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'इतिहास भूलना सबसे बड़ी भूल', अजीत डोभाल की युवाओं को कड़ी चेतावनी, बताया विकसित भारत का असली रास्ता

भारत की सुरक्षा नीति के सबसे अहम चेहरों में से एक अजीत डोभाल ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में युवाओं को संबोधित करते हुए इतिहास, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक ही सूत्र में पिरो दिया. उनका भाषण केवल प्रेरक नहीं था, बल्कि चेतावनी भी था कि अगर देश ने अपने अतीत से सबक नहीं लिया, तो भविष्य की कीमत चुकानी पड़ेगी.

इतिहास भूलना सबसे बड़ी भूल, अजीत डोभाल की युवाओं को कड़ी चेतावनी, बताया विकसित भारत का असली रास्ता
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( Image Source:  @ANI )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 10 Jan 2026 12:39 PM

भारत की सुरक्षा नीति के सबसे अहम चेहरों में से एक अजीत डोभाल ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में युवाओं को संबोधित करते हुए इतिहास, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक ही सूत्र में पिरो दिया. उनका भाषण केवल प्रेरक नहीं था, बल्कि चेतावनी भी था कि अगर देश ने अपने अतीत से सबक नहीं लिया, तो भविष्य की कीमत चुकानी पड़ेगी. डोभाल ने युवाओं से कहा कि भारत यूं ही आजाद नहीं हुआ. इसके पीछे अपमान, संघर्ष और बेबसी का लंबा इतिहास है, जिसे समझना और उससे ऊर्जा लेना जरूरी है.

डोभाल के शब्दों में भावनात्मक उकसावे से ज्यादा रणनीतिक सोच झलकती है. उन्होंने “बदला” शब्द को प्रतीक के तौर पर रखते हुए स्पष्ट किया कि यह हिंसा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संकल्प और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की प्रेरणा है. उनका जोर इस बात पर था कि विकसित भारत केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि सुरक्षा, निर्णय क्षमता और नेतृत्व के बल पर खड़ा होने वाली सभ्यता है और इसकी बागडोर आज के युवाओं के हाथ में होगी.

डोभाल के भाषण की 10 बड़ी बातें

1. इतिहास को भूलना सबसे बड़ी भूल

डोभाल ने कहा कि भारत का इतिहास अपमान और बेबसी से भरा रहा है. अगर नई पीढ़ी यह भूल गई कि देश ने किन परिस्थितियों में आज़ादी पाई, तो वही गलतियां दोहराई जाएंगी.

2. ‘बदला’ हिंसा नहीं, प्रेरक शक्ति

उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘बदला’ कोई आदर्श शब्द नहीं, लेकिन यह एक शक्तिशाली ऊर्जा है—जो आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव को वापस पाने की प्रेरणा देता है.

3. भारत की सभ्यतागत श्रेष्ठता का स्मरण

डोभाल ने कहा कि भारत एक समय अत्यंत विकसित सभ्यता था. हमने न तो मंदिर तोड़े, न लूटपाट की, न आक्रमण किए. जब दुनिया कई मायनों में पिछड़ी थी.

4. सुरक्षा खतरों की अनदेखी घातक

उन्होंने चेताया कि इतिहास ने यह सिखाया है कि सुरक्षा खतरों को न समझना और उदासीन रहना देश के लिए विनाशकारी साबित होता है.

5. युवाओं के भीतर ‘आग’ जरूरी

डोभाल के मुताबिक, हर युवा के भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने की आग होनी चाहिए. बिना आक्रामक हुए, लेकिन पूरी दृढ़ता के साथ.

6. निर्णय क्षमता ही नेतृत्व की असली ताकत

उन्होंने कहा कि विकसित भारत को नेतृत्व देने वाले वही होंगे जो सही समय पर सही फैसले ले सकें और उन्हें पूरे विश्वास के साथ लागू कर सकें.


7. विकास ‘ऑटो-पायलट’ पर भी संभव, नेतृत्व नहीं

डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की तय गति से भारत विकसित हो जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि उस विकसित भारत का नेतृत्व कौन और कितना सक्षम होगा.

8. हर क्षेत्र में नेतृत्व की जरूरत

विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा या किसी भी क्षेत्र में डोभाल ने युवाओं से कहा कि नेतृत्व की जिम्मेदारी उठाने के लिए आज से ही निर्णय लेने की आदत डालें.

9. आत्मसम्मान और पहचान की पुनर्प्राप्ति

उन्होंने जोर दिया कि भारत को अपने अधिकारों, विचारों और विश्वासों के आधार पर फिर महान बनना होगा. बाहरी मान्यता के इंतज़ार के बिना.

10. भविष्य की पीढ़ियों के लिए चेतावनी

डोभाल ने अंत में कहा कि अगर आने वाली पीढ़ियां इतिहास के सबक भूल गईं, तो यह केवल चूक नहीं, बल्कि देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी.

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