'एक भी गाड़ी खराब हुई हो तो सबूत दीजिए', E20 पेट्रोल विवाद पर गडकरी का बयान; बोले- मुझे इथेनॉल से कोई फायदा नहीं -10 Points
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को लेकर अपने ऊपर लगे हितों के टकराव (Conflict of Interest) के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इथेनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 0.07% है. यह नीति किसानों, पर्यावरण और देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बनाई गई है.
नितिन गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर उठ रहे विवादों पर विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने साफ कहा कि इथेनॉल नीति से उन्हें कोई निजी आर्थिक लाभ नहीं होता और उनके खिलाफ लगाए जा रहे हितों के टकराव (Conflict of Interest) के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं.
इंडिया टुडे टीवी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में गडकरी ने कहा कि उनके परिवार का चीनी उद्योग (Sugar Business) इथेनॉल नीति लागू होने से काफी पहले से मौजूद है. उन्होंने बताया कि देश में कुल इथेनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी केवल 0.07 प्रतिशत है. इसलिए यह कहना कि उन्होंने अपने फायदे के लिए नीति बनाई, पूरी तरह गलत है.
नितिन गडकरी के बयान की 10 बड़ी बातें (10 Key Points)
- 'इथेनॉल नीति से मुझे कोई निजी फायदा नहीं': नितिन गडकरी ने कहा कि देश में करीब 1,500 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन होता है, लेकिन इसमें उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 0.07% है. उनका कहना है कि इतनी छोटी हिस्सेदारी से किसी बड़े आर्थिक लाभ या नीति को प्रभावित करने की बात करना तथ्यहीन है.
- हितों के टकराव के आरोपों को बताया निराधार: गडकरी ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह गलत है कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए इथेनॉल नीति बनाई. उन्होंने कहा कि 0.07% हिस्सेदारी रखने वाला व्यक्ति राष्ट्रीय नीति को अपने फायदे के लिए प्रभावित नहीं कर सकता.
- इथेनॉल नहीं, वैकल्पिक ईंधन के समर्थक: उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सिर्फ इथेनॉल की नहीं, बल्कि सभी वैकल्पिक ईंधनों (Alternative Fuels) की वकालत करते हैं. उनका मानना है कि इससे देश का कच्चे तेल पर आयात निर्भरता कम होगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी.
- नीति अकेले नहीं बनाई गई: गडकरी ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला उन्होंने अकेले नहीं लिया. यह नीति पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वैज्ञानिक संस्थानों से व्यापक चर्चा और परीक्षण के बाद लागू की गई.
- E20 पेट्रोल से वाहन खराब होने का सबूत मांगा: मंत्री ने कहा कि यदि किसी की गाड़ी E20 पेट्रोल से खराब हुई है, तो वह डीलर और परिवहन मंत्रालय में शिकायत करे. सरकार मामले की जांच कराएगी और जरूरत पड़ने पर राहत भी देगी.
- वाहन कंपनियों ने नहीं की शिकायत: गडकरी ने दावा किया कि मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी प्रमुख वाहन कंपनियों ने E20 ईंधन से वाहनों को नुकसान होने की कोई शिकायत सरकार के सामने नहीं रखी है.
- टोयोटा वाहन के मामले का भी दिया उदाहरण: उन्होंने बताया कि हाल ही में एक टोयोटा कार में आई खराबी की जांच में पता चला कि समस्या इथेनॉल नहीं, बल्कि ईंधन में पानी की मिलावट (Water Contamination) के कारण हुई थी.
- वर्षों की टेस्टिंग के बाद लागू होती है नीति: गडकरी ने कहा कि यह कोई प्रयोग (Pilot Project) नहीं है. किसी भी ईंधन या वाहन को मंजूरी देने से पहले कई वर्षों तक परीक्षण किया जाता है और लाखों किलोमीटर तक उसकी जांच होती है.
- विवाद को बताया साजिश: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके खिलाफ चलाया जा रहा विवाद राजनीतिक रूप से प्रेरित है. उनका आरोप है कि कुछ लोग उन्हें और इथेनॉल कार्यक्रम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.
- दुनिया के कई देशों में पहले से हो रहा इस्तेमाल: गडकरी ने कहा कि अमेरिका, ब्राजील, जापान, जर्मनी, थाईलैंड और स्वीडन जैसे कई देशों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग वर्षों से हो रहा है. भारत भी इसी वैश्विक मॉडल का पालन कर रहा है, न कि किसी नए प्रयोग का...
पुराने वाहनों को लेकर बहस जारी
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन कुछ वाहन मालिकों और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने पुराने मॉडलों में इसकी दीर्घकालिक अनुकूलता (Compatibility) और माइलेज पर असर को लेकर चिंता जताई है. इसी वजह से E20 पेट्रोल पर बहस अभी भी जारी है.




