शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी समेत ये 5 चीजें? जानिए देवों के देव महादेव से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
सनातन परंपरा में भगवान शिव की पूजा से जुड़ी कई मान्यताएं हैं. जहां बेलपत्र, जल और धतूरा शिवलिंग पर चढ़ाना शुभ माना जाता है, वहीं तुलसी, केतकी फूल, हल्दी समेत कुछ चीजों को अर्पित करने से बचने की धार्मिक मान्यता है.
सनातन धर्म में भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा गया है. उनकी पूजा बेहद सरल और शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है. मान्यता है कि सच्चे मन से केवल जल और बेलपत्र अर्पित करने मात्र से भी भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं. शिवपुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी, भांग, धतूरा, चंदन, फल और पुष्प चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है.
हालांकि, कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित करना वर्जित माना गया है. आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं...
केतकी का फूल क्यों नहीं चढ़ाया जाता?
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ. तब भगवान शिव अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और दोनों देवताओं से उसका आदि और अंत खोजने को कहा. कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने केतकी के फूल को झूठी गवाही देने के लिए तैयार कर लिया और भगवान शिव से असत्य कहा कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का छोर मिल गया है. इस असत्य से भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने केतकी के फूल को श्राप दिया कि उसे कभी भी उनकी पूजा में स्थान नहीं मिलेगा. तभी से शिवलिंग पर केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता.
शिव पूजा में तुलसी दल क्यों वर्जित है ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, असुर जालंधर भगवान शिव का परम भक्त था. उसका वध स्वयं भगवान शिव ने किया था. जालंधर की पत्नी देवी तुलसी थीं, जिन्हें अपने पति की मृत्यु का गहरा दुख हुआ. मान्यता है कि इसी कारण तुलसी ने भगवान शिव की पूजा में अपने पत्तों का उपयोग वर्जित कर दिया. यही वजह है कि जहां भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है, वहीं शिवपूजा में तुलसी अर्पित नहीं की जाती.
शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?
हिंदू परंपरा में हल्दी को सौभाग्य और स्त्रीत्व का प्रतीक माना गया है. वहीं शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने की मनाही बताई गई है. इसके अलावा हल्दी की तासीर गर्म मानी जाती है, जबकि भगवान शिव को शीतल वस्तुएं प्रिय हैं. इसलिए उनकी पूजा में बेलपत्र, गंगाजल, चंदन, भांग और कच्चा दूध जैसी ठंडी चीजें अर्पित की जाती हैं.
शंख से शिवलिंग पर जल चढ़ाना क्यों माना गया निषिद्ध?
शिवपुराण के अनुसार शंखचूड़ नाम का एक शक्तिशाली दैत्य था, जिसका संहार भगवान शिव ने किया था. कथा के अनुसार उसके शरीर की भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई. इसी कारण शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना उचित नहीं माना जाता. विशेष रूप से महाशिवरात्रि के अवसर पर शंख से अभिषेक करने से बचने की सलाह दी जाती है.
नारियल के जल से अभिषेक क्यों नहीं किया जाता?
धार्मिक मान्यता है कि नारियल माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और इसे श्रीफल भी कहा जाता है. भगवान विष्णु की पूजा में इसका विशेष महत्व है. हालांकि शिवलिंग पर नारियल अर्पित किया जा सकता है, लेकिन उसके जल से अभिषेक करना उचित नहीं माना गया है. मान्यता है कि नारियल का जल देवी लक्ष्मी से जुड़ा होने के कारण शिव पूजा में प्रयोग नहीं किया जाता.




