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PM Cares Fund Report: पहले साल 3976 करोड़ खर्च, पिछले साल सिर्फ 87 लाख, आंकड़ों में जानें कितना पैसा आया और कितना गया

PM CARES Fund report में receipts, payments और closing balance के आंकड़े जानें. 2024-25 में खर्च सिर्फ ₹87 लाख रहा, जबकि balance ₹8,452 करोड़ पहुंचा.

PM CARES Fund, PM CARES Fund Report
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PM-CARES फंड के ताजा आंकड़े बताते हैं कि महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर खर्च के बाद फंड यूज काफी धीमी हुई हैं. 2020-21 और 2021-22 में जहां हजारों करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, वहीं 2024-25 में यह घटकर सिर्फ ₹0.87 करोड़ रह गया. दूसरी ओर, कम खर्च के चलते फंड का क्लोजिंग बैलेंस बढ़कर ₹8,452.06 करोड़ पहुंच गया. शुरुआती वर्षों की तुलना में प्राप्तियां भी कम हुई हैं.

नए आंकड़े फंड के इस्तेमाल, खर्च की प्राथमिकताओं, बची रकम और हालिया वर्षों में इसकी भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े करते हैं. इसी आधार पर इसके अलग-अलग पहलुओं को समझना जरूरी है.

1. क्या महामारी के बाद बदली फंड की भूमिका?

PM-CARES की शुरुआत महामारी जैसी आपात स्थिति में तत्काल मदद के लिए हुई थी. कोविड के दौरान वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, अस्पताल और वैक्सीन से जुड़े खर्च किए गए. लेकिन महामारी का दबाव कम होने के बाद फंड से होने वाला खर्च तेजी से घटा. इससे सवाल यह है कि आपदा के बाद फंड की प्राथमिकताएं किस दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

2. बड़ी रकम जमा, लेकिन इस्तेमाल सीमित क्यों?

फंड में जमा रकम और उसके इस्तेमाल के बीच अंतर लगातार बढ़ा है. 2024-25 के अंत में ₹8,452.06 करोड़ का बैलेंस मौजूद था, जबकि उसी साल भुगतान केवल ₹0.87 करोड़ रहा. यानी बड़ी राशि खर्च होने के बजाय फंड में बनी रही. इससे आपातकालीन फंड के तौर पर धन की उपलब्धता और उसके वास्तविक इस्तेमाल के बीच संतुलन पर चर्चा बढ़ती है.

3. पीएम केयर्स फंड में भी कैसे दिखा महामारी का असर?

PM-CARES को शुरुआती दौर में बड़ी मात्रा में रकम मिली. 2020-21 में प्राप्तियां ₹7,913.55 करोड़ तक पहुंचीं, जो महामारी के दौरान बढ़े सार्वजनिक और कॉरपोरेट योगदान को दिखाती हैं. इसके बाद प्राप्तियां काफी नीचे आईं. हालांकि, 2024-25 में यह बढ़कर ₹1,279.91 करोड़ हुईं, लेकिन शुरुआती महामारी वर्ष के मुकाबले तस्वीर काफी अलग है.

4. 2022-23 के बाद खर्च में तेज गिरावट कैसे?

2022-23 में PM-CARES से ₹439.38 करोड़ का भुगतान हुआ था. इसमें PM CARES for Children योजना पर भी बड़ी राशि खर्च हुई. इसके अगले साल भुगतान घटकर ₹15.59 करोड़ रह गया और 2024-25 में केवल ₹0.87 करोड़ रहा. यह गिरावट बताती है कि महामारी से जुड़ी तत्काल जरूरतों के खत्म होने के बाद खर्च का स्तर काफी नीचे चला गया.

5. ₹324 करोड़ की वापसी पर क्यों उठे सवाल?

रिपोर्ट में लागू करने वाली एजेंसियों से करीब ₹324 करोड़ की रकम वापस आने का जिक्र भी चर्चा में है. इस वापसी से जुड़े भुगतान और उसके कारणों को लेकर सवाल उठे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने रिफंड और संबंधित जानकारी सार्वजनिक किए जाने की जरूरत पर सवाल उठाया है. इससे फंड के संचालन में पारदर्शिता का मुद्दा सामने आता है.

6. ऑडिट और पारदर्शिता पर बहस क्यों?

PM-CARES फंड का CAG ऑडिट के दायरे से बाहर होना लंबे समय से बहस का विषय रहा है. नई वित्तीय रिपोर्ट सामने आने के बाद भी फंड के स्रोत, खर्च और रिफंड से जुड़ी विस्तृत जानकारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. उपलब्ध आंकड़े वित्तीय स्थिति बताते हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक निगरानी के लिए अधिक विस्तृत जानकारी जरूरी है.

आंकड़ों देखीनरेंद्र मोदी
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