साधु-संत वाले भेष पर क्लेश! राहुल-पप्पू समेत कई नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज- BJP हमलावर- देखिए ड्रामे बाजी के 5 VIDEO
संसद परिसर में राम मंदिर दान मामले को लेकर विपक्ष के सांकेतिक प्रदर्शन के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है. पप्पू यादव के 'पुजारी' वाले अभिनय पर राहुल गांधी समेत कई नेताओं के खिलाफ वाराणसी में FIR दर्ज की गई है.
उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर दान मामले को लेकर संसद परिसर में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन ने अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है. संसद के बाहर हुए सांकेतिक प्रदर्शन में कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सांसदों ने कथित दान घोटाले का मुद्दा उठाने के लिए एक नाट्य रूपांतरण किया. इस दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर पुजारी की भूमिका में नजर आए और दानपात्र से पैसे निकालकर अपनी जेब में रखते हुए ड्रामा किया.
प्रदर्शन का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा और संत समाज ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया, जबकि विपक्ष का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाना था. इस पूरे घटनाक्रम के बाद वाराणसी में राहुल गांधी, पप्पू यादव, समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद समेत कई नेताओं के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने और सनातन धर्म के अपमान के आरोप में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. मामले ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है.
संसद में कैसे हुआ विरोध प्रदर्शन?
शुक्रवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के सांसद संसद परिसर में राम मंदिर दान से जुड़े कथित गबन और छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शन के दौरान संसद के मकर द्वार के पास सांकेतिक रूप से दानपात्र (डोनेशन बॉक्स) रखे गए. राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने प्रतीकात्मक रूप से दानपात्र में पैसे डाले.
इसी दौरान पप्पू यादव, जिन्होंने भगवा वस्त्र पहन रखे थे, पुजारी की भूमिका निभाते हुए दानपात्र से पैसे निकालकर अपनी जेब में रखते दिखाई दिए. वहीं, फैजाबाद (अयोध्या) से सांसद अवधेश प्रसाद ने अभिनय के तहत उन्हें पकड़कर विरोध जताया. इस प्रदर्शन में प्रियंका गांधी वाड्रा, महुआ माजी, धर्मेंद्र यादव सहित कई विपक्षी सांसद भी मौजूद रहे.
भाजपा ने बताया सनातन का अपमान
प्रदर्शन के बाद भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि सांसदों को संसद में जनता के मुद्दे उठाने के लिए चुना जाता है, न कि इस तरह के नाटकीय प्रदर्शन करने के लिए. उनके मुताबिक, इस प्रकार का प्रदर्शन सनातन परंपराओं और भगवा वस्त्रों के सम्मान के खिलाफ है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संतों, महात्माओं और भगवा परिधान का मजाक उड़ाने की कोशिश विपक्ष की सोच को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि जिस मामले को लेकर प्रदर्शन किया गया, उसमें संत समाज की कोई भूमिका नहीं थी, फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया.
वाराणसी में दर्ज हुई एफआईआर
संसद में हुए प्रदर्शन के बाद वाराणसी के कुछ संतों ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान सनातन धर्म, साधु-संतों और धार्मिक परंपराओं का अपमान किया गया है. पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. मामले की जांच शुरू कर दी गई है और प्रदर्शन के वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है.
संत समाज ने जताई नाराजगी
पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालकदेवाचार्य महाराज ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र, संतों और सनातन परंपरा का इस तरह मजाक उड़ाना अस्वीकार्य है. उन्होंने मांग की कि संबंधित नेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही चेतावनी दी कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संत समाज आंदोलन करने पर विचार करेगा.
विपक्ष का क्या है पक्ष?
विपक्षी दलों का कहना है कि उनका विरोध किसी धर्म या संत समाज के खिलाफ नहीं था. उनके अनुसार, यह प्रदर्शन केवल राम मंदिर दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को प्रतीकात्मक तरीके से उठाने के लिए किया गया था. हालांकि भाजपा और संत समाज इसे धार्मिक आस्था और सनातन परंपरा का अपमान बता रहे हैं.
अब आगे क्या?
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसियां प्रदर्शन के वीडियो, शिकायत और अन्य साक्ष्यों की जांच करेंगी. इस बीच यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गर्माता जा रहा है. एक ओर भाजपा और संत समाज कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए अपने विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बता रहा है. आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर हलचल जारी रहने की संभावना है.




