12 साल, 12 बड़े फैसले... PM के रूप में नरेंद्र मोदी ने क्या-क्या बदला, किन फैसलों पर मचा था बवाल?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 2014 से 2026 तक अपने 12 साल पूरे कर लिए हैं. इस दौरान मोदी सरकार ने कई बड़े फैसले लिए, कुछ का जनता ने स्वागत किया तो कई पर बवाल भी देखने को मिला.
PM Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 2014 से 2026 तक अपने 12 साल पूरे कर लिए हैं. इस दौरान देश में डिजिटल परिवर्तन, वित्तीय समावेशन, सामाजिक कल्याण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव देखने को मिले. इन सालों में शुरू की गई योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित किया और सरकारी सुविधाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की.
हालांकि, इन उपलब्धियों के साथ कुछ ऐसे फैसले भी रहे, जिन्होंने देशभर में तीखी राजनीतिक बहस, विरोध प्रदर्शन और व्यापक चर्चा को जन्म दिया. कई निर्णयों को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने दिखाई दिए और जनता में भी आक्रोश देखने को मिला.
आइए एक्सप्लेनर में समझते हैं मोदी सरकार के 12 सालों के प्रमुख फैसलों और उनसे जुड़े विवादों को
1. जन धन योजना
मोदी सरकार के शुरुआती सालों में शुरू की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना का उद्देश्य देश के हर परिवार को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना था. इस पहल के तहत करोड़ों नए बैंक खाते खोले गए, जिससे वित्तीय समावेशन को नई गति मिली. जन धन खातों को आधार और मोबाइल नंबर से जोड़ने के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था और मजबूत हुई.
2. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)
सरकार ने DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली को व्यापक स्तर पर लागू किया. इसके जरिए विभिन्न योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाने लगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका कम करना और सरकारी सहायता को पारदर्शी बनाना था.
3. UPI
भारत में डिजिटल भुगतान क्रांति का सबसे बड़ा उदाहरण यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को माना जाता है. इसकी मदद से छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक डिजिटल लेनदेन आम हो गया. आज देश के अधिकांश हिस्सों में QR कोड आधारित भुगतान आम बात बन चुका है.
4. स्वच्छ भारत मिशन
सफाई और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन को सरकार की प्रमुख पहलों में गिना जाता है. इस अभियान के तहत देशभर में शौचालय निर्माण और स्वच्छता जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया. सरकार का दावा है कि इस अभियान ने खुले में शौच की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
5. उज्ज्वला योजना
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए. इसका उद्देश्य पारंपरिक ईंधन के उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना था. यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावी मानी गई.
6. आयुष्मान भारत
आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज उपलब्ध कराया गया. सरकार के अनुसार इस योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज को अधिक सुलभ बनाया.
7. पीएम किसान सम्मान निधि
किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाली प्रमुख पहलों में शामिल है.
किन फैसलों पर सबसे ज्यादा विवाद हुआ?
8. तीन कृषि कानून
साल 2020 में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से तीन नए कृषि कानून लागू किए. हालांकि, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने इन कानूनों का विरोध करते हुए लंबा आंदोलन शुरू कर दिया. करीब एक वर्ष तक चले आंदोलन के बाद सरकार ने नवंबर 2021 में इन कानूनों को वापस लेने का फैसला किया.
9. नोटबंदी
8 नवंबर 2016 को सरकार ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य घोषित कर दिया. इस फैसले का उद्देश्य काले धन, नकली मुद्रा और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना बताया गया. हालांकि, विपक्ष और कई अर्थशास्त्रियों ने इस कदम की आलोचना की और इसे आम जनता के लिए कठिनाई पैदा करने वाला निर्णय बताया.
10. नागरिकता संशोधन कानून (CAA)
साल 2019 में संसद से पारित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देशभर में व्यापक बहस हुई. कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया. दिल्ली के शाहीन बाग सहित कई स्थानों पर लंबे समय तक धरने और प्रदर्शन हुए.
11. अग्निपथ योजना
साल 2022 में सेना भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करते हुए सरकार ने अग्निपथ योजना शुरू की. इसके तहत युवाओं को सीमित अवधि के लिए सेना में सेवा देने का अवसर प्रदान किया गया. योजना की घोषणा के बाद कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए. युवाओं और विपक्ष का तर्क था कि नई व्यवस्था रोजगार की दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है. कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक भी हुए.
12. GST
1 जुलाई 2017 से पूरे देश में 'एक देश, एक टैक्स' के तहत जीएसटी लागू किया गया था. इसके जटिल नियमों और तकनीकी दिक्कतों के कारण छोटे व्यापारियों और कारोबारियों में भारी नाराजगी देखी गई. विपक्ष आज भी इसे 'गब्बर सिंह टैक्स' कहकर सरकार को घेराता है.




