OCI कार्ड और नागरिकता नियम में बड़ा बदलाव: अब सब कुछ होगा डिजिटल, नाबलिगों के पास दो पासपोर्ट पर सख्ती; जानें पूरा अपडेट
केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) नियम 2026 लागू कर OCI कार्ड और नागरिकता प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है. नए नियमों में बच्चों के दो पासपोर्ट रखने पर सख्ती और ई-OCI कार्ड जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 30 अप्रैल 2026, गुरुवार को नागरिकता नियम 2009 में जरुरी बदलाव किए हैं. इन बदलावों को नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 नाम दिया गया है. इस नए नियम के तहत सरकार ने प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) कार्डधारकों और नागरिकता से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को अब पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला लिया है. इसका मकसद काम को आसान, तेज और पारदर्शी बनाना है.
नए नियम में बच्चों के बारे में एक खास प्रावधान जोड़ा गया है. अब साफ-साफ कहा गया है कि 'नाबालिग बच्चा (18 साल से कम) किसी भी समय भारतीय पासपोर्ट रखते हुए किसी दूसरे देश का पासपोर्ट नहीं रख सकता.' पहले भारत के बाहर जन्मे बच्चे का बर्थ रजिस्ट्रेशन कराने के लिए माता-पिता को उस देश के भारतीय दूतावास में आवेदन करना पड़ता था और यह घोषणा करनी पड़ती थी कि बच्चे के पास किसी दूसरे देश का पासपोर्ट नहीं है. अब इस नियम को और सख्ती से लागू किया जाएगा.
OCI कार्डहोल्डर्स के लिए बड़े डिजिटल बदलाव
ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य: अब OCI कार्ड बनवाने और OCI कार्ड छोड़ने दोनों की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है. सभी आवेदन अब https://ociservices.gov.in आधिकारिक वेबसाइट पर ही इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा किए जाएंगे. पुराने समय की कागजी कार्यवाही अब खत्म हो गई है.
ई-OCI कार्ड की शुरुआत: सरकार अब OCI कार्डहोल्डर्स को प्लास्टिक कार्ड के अलावा इलेक्ट्रॉनिक OCI (ई-OCI) भी जारी कर सकेगी. यानी अब कार्ड डिजिटल फॉर्म में भी मिल सकता है.
दस्तावेजों की दो प्रतियां जमा करने की जरूरत खत्म: पहले आवेदकों को दस्तावेजों की दो-दो कॉपी जमा करनी पड़ती थी. अब यह नियम हटा दिया गया है।
डिजिटल रजिस्टर: सरकार OCI कार्डधारकों का पूरा रिकॉर्ड अब डिजिटल रूप में रखेगी
OCI कार्ड त्यागने और रद्द करने के नए नियम
अगर कोई व्यक्ति अपना OCI कार्ड छोड़ना चाहता है, तो उसे अपना मूल कार्ड निकटतम भारतीय दूतावास, डाकघर या विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) को सौंपना होगा. अगर सरकार किसी की OCI स्थिति रद्द करती है, तो उस व्यक्ति को कार्ड लौटाना अनिवार्य है. अगर कार्ड नहीं लौटाया जाता, तो सरकार उसे आधिकारिक तौर पर रद्द घोषित कर सकती है. जिन लोगों को ई-OCI मिला है, उनकी डिजिटल पंजीकरण को भी सरकार रद्द कर सकती है.
फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन के लिए नया सहमति पत्र
OCI कार्ड बनवाते समय अब आवेदकों को एक नया सहमति पत्र (Consent Form) पर हस्ताक्षर करना होगा. इसमें वे अपनी बायोमेट्रिक जानकारी सरकार को देने की अनुमति देंगे. यह जानकारी भविष्य में फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन और एयरपोर्ट चेकिंग के लिए इस्तेमाल की जाएगी.
अस्वीकृत आवेदनों को चुनौती देने का नया प्रावधान
अब अगर किसी का OCI कार्ड या सिटीजनशिप का एप्लीकेशन रिजेक्टेड हो जाता है, तो वह उस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है. अपील उस अधिकारी से एक रैंक ऊपर वाले अधिकारी के पास जाएगी. नए नियम में सुनवाई का अधिकार भी शामिल किया गया है. यानी प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा. नागरिकता अधिनियम की धारा 15A के तहत रिव्यू के लिए आवेदन करने पर भी केंद्र सरकार को प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना होगा.




