Ground Report: रविवार 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ बड़ी रैली की. इस रैली में कांग्रेस समेत INDI गठबंधन के कई दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए. वोट चोर गद्दी छोड़ के नारे से पूरे ग्राउंड में शोर मच जाता था. आज के इस रैली में सभी विपक्षी नेताओं ने मिंटों रोड़ से मार्च करते हुए दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचे और सभी नेताओं ने मोदी-शाह और ज्ञानेश को गद्दी से उखाड़ फेंकने की हुंकार भरी.
वैसे तो राम लीला मैदान में 50 हजार के लिए उपस्थित बताई जाती है हालांकि कोई-कोई कोना छोड़ के पूरा मैदान भरा हुआ था तो वहीं देश के कोने-कोने से लोग भी पहुंचे हुए थे और अपने-अपने राज्य में हुए घोटाले तो अंकिता भंडारी केस ऐसे कई तरह के मुद्दों का पोस्टर लेकर हर कोई पहुंचा हुआ था और प्रदर्शन कर रहे तो कोई हाथ में संविधान लेकर पहुंचा था. सड़क और रामलीला मैदान में भीड़ की बात करें तो अनुमान 1 लाख के करीब भीड़ रही होगी हालांकि कांग्रेस दावों के मुताबिक 10 लाख भीड़ नहीं थी.
नजारा रामलीला मैदान में विपक्ष की 'लीला' का
रामलीला मैदान में कितने लोगों की भीड़ थी?
वहीं कुछ हिस्से में कुर्सी खाली हुई थी जिसका वीडियो कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने वीडियो पोस्ट किया जिसके बाद उस रैली को भाजपा वीडियो शेयर कर फ्लॉप बता रही है हालांकि वहीं इसका जवाब कांग्रेस ड्रोन से वीडियो शेयर कर सबूत दिए. इस तरह रामलीला मैदान में जुटी भीड़ का सवाल भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बन गया.
राहुल गांधी से लेकर तेजस्वी यादव तक, विपक्ष के बड़े चेहरे पहुंचे रामलीला मैदान
रैली में विपक्ष के कई बड़े नेता शामिल हुए. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तेजस्वी यादव और पवन खेड़ा समेत कई नेताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया. विपक्षी नेता मिंटो रोड की ओर से रैली करते हुए रामलीला मैदान पहुंचे. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और अपने हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया.
मंच से राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने वोट चोरी के आरोपों और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए. नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी तीखी टिप्पणियां कीं. विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने की मांग उठाई गई.
मैदान में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे लगातार सुनाई दिए. हालांकि, रैली में सिर्फ चुनाव और राजनीतिक मुद्दे ही नहीं थे. अलग-अलग राज्यों से आए लोग अपने क्षेत्र और उससे जुड़े मुद्दों को भी सामने रख रहे थे.
बंगाल, बिहार और उत्तराखंड से पहुंचे लोग, अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की भी उठी आवाज
रामलीला मैदान में अलग-अलग राज्यों से आए कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी दिखाई दी. पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तराखंड समेत कई राज्यों के लोग रैली में शामिल होने पहुंचे थे. उनके हाथों में अलग-अलग मुद्दों से जुड़े पोस्टर और बैनर थे.
इसी दौरान उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे लोग भी मैदान में नजर आए. प्रदर्शनकारियों ने अंकिता के लिए न्याय की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ नारे लगाए. उनके हाथों में पोस्टर थे, जिन पर अंकिता को इंसाफ दिलाने की बात लिखी थी.
इस दौरान 'अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं' और 'उत्तराखंड की बेटी को न्याय दो' जैसे नारे लगाए गए. प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि अंकिता मामले में असली दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी. इस तरह रैली में मौजूद लोगों के लिए यह कार्यक्रम केवल राजनीतिक दलों का शक्ति प्रदर्शन नहीं था, बल्कि वे अपने मुद्दों और न्याय की मांग को भी सामने रख रहे थे.
सिर्फ वोट चोरी नहीं, कई मुद्दों पर दिखा विरोध; पोस्टर और नारों से गूंजा मैदान
रामलीला मैदान में मौजूद हर प्रदर्शनकारी केवल वोट चोरी या चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर बात नहीं कर रहा था. कई लोग अपने साथ अलग-अलग मांगों से जुड़े पोस्टर लेकर पहुंचे थे. किसी के हाथ में न्याय की मांग थी तो कोई केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगा रहा था.
विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे लगाए. वहीं, दूसरे प्रदर्शनकारियों ने अपने-अपने मुद्दों को लेकर आवाज उठाई. मैदान में अलग-अलग राज्यों और पृष्ठभूमि से आए लोगों की मौजूदगी ने रैली को कई मुद्दों वाला विरोध प्रदर्शन बना दिया.
रैली का असर सड़कों पर, 20 बाजारों और मुख्य रास्तों पर यातायात प्रभावित
रामलीला मैदान में विपक्षी रैली के साथ ही दिल्ली के आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई. रैली में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने और सुरक्षा इंतजामों के कारण कई रास्तों पर आवाजाही बाधित रही. इसका असर आसपास के करीब 20 प्रमुख बाजारों और मुख्य सड़कों पर भी देखने को मिला.
स्टेट मिरर हिंदी की टीम ने रैली के आसपास मौजूद लोगों से बात की. कई लोगों ने रास्ते बंद होने और ट्रैफिक जाम को लेकर नाराजगी जताई. कुछ लोगों का कहना था कि दिल्ली पुलिस की ओर से पहले से पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे. लोगों को यह समझने में भी परेशानी हुई कि किस रास्ते से रेलवे स्टेशन या अपने गंतव्य तक पहुंचा जा सकता है.
कई राहगीरों ने बताया कि उन्हें रास्ते में रोक दिया गया और वैकल्पिक रास्तों की जानकारी भी ठीक से नहीं मिल पाई. कुछ लोग खरीदारी के लिए निकले थे, लेकिन जाम और रास्तों में बदलाव के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा. रैली के चलते राजनीतिक माहौल तो गर्म था ही, आम लोगों के लिए दिनभर की आवाजाही भी मुश्किल हो गई.
परिवार को ट्रेन में बैठाने जा रहा था युवक, रास्ते में रोका तो छूट गई ट्रेन
रैली के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हुई, जिन्हें समय पर रेलवे स्टेशन पहुंचना था. स्टेट मिरर हिंदी से बातचीत में एक युवक ने बताया कि वह अपनी पत्नी और बच्चों को ट्रेन में बैठाने के लिए जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसे रोक दिया गया. रास्ता बंद होने के कारण उसका परिवार समय पर स्टेशन नहीं पहुंच पाया और ट्रेन छूट गई. युवक ने बताया, ''मैं अपने बच्चों और पत्नी को ट्रेन में बैठाने जा रहा था, लेकिन मुझे यहां से रोक लिया गया. वे ट्रेन नहीं पकड़ पाए और अब वापस लौट गए.''
यह सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं थी. आसपास मौजूद कई लोगों ने भी बताया कि उन्हें रास्ता समझने में दिक्कत हुई. कुछ लोग रेलवे स्टेशन जाने के लिए रास्ता तलाशते रहे, तो कुछ को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा. लोगों का कहना था कि रैली के चलते उन्हें अपने जरूरी काम छोड़ने पड़े.
व्यापारियों और आम लोगों की परेशानी के बीच विपक्ष की रैली पर सियासी बहस
रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की रैली ने एक तरफ केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की, तो दूसरी तरफ इसके कारण आसपास के इलाकों में आम लोगों की परेशानियां भी सामने आईं. व्यापारियों और राहगीरों को यातायात बाधित होने, रास्ते बंद होने और आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
रैली में कितनी भीड़ जुटी, इस पर BJP और कांग्रेस के दावे अलग-अलग रहे. कांग्रेस ने ड्रोन वीडियो के जरिए अपनी रैली को सफल बताया, जबकि BJP ने इसे फ्लॉप शो करार दिया. लेकिन रामलीला मैदान के आसपास मौजूद लोगों के लिए उस दिन सबसे बड़ा सवाल राजनीतिक दावों से अलग था. वे अपने गंतव्य तक कैसे पहुंचें और अपने जरूरी काम समय पर कैसे पूरे करें?




