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खरगे के जाने के बाद ‘शुद्धिकरण हवन’, अब CWC में छलका पार्टी अध्यक्ष का दर्द; कांग्रेस के ‘मीडिया स्टार्स’ की चुप्पी पर क्यों हुए नाराज?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CWC बैठक में हल्द्वानी में उनके दौरे के बाद हुए ‘शुद्धिकरण हवन’ का मुद्दा उठाया. खरगे ने नेताओं की चुप्पी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें इस मामले पर खुलकर समर्थन नहीं मिलने से दुख और चोट पहुंची है.

खरगे के जाने के बाद ‘शुद्धिकरण हवन’, अब CWC में छलका पार्टी अध्यक्ष का दर्द; कांग्रेस के ‘मीडिया स्टार्स’ की चुप्पी पर क्यों हुए नाराज?
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( Image Source:  @ANI )

कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बुधवार को हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी व्यक्तिगत नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनके दौरे के बाद हुए ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम के मुद्दे पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर उनका समर्थन नहीं किया और इसकी निंदा नहीं की, जिससे उन्हें ‘दुख’ और ‘चोट’ पहुंची.

खरगे ने कहा कि उन्हें यह बात खास तौर पर परेशान कर रही है कि CWC के कई सदस्य इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आए. उन्होंने बैठक में मौजूद नेताओं से कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि खासकर वे ‘अच्छे दिखने वाले लोग’, जिन्हें मीडिया में जगह मिलती है, उन्होंने इस घटना पर कुछ नहीं कहा.

क्या है ‘शुद्धिकरण’ का पूरा मामला?

मल्लिकार्जुन खरगे कुछ दिन पहले उत्तराखंड के हल्द्वानी गए थे. उनके दौरे के बाद वहां एक ‘शुद्धिकरण हवन’ आयोजित किया गया था. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोग बीजेपी से जुड़े हुए हैं और यह घटना जातिवादी मानसिकता को दिखाती है. हालांकि, बीजेपी ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया था.

खरगे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठाया था. उन्होंने कहा था कि उन्होंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि वह दलित हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा या बचाव किया जाए. लेकिन हल्द्वानी में उनके दौरे के बाद आयोजित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम ने उन्हें अपमानित महसूस कराया.

CWC बैठक में क्या बोले खरगे?

बुधवार को CWC की बैठक में खरगे ने एक बार फिर इस मुद्दे को उठाया. बैठक में मौजूद नेताओं के मुताबिक, खरगे ने कहा कि वह इस बात से ‘आहत’ हैं कि CWC के सभी सदस्य, खासकर वे नेता जिन्हें मीडिया में ज्यादा जगह मिलती है, इस मामले पर खुलकर नहीं बोले.

AICC के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक में कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया था और घटना की निंदा भी की थी. हालांकि, बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार, खरगे की बॉडी लैंग्वेज से ऐसा लगा कि वे वेणुगोपाल के जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे. खरगे ने किसी नेता का नाम नहीं लिया. इसके बाद कांग्रेस नेताओं के बीच इस बात को लेकर सिर्फ अटकलें लगती रहीं कि वह किन नेताओं की ओर इशारा कर रहे थे.

पार्टी लाइन से अलग बयान देने वालों पर क्या कहा?

खरगे ने बिना किसी का नाम लिए यह भी कहा कि कांग्रेस में कुछ नेता ऐसे हैं, जो अक्सर ऐसे बयान देते हैं या लेख लिखते हैं, जो पार्टी की आधिकारिक लाइन के अनुरूप नहीं होते. बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए केसी वेणुगोपाल ने ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर कांग्रेस का रुख दोहराया. उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में हुई घटना ‘अस्वीकार्य’ और ‘निंदनीय’ है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना बीजेपी की मानसिकता को दर्शाती है.

CWC में ‘Cockroach Janta Party’ में क्या कहा गया?

CWC की बैठक में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने ‘Cockroach Janta Party’ यानी CJP का मुद्दा भी उठाया. कन्हैया कुमार कांग्रेस की छात्र यूनिट NSUI के AICC प्रभारी हैं. उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा कि कांग्रेस को ऐसे समूहों के लिए राजनीतिक जगह नहीं छोड़नी चाहिए. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कई नेता कन्हैया कुमार की इस राय से सहमत हैं. कांग्रेस अब तक CJP से दूरी बनाए हुए है. हालांकि, पार्टी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है और इसे रोजगार के बड़े मुद्दे से जोड़कर देखा है.

CWC के प्रस्ताव में CJP का नाम नहीं लिया गया. हालांकि, प्रस्ताव में कहा गया कि छात्र समूहों और संसद के अंदर और बाहर एकजुट विपक्ष की लगातार बनी रही दबाव की वजह से शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

अमेरिकी दबाव वाले मुद्दे पर क्या हुई बातचीत?

बैठक के दौरान लोकसभा सांसद शशि थरूर ने भी एक मुद्दा उठाया. उन्होंने अमेरिका की ओर से भारत पर बनाए जा रहे दबाव के संदर्भ में CWC के प्रस्ताव के ड्राफ्ट में इस्तेमाल किए गए ‘bullying’ शब्द को बदलने की सलाह दी. खरगे और कुछ अन्य नेताओं ने कथित तौर पर कहा कि ‘bullying’ शब्द असंसदीय नहीं है. इसके बावजूद अंतिम प्रस्ताव में इस शब्द को शामिल नहीं किया गया.

अंतिम प्रस्ताव में कहा गया कि कांग्रेस कार्यसमिति इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि मोदी सरकार अमेरिकी दबाव के सामने भारत की कृषि और ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ उसकी रणनीतिक संप्रभुता से भी समझौता कर रही है.

राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर क्या कहा?

CWC बैठक में राहुल गांधी ने छात्र और युवा प्रदर्शनों तथा अपने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के संदर्भ में भी बात की. सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भारत का अतीत हैं. हालांकि, राहुल गांधी ने वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी के उस आकलन से सहमति नहीं जताई कि 1990 के दशक में हुआ मंडल विरोधी आंदोलन आखिरी बड़ा छात्र आंदोलन था. मनीष तिवारी ने बैठक में उस आंदोलन का जिक्र किया था, जिसमें 62 लोगों ने आत्मदाह किया था और पुलिस फायरिंग में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. राहुल गांधी ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ अभियान एक बेहद सफल छात्र आंदोलन रहा है.

CWC प्रस्ताव में भी ‘छात्रों की गूंज’ का जिक्र?

CWC की ओर से बाद में पारित किए गए प्रस्ताव में भी ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का उल्लेख किया गया. प्रस्ताव में कहा गया कि इस अभियान को लोगों की ओर से जबरदस्त सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है. इस तरह CWC की बैठक में जहां मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर पार्टी नेताओं की चुप्पी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की, वहीं बैठक में पार्टी लाइन से अलग बयानों, छात्र आंदोलनों, अमेरिका के दबाव और विपक्षी राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई.

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