धोती-कुर्ते में Entry, खाकी में बदमाशों पर एक्शन! 93 एनकाउंटर से चर्चा में आए मेरठ के नए SSP बीबीजीटीएस मूर्ति कौन?
मेरठ के नए SSP बीबीजीटीएस मूर्ति धोती-कुर्ते में चार्ज लेने पहुंचे. जानें उनकी UPSC Success Story, IPS करियर, कासगंज और झांसी की पोस्टिंग. इसी के साथ आइए उनके बारे जानते हैं...
पुलिस अधिकारियों की पहचान आमतौर पर उनकी वर्दी और सख्त प्रशासनिक छवि से होती है, लेकिन मेरठ के नए SSP बीबीजीटीएस मूर्ति की पहली तस्वीर ने ही लोगों का ध्यान खींच लिया. 20 अगस्त को झांसी से मेरठ पहुंचे मूर्ति जब सर्किट हाउस पहुंचे तो वह पुलिस की वर्दी में नहीं, बल्कि पारंपरिक धोती-कुर्ते में नजर आए.
अधिकारियों ने उनका स्वागत किया. इसके बाद वह पुलिस कार्यालय पहुंचे, वर्दी पहनी और मेरठ के SSP के तौर पर औपचारिक रूप से कार्यभार संभाला. उनका यह पारंपरिक अंदाज स्थानीय स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बन गया जिसका वीडियो भी काफी तेजी से वायरल हो रहा है.
बीबीजीटीएस मूर्ति की कहानी सिर्फ उनके धोती-कुर्ते वाले अंदाज तक सीमित नहीं है. तेलंगाना में पढ़ाई करने वाले मूर्ति ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा के जरिए IPS का सफर शुरू किया और उत्तर प्रदेश कैडर में आने के बाद अलग भाषा, संस्कृति और प्रशासनिक माहौल के बीच खुद को ढाला. कासगंज में माफिया के खिलाफ कार्रवाई से लेकर झांसी में गंभीर अपराधों के खुलासे तक उनका पुलिस करियर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरा है.
कौन हैं मेरठ के नए SSP बीबीजीटीएस मूर्ति?
बीबीजीटीएस मूर्ति 2015 बैच के IPS अधिकारी हैं. उनका जन्म 12 फरवरी 1985 को तिरुपति में हुआ और उनका परिवार तेलंगाना से जुड़ा है. उनके पिता का नाम बी. ईश्वरैया बताया जाता है. मूर्ति ने अपनी शुरुआती पढ़ाई हैदराबाद में की. उन्होंने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में BTech किया और इसके बाद मार्केटिंग में MBA की डिग्री हासिल की. टेक्निकल एजुकेशन और मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया. UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के बाद उनका चयन IPS के लिए हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला.
2015 में UPSC पास कर बने IPS
बीबीजीटीएस मूर्ति का IPS में चयन UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2015 के जरिए हुआ. उनकी भर्ती की तारीख 28 दिसंबर 2015 दर्ज है. IPS बनने के बाद उनकी शुरुआती जिम्मेदारियों में गाजियाबाद की पोस्टिंग शामिल रही. इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. वह लखनऊ में इंटेलिजेंस के SP, कानपुर देहात के SP और कासगंज के SP जैसी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. बाद में उन्हें झांसी जैसे महत्वपूर्ण जिले की पुलिस व्यवस्था की कमान भी सौंपी गई.
कासगंज में माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
बीबीजीटीएस मूर्ति के पुलिस करियर में कासगंज की पोस्टिंग को महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां उनके कार्यकाल के दौरान अपराधियों और कथित माफिया गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई चर्चा में रही. कासगंज में नफीस अहमद उर्फ कालिया की संपत्ति पर हुई कार्रवाई खास तौर पर सुर्खियों में आई थी. पुलिस के मुताबिक, उसकी करीब 100 करोड़ 28 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी. इस कार्रवाई के बाद मूर्ति की पहचान ऐसे पुलिस अधिकारी के तौर पर मजबूत हुई, जो संगठित अपराध और माफिया गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं.
झांसी में करीब 16 महीने संभाली पुलिस की कमान
कासगंज के बाद बीबीजीटीएस मूर्ति को झांसी की जिम्मेदारी मिली. वह 22 अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक झांसी के SSP रहे. करीब 16 महीने के कार्यकाल में झांसी पुलिस ने कई गंभीर अपराधों का खुलासा किया. इनमें हत्या, अपहरण और साइबर अपराध से जुड़े मामले शामिल रहे. उनके नेतृत्व में कटेरा क्षेत्र के तीन गांवों में साइबर अपराध से जुड़े 23 लोगों की गिरफ्तारी की गई. इसके अलावा कुएं में महिला के शव के टुकड़े मिलने, लहचूरा में मां-बेटे की हत्या और सीपरी बाजार में युवती के शव को बक्से में रखकर जलाने जैसे मामलों का भी पुलिस ने खुलासा किया.
झांसी में एनकाउंटर का आंकड़ा भी रहा चर्चा में
मूर्ति के झांसी कार्यकाल में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ भी चर्चा का विषय रही. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 16 महीने के दौरान झांसी पुलिस के 93 एनकाउंटर हुए, जिनमें 122 बदमाश घायल हुए. इसी वजह से बीबीजीटीएस मूर्ति की छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी, जो अपराधियों के खिलाफ तेज और सख्त पुलिस कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं. हालांकि, उनके प्रोफाइल की एक अलग पहचान उनकी सख्त पुलिसिंग के साथ-साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता भी रही है.
तेलुगू भाषी अधिकारी ने यूपी में सीखी हिंदी
बीबीजीटीएस मूर्ति की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू उनकी भाषा से जुड़ा है. तेलंगाना से आने के कारण उनकी मातृभाषा तेलुगू है. उत्तर प्रदेश कैडर मिलने के शुरुआती दौर में हिंदी उनके लिए सहज भाषा नहीं थी. लेकिन यूपी में पुलिस सेवा के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि आम लोगों से सीधे संवाद करने के लिए हिंदी सीखना जरूरी है. शुरुआत में उन्होंने गूगल ट्रांसलेटर जैसी मदद ली और बाद में लगातार अभ्यास करके हिंदी बोलना और लिखना सीखा. एक पुलिस अधिकारी के लिए यह बदलाव खास इसलिए है क्योंकि थाने से लेकर कानून-व्यवस्था तक की जिम्मेदारियों में जनता के साथ सीधा संवाद बेहद अहम होता है.
मेरठ पहुंचते ही क्यों चर्चा में आ गए SSP मूर्ति?
अब बात उस तस्वीर की, जिसने बीबीजीटीएस मूर्ति को अचानक चर्चा में ला दिया. झांसी से ट्रांसफर के बाद जब वह 20 अगस्त 2026 को मेरठ पहुंचे, तो उन्होंने सर्किट हाउस में अधिकारियों से मुलाकात की. इस दौरान उनका पहनावा सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा था.
वह धोती-कुर्ता पहनकर मेरठ पहुंचे थे
इसके बाद उन्होंने पुलिस कार्यालय जाकर पुलिस की वर्दी पहनी और SSP के रूप में औपचारिक कार्यभार संभाला. अधिकारियों ने उन्हें बुके देकर स्वागत किया. धोती-कुर्ते में उनकी तस्वीरें सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर उनके अंदाज की चर्चा होने लगी. खास बात यह रही कि जिस अधिकारी की पहचान आमतौर पर पुलिस की वर्दी और सख्त कार्रवाई से होती है, उनकी पहली सार्वजनिक तस्वीरों में पारंपरिक भारतीय पहनावा नजर आया.
धोती-कुर्ते का अंदाज बना नई पहचान
बीबीजीटीएस मूर्ति का धोती-कुर्ता पहनकर मेरठ पहुंचना सिर्फ एक पहनावे की तस्वीर नहीं रहा. इसने उनकी सार्वजनिक छवि का एक अलग पहलू सामने रखा. एक तरफ वह पुलिस अधिकारी हैं, जिनके करियर में माफिया के खिलाफ कार्रवाई, गंभीर अपराधों के खुलासे और कानून-व्यवस्था से जुड़े सख्त फैसले शामिल हैं. दूसरी तरफ मेरठ में उनकी पहली तस्वीर पारंपरिक भारतीय पहनावे में सामने आई.
हैदराबाद से मेरठ तक का सफर
बीबीजीटीएस मूर्ति का अब तक का सफर कई अलग-अलग पड़ावों से होकर गुजरा है. हैदराबाद में पढ़ाई, BTech और MBA, UPSC की तैयारी, IPS में चयन, उत्तर प्रदेश कैडर, अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारियां, हिंदी सीखना, कासगंज में माफिया पर कार्रवाई, झांसी में अपराध के खिलाफ अभियान और अब मेरठ की कमान.
मेरठ में उनका पहला दिन जरूर उनके धोती-कुर्ते वाले अंदाज की वजह से सुर्खियों में आया है, लेकिन आने वाले समय में उनकी पहचान इस बात से तय होगी कि वह मेरठ की कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर कितना प्रभावी काम करते हैं.
फिलहाल, मेरठ के नए SSP की पहली तस्वीर ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि बीबीजीटीएस मूर्ति की कहानी सिर्फ एक IPS अधिकारी की पोस्टिंग की कहानी नहीं, बल्कि अलग भाषा और संस्कृति से निकलकर उत्तर प्रदेश की पुलिस सेवा में अपनी पहचान बनाने की कहानी भी है.




