एक कागज से मचा हड़कंप! अयोध्या मेडिकल कॉलेज में मिला बम बनाने से जुड़ा दस्तावेज, क्या रेड फोर्ट जैसा ब्लास्ट करने का था प्लान?
अयोध्या के राजर्षि दशरथ स्वायत्त राज्य मेडिकल कॉलेज के एक्स-रे रूम में बम बनाने से जुड़े कथित निर्देश वाला हस्तलिखित दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. ड्यूटी पर मौजूद फर्स्ट ईयर के एक मेडिकल छात्र को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, जबकि दो अन्य छात्रों से भी सवाल किए जा रहे हैं.
अयोध्या मेडिकल कॉलेज में मिला बम बनाने से जुड़ा दस्तावेज
अयोध्या के एक मेडिकल कॉलेज में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक्स-रे रूम से कथित तौर पर बम बनाने के तरीके से जुड़ा एक हस्तलिखित दस्तावेज बरामद हुआ. दस्तावेज सामने आते ही कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल पुलिस को सूचना दी. मामला राजर्षि दशरथ स्वायत्त राज्य मेडिकल कॉलेज का है.
बताया जा रहा है कि एक्स-रे रूम की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग के अधिकारियों को यह दस्तावेज मिला था. इसके बाद बिना देर किए पुलिस को इसकी जानकारी दी गई और जांच शुरू कर दी गई. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह दस्तावेज मेडिकल कॉलेज के एक्स-रे रूम तक कैसे पहुंचा और इसे किसने तैयार किया था?
फर्स्ट ईयर का छात्र हिरासत में, दो अन्य से भी पूछताछ
- पुलिस की शुरुआती जांच में शक एक फर्स्ट ईयर मेडिकल छात्र पर गया है.
- अधिकारियों के मुताबिक, सरफराज, जो उत्तर प्रदेश के बलरामपुर का रहने वाला है, शुक्रवार रात एक्स-रे रूम में ड्यूटी पर था. दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है.
- उसके साथ उसी समय ड्यूटी पर मौजूद दो अन्य लोगों से भी सवाल किए जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दस्तावेज वहां कब आया और इसके पीछे किसकी भूमिका थी.
- हालांकि, अभी तक पुलिस ने यह नहीं कहा है कि हिरासत में लिए गए छात्र का किसी आपराधिक गतिविधि या साजिश से संबंध साबित हो गया है.. पूछताछ और जांच जारी है.
दस्तावेज में क्या था?
- पुलिस के मुताबिक, बरामद कागज में विस्फोटक तैयार करने से संबंधित कथित निर्देश लिखे हुए थे. इसमें कुछ ऐसे पदार्थों और सामान का उल्लेख था, जिन्हें विस्फोटक तैयार करने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है.
- हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इन कथित निर्देशों या सामग्रियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं है.
- फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दस्तावेज वास्तव में किसने लिखा, इसका उद्देश्य क्या था और इसे मेडिकल कॉलेज के परिसर में क्यों रखा गया.
- कॉलेज के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अरविंद सिंह ने बताया कि दस्तावेज मिलने के तुरंत बाद पुलिस को सूचना दे दी गई. उन्होंने कहा कि जांच चल रही है और जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
क्या कोई बड़ी साजिश है?
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि पुलिस ने अभी तक दस्तावेज को किसी आतंकी या आपराधिक साजिश से नहीं जोड़ा है. जांच एजेंसियां हर संभावित पहलू को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं. यह भी जांच का हिस्सा है कि दस्तावेज छात्र ने खुद तैयार किया था या किसी अन्य व्यक्ति ने उसे वहां छोड़ा था. यानी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. छात्र को हिरासत में लिए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसके खिलाफ आरोप साबित हो चुके हैं.
कॉलेज में सुरक्षा बढ़ाई गई
घटना के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी सतर्क हो गया है. परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं. कॉलेज प्रशासन यह देख रहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों में बाहरी लोगों की आवाजाही, दस्तावेजों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह और मजबूत किया जा सकता है. मामला मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील परिसर से जुड़ा होने के कारण प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता.
रेड फोर्ट ब्लास्ट केस की यादें क्यों ताजा हुईं?
- अयोध्या की घटना सामने आने के बाद नवंबर 2025 के रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले की भी चर्चा शुरू हो गई है. उस मामले की जांच में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ लोगों का नाम सामने आया था.
- 10 नवंबर 2025 को रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास एक विस्फोटक से लदी कार में धमाका हुआ था. इस घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे.
- बाद में जांच एजेंसियों ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कर्मचारियों के कथित आतंकी नेटवर्क और जैश-ए-मोहम्मद के एक मॉड्यूल की जांच की थी.
- इसी पुराने मामले की वजह से अयोध्या मेडिकल कॉलेज में मिले दस्तावेज ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच फिलहाल कोई सीधा संबंध पुलिस ने स्थापित नहीं किया है. अयोध्या मामले में जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी.
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?
पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं- दस्तावेज किसने लिखा, इसे एक्स-रे रूम में किसने रखा, इसका उद्देश्य क्या था और क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या फिर किसी व्यक्ति की निजी गतिविधि? इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्यूटी पर मौजूद लोगों में से किसी को इस दस्तावेज के बारे में पहले से जानकारी थी या नहीं.
फिलहाल छात्र से पूछताछ और अन्य लोगों के बयान के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है. जब तक पुलिस की जांच से कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक दस्तावेज मिलने की घटना को लेकर किसी व्यक्ति को दोषी मानना सही नहीं होगा.




