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'आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ संधि नहीं', स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रपति ने दीं PAK को वार्निंग- संबोधन में क्या-क्या?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया. जवानों, विभाजन और भारत की उपलब्धियों पर कही बड़ी बातें.

आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ संधि नहीं, स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रपति ने दीं PAK को वार्निंग- संबोधन में क्या-क्या?
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Updated on: 14 Aug 2026 8:07 PM IST

80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संबोधित किया. अपने संबोधन में उन्होंने भारत की आजादी की यात्रा, देश के सामने आई ऐतिहासिक चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं का उल्लेख किया. राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा में जुटे जवानों से लेकर विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले नागरिकों तक सभी के योगदान की सराहना की.

राष्ट्रपति मुर्मू ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कुछ ही घंटों में भारत की स्वतंत्रता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा. उन्होंने कहा कि यह अवसर देश की अब तक की यात्रा को याद करने और आने वाले समय के लिए नए संकल्प लेने का भी है.

राष्ट्रपति ने देशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देकर की. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वह सभी देशवासियों को बधाई देती हैं. उन्होंने कहा कि कुछ ही घंटों में देश की स्वतंत्रता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होने जा रहा है. यह भारत के लिए गौरव और आत्ममंथन का महत्वपूर्ण अवसर है. राष्ट्रपति ने देश की उपलब्धियों के साथ-साथ उन लोगों को भी याद किया, जिनके योगदान से भारत लगातार आगे बढ़ रहा है.

सेना और पुलिस बलों की राष्ट्रपति ने की सराहना

राष्ट्रपति मुर्मू ने देश की सुरक्षा में तैनात जवानों और पुलिसकर्मियों की भूमिका की विशेष रूप से प्रशंसा की. उन्होंने तीनों सेनाओं के जवानों, सभी सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिसकर्मियों के कर्तव्य के प्रति समर्पण की सराहना की. उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले इन कर्मियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है. उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा के कारण देशवासी सुरक्षित वातावरण में अपने जीवन और काम को आगे बढ़ा पा रहे हैं.

विदेशों में भारत का मान बढ़ाने वालों को भी किया नमन

राष्ट्रपति ने उन भारतीय नागरिकों की भी सराहना की, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारत का सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं. उन्होंने विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की पहचान मजबूत करने में देश के नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है. विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अपने काम और उपलब्धियों के जरिए देश की छवि को नई ऊंचाई दे रहे हैं.

14 अगस्त को याद की गई विभाजन की त्रासदी

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने 14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इस दिन उन लाखों लोगों को याद किया जाता है, जो विभाजन से जुड़ी हिंसा में मारे गए या विस्थापन की त्रासदी झेलने के लिए मजबूर हुए. राष्ट्रपति ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर शरणार्थी बनने के लिए मजबूर होना पड़ा. विभाजन के दौरान लोगों ने भयावह परिस्थितियों का सामना किया और अपने जीवन की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक को झेला. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी पीड़ा के बावजूद लोगों ने अपनी पहचान और अस्तित्व को नहीं छोड़ा.

आजादी के साथ सामने आई थीं बड़ी चुनौतियां

राष्ट्रपति ने आजादी के शुरुआती दौर की चुनौतियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्रता मिलने के साथ ही विभाजन की गंभीर त्रासदी का सामना करना पड़ा. इसके अलावा नव स्वतंत्र भारत के सामने 550 से अधिक रियासतों को एकीकृत कर एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की चुनौती भी थी. राष्ट्रपति ने इसे असाधारण चुनौती बताते हुए कहा कि उस समय देश के नेतृत्व और नागरिकों के सामने कई जटिल परिस्थितियां थीं. इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में अपनी यात्रा शुरू की और समय के साथ आगे बढ़ता गया.

अतीत से सीख लेकर भविष्य की ओर बढ़ने का संदेश

राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन में भारत के अतीत को याद करने के साथ भविष्य को लेकर उम्मीद और संकल्प का संदेश भी दिखाई दिया. उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों और आजादी के बाद देश के निर्माण में योगदान देने वाले लोगों को याद किया. 80वें स्वतंत्रता वर्ष की शुरुआत भारत के लिए अपनी उपलब्धियों का आकलन करने के साथ आगे की दिशा तय करने का अवसर भी है. राष्ट्रपति के संबोधन में देश की एकता, सुरक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाने की भावना प्रमुख रही.

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