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टॉप 5 से लेकर सबसे खराब काम करने वालों तक, मोदी सरकार के मंत्रियों की बनी लिस्ट, कैसे हुआ आंकलन और क्या है चेतावनी?

मोदी सरकार ने मंत्रियों का परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड तैयार किया. फाइल निस्तारण, पब्लिक ग्रीवांस और कामकाज के आधार पर टॉप-5 और बॉटम-5 की चर्चा तेज.

Modi Cabinet Report Card Modi Ministers Performance
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( Image Source:  @narendramodi )

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA-3 सरकार के दो साल पूरे होने से पहले मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में मंत्रालयों के कामकाज का विस्तृत आकलन किया. करीब चार घंटे चली इस बैठक में कई मंत्रालयों की कार्यशैली, फैसलों की गति और जनता से जुड़े मामलों के निपटारे पर फोकस रहा. राजनीतिक हलकों में इस बैठक को सिर्फ समीक्षा नहीं, बल्कि संभावित “मिड-टर्म परफॉर्मेंस टेस्ट” माना जा रहा है. यह भी चर्चा है कि कैबिनेट में शामिल मंत्रियों में फेरबदल भी आने वाले समय में हो सकता है. यह काम 2027 में पांच राज्यों में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले होगा.

किन आधारों पर हुआ मंत्रियों का मूल्यांकन?

बैठक में मंत्रालयों की रैंकिंग तय करने के लिए मुख्य रूप से दो बड़े पैमानों को आधार बनाया गया. पहला था फाइलों के निस्तारण की रफ्तार और दूसरा जनता की शिकायतों के समाधान की स्थिति. सरकार यह देखना चाहती है कि कौन-सा मंत्रालय फैसले लेने में तेजी दिखा रहा है और कौन-सा विभाग लालफीताशाही में फंसा हुआ है.

इसके अलावा, योजनाओं की जमीनी पहुंच, विभागीय समन्वय, डिजिटल मॉनिटरिंग और “ईज ऑफ लिविंग” पर असर को भी समीक्षा का हिस्सा बनाया गया. बैठक में कैबिनेट सचिव और नीति आयोग की ओर से अलग-अलग मंत्रालयों की कार्यप्रणाली पर प्रेजेंटेशन भी दिया गया.

‘टॉप-5’ और ‘बॉटम-5’ की चर्चा क्यों?

सूत्रों के मुताबिक बैठक में सबसे अच्छा और सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों की अलग-अलग सूची तैयार की गई. हालांकि, सरकार की ओर से आधिकारिक नाम सार्वजनिक नहीं किए गए, लेकिन इस रिपोर्ट कार्ड ने कई मंत्रियों की चिंता बढ़ा दी है.

बताया जा रहा है कि जिन मंत्रालयों में फाइल पेंडेंसी ज्यादा रही, जनता की शिकायतों का समाधान धीमा रहा या योजनाओं का असर कमजोर दिखा, उन्हें निचले पायदान पर रखा गया. दूसरी ओर तेजी से फैसले लेने वाले और योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने वाले मंत्रालयों को बेहतर प्रदर्शन करने वालों में शामिल किया गया.

पीएम मोदी ने क्या दी चेतावनी?

प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि सरकार का काम सिर्फ योजनाएं घोषित करना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर लागू करना है. बैठक में कहा गया कि मंत्रालयों को “स्पीड और डिलीवरी” दोनों पर ध्यान देना होगा.

कमजोर प्रदर्शन वाले विभागों को स्पष्ट संकेत दिया गया कि लंबित फाइलों को तुरंत निपटाया जाए और जनता की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि मंत्रालयों में अनावश्यक देरी और प्रशासनिक ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी.

सरकार का जोर इस बात पर रहा कि हर फैसला आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने वाला होना चाहिए. यही वजह है कि “Ease of Living” को बैठक का केंद्रीय विषय माना गया.

किन मंत्रालयों पर सबसे ज्यादा नजर?

बैठक में कृषि, सड़क परिवहन, ऊर्जा, श्रम, वाणिज्य, विदेश और कॉर्पोरेट मामलों से जुड़े मंत्रालयों की कार्यप्रणाली पर विशेष चर्चा हुई. सरकार यह देख रही है कि कौन-से विभाग सीधे जनता पर असर डाल रहे हैं और किन क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा.

विशेष रूप से वे मंत्रालय निगरानी में बताए जा रहे हैं जहां योजनाओं की घोषणा तो तेजी से हुई, लेकिन जमीन पर उसका असर सीमित दिखा. कई विभागों में शिकायत निवारण प्रणाली और फाइल क्लियरेंस की गति भी सवालों के घेरे में रही.

क्या कैबिनेट फेरबदल की तैयारी?

9 जून 2026 को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे हो रहे हैं. ऐसे में यह समीक्षा बैठक संभावित कैबिनेट फेरबदल से जोड़कर देखी जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार अब 2027 के कई राज्यों के चुनाव और 2029 की तैयारी को ध्यान में रखते हुए टीम में बदलाव कर सकती है.

संभावना जताई जा रही है कि कमजोर प्रदर्शन वाले कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें संगठन में भेजा जा सकता है. वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवा चेहरों को ज्यादा जिम्मेदारी मिलने की चर्चा भी तेज है.

पिछली बार किन बड़े चेहरों की हुई थी छुट्टी?

मोदी 3.0 सरकार के गठन के दौरान 2024 में बड़ा फेरबदल देखने को मिला था. उस समय कई बड़े नेताओं को मंत्रिपरिषद से बाहर कर दिया गया था. इनमें Smriti Irani, Anurag Thakur और Narayan Rane जैसे नाम शामिल रहे. कुछ नेताओं को चुनाव हारने के बाद हटाया गया, जबकि कुछ को संगठनात्मक और राजनीतिक कारणों से मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली. इसी वजह से मौजूदा समीक्षा बैठक को भी बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

‘विकसित भारत 2047’ पर फोकस

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को याद दिलाया कि “विकसित भारत 2047” सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं बल्कि सरकार की दीर्घकालिक रणनीति है. उन्होंने कहा कि हर मंत्रालय को अपने कामकाज में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ानी होगी.

सरकार अब सिर्फ घोषणाओं की राजनीति नहीं बल्कि “परफॉर्मेंस पॉलिटिक्स” के जरिए जनता के बीच अपनी छवि मजबूत करना चाहती है. यही कारण है कि मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा अब पहले से ज्यादा सख्त और डेटा आधारित होती जा रही है.

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