'मैंने कभी निमंत्रण स्वीकार नहीं...', NALSAR विवाद का CJI सूर्यकांत ने खुद बताया पूरा सच, कैसे बढ़ गया इतना विवाद?
मुख्य न्यायाधीश ने NALSAR के दीक्षांत समारोह में शामिल होने की खबरों पर कहा कि उन्होंने कभी निमंत्रण स्वीकार किया ही नहीं. वहीं उनको मुख्य अतिथि के रूप में शामिल करने को लेकर छात्रों ने विरोध किया था.
CJI Surya Kant
NALSAR यूनिवर्सिटी विवाद को लेकर आए दिन नए-नए बयान सामने आ रहे हैं. विवाद की शुरुआत यूनिवर्सिटी द्वारा दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि का निमंत्रण देना रहा था, जिसका लॉ स्टूडेंट ने विरोध किया था. जिसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला किया और फिर कुछ ही घंटों बाद फैसला वापस भी लिया. इतना ही नहीं BCI चेयरमैन मनन मिश्रा ने भी छात्रों से माफी मांगी थी.
वहीं अब इस पूरे विवाद में CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान सामने आया है. जोधपुर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करने के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब उन्होंने निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था, तो समारोह में शामिल होने का सवाल भी नहीं उठता.
क्या बोले CJI सूर्यकांत?
मुख्य न्यायाधीश ने NALSAR के दीक्षांत समारोह में शामिल होने की खबरों पर स्थिति साफ करते हुए कहा, "मैंने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने के लिए नालसर के निमंत्रण को कभी स्वीकार नहीं किया और मेरे दीक्षांत समारोह में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता."
कैसे बढ़ा विवाद?
विवाद तब गहरा गया जब 13 अगस्त को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी राज्य बार काउंसिलों को एक सर्कुलर जारी किया. इसमें कहा गया था कि 2026 में NALSAR से कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को अगले आदेश तक अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं किया जाए. इस कदम के बाद विधि छात्रों खुस्सा देखने को मिला था. BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने विश्वविद्यालय से एक रिपोर्ट भी मांगी थी. रिपोर्ट में उन छात्रों की पहचान करने को कहा गया था, जो कथित तौर पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के खिलाफ अभियान आयोजित करने या उसमें शामिल होने से जुड़े थे.
छात्रों ने CJI के खिलाफ क्यों जताई थी आपत्ति?
मामले की पृष्ठभूमि में NALSAR के कुछ स्नातक छात्रों की कथित आपत्ति थी. खबरों के मुताबिक, छात्रों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर CJI सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए थे. छात्रों की आपत्ति एक अलग न्यायिक कार्यवाही के दौरान CJI की अध्यक्षता वाली पीठ की टिप्पणियों से जुड़ी बताई गई.
यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस की कार्रवाई से संबंधित था. उस दौरान तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग बिना किसी औपचारिक याचिका के की गई थी. पीठ ने संबंधित वकील को विधिवत याचिका दायर करने को कहा और मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था.
CJI ने BCI को क्यों लगाई फटकार?
BCI की कार्रवाई की आलोचना के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने परिषद के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया और निर्देश दिया कि BCI या किसी भी राज्य बार काउंसिल की ओर से किसी विधि विश्वविद्यालय के छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए.
कार्यवाही के दौरान CJI ने BCI की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर उन्हें विरोध करने का कोई कारण है, तो बीसीआई का इससे कोई लेना-देना नहीं है. हम आपके साथ हैं, छात्रों ने मुझे पत्र लिखा है. यह छात्रों और मेरे बीच संवाद है. यह बिल्कुल अनावश्यक था. सरासर बेवजह था."
NALSAR विवाद में अब CJI का बयान क्यों अहम?
NALSAR दीक्षांत समारोह को लेकर CJI सूर्यकांत का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि मुख्य अतिथि के तौर पर उनकी उपस्थिति को लेकर बनी चर्चा और उनका वास्तविक निर्णय अलग-अलग बातें थीं. वहीं, BCI की कार्रवाई वापस लिए जाने और छात्रों के खिलाफ सभी कार्यवाहियां बंद किए जाने के बाद विवाद का तत्काल प्रभाव भी कम हुआ है.




