इश्क जहर है! अल फलाह में आंखें चार, बन गई आतंक की इंचार्ज-दिल्ली ब्लास्ट की आरोपी डॉ. शाहीन और मुजम्मिल की लव स्टोरी
अल-फलाह यूनिवर्सिटी में शुरू हुई एक कैंपस लव स्टोरी कैसे दिल्ली धमाकों की साजिश तक पहुंच गई? जूनियर मुजम्मिल से आंखें चार होने के बाद डॉ. शाहीन बन गई इंडिया में आतंक की इंचार्ज. दिल्ली ब्लास्ट की जांच में सामने आई दोनों की खतरनाक नजदीकियां, चैट्स और पता नहीं क्या-क्या? जानें पूरी कहानी.
कहते हैं कि प्यार अंधा होता है. कुछ ऐसी ही लव स्टोरी है डॉ. शाहीन सईद और जूनियर डॉक्टर मुजम्मिल शकील की. इसलिए, कहा जाता है - "दिल और दिमाग की जंग में हार गई मोहब्बत, इश्क की आड़ में जीती फिर अंधी नफरत, प्यार का रंग इतना भी काला कब से होने लगा- कि लोग पूछने लगे, क्या आतंकी बनना भी मोहब्बत?"
जी हां! यही हुआ अल फलाह युनिवर्सिटी की डॉ. शाही और डॉ. मुजम्मिल के बीच. दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार डॉ. शाहीन और उसके जूनियर मुजम्मिल की लव स्टोरी ने तो जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया. अल-फलाह यूनिवर्सिटी में सुरु हुई यह मोहब्बत धीरे-धीरे एक ऐसे मोड़ पर पहुंची, जहां इश्क की जगह कट्टरपंथ ने ले ली. एजेंसियों का दावा है कि दोनों न सिर्फ रोमांटिक रिश्ते में थे, बल्कि उसी नजदीकी का फायदा उठाकर शाहीन आतंकी नेटवर्क इंडिया की कोर इंचार्ज बन गई.
फिर, दिल्ली धमाके की प्लानिंग, फंडिंग और ऑनलाइन मॉड्यूल में उनकी भूमिका पर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. कॉलेज की मासूम शुरुआत से आतंक की सुरंग तक पहुंची यह कहानी कई सवाल खड़े करती है. आइए जानते हैं पूरी कहानी.
कहानी की शुरुआत, एक डॉक्टर, दो नाकाम शादियां, एक नया प्यार और धीरे-धीरे टेररिज्म की दुनिया में एंट्री से होती है. यह कहानी है 46 साल की महिला शाहीन सईद की, जो दिल्ली के मशहूर लाल किले के पास 10/11 ब्लास्ट की मुख्य आरोपियों में से एक है. इस घटना की वजह से शाहीन सईद और मुजम्मिल शकील के लाइसेंस कैंसिल हो गए.
दोनों ने सितंबर 2023 में शादी की और सूत्रों के मुताबिक इसी शादी ने शाहीन सईद को टेररिज्म की दुनिया से मिलवाया और उसे यह रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित किया.
लखनऊ से दिल्ली का सफर
लखनऊ के घनी आबादी वाले डालीगंज इलाके में पली-बढ़ी डॉ. शाहीन सईद एक प्रतिभावान स्टूडेंट थी. उन्होंने इलाहाबाद से बैचलर ऑफ मेडिसिन और बैचलर ऑफ सर्जरी, या MBBS की डिग्री ली और फिर फार्माकोलॉजी में स्पेशलाइजेशन किया. शाहीन सईद के पिता सैयद अहमद अंसारी, एक सरकारी कर्मचारी हैं और परिवार को एक सीधा-सादा, पढ़ा-लिखा और समाज में इज्जतदार माना जाता है.
पहली शादी से दिल्ली ब्लास्ट के 22 साल
शाहीन सईद ने 2003 में आंखों के डॉक्टर डॉ. जफर हयात से शादी की और उनके दो बच्चे हुए, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चला. NDTV को दिए एक इंटरव्यू में डॉ. हयात ने कहा, "हमारी शादी नवंबर 2003 में हुई थी और दोनों ने अलग-अलग मेडिकल की पढ़ाई की, जिसमें मैं उनसे सीनियर था. हमारा तलाक 2012 के आखिर में हुआ था. मुझे नहीं पता कि उनके दिमाग में ऐसा क्या था, जिससे यह हुआ. हमारे बीच कभी कोई झगड़ा या झगड़ा नहीं हुआ.
वह एक प्यार करने वाली और देखभाल करने वाली इंसान थीं. मुझे कभी अंदाजा नहीं था कि वह ऐसी एक्टिविटीज में शामिल हो सकती हैं. वह अपने परिवार और बच्चों से बहुत जुड़ी हुई थीं, उनसे बहुत प्यार करती थीं और उनकी पढ़ाई का ध्यान रखती थीं. साथ बिताए सालों को याद करते हुए डॉ. हयात ने कहा कि सईद ने अपनी शादी के अलावा कभी बुर्का नहीं पहना. हयात प्रोफेशनल स्ट्रेस, करियर और सईद की विदेश जाने की इच्छा को तलाक की वजह मानते हैं.
डॉ. हयात ने याद करते हुए कहा, "एक बार उसने सुझाव दिया कि हम बेहतर सेलरी और क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए ऑस्ट्रेलिया या यूरोप में बस जाएं. मैंने उससे कहा कि हम यहां पहले से ही अच्छी जिंदगी जी रहे हैं, अच्छी नौकरियां और बच्चे हैं. हमारे रिश्तेदार और सब लोग यहां हैं. हम वहां अकेला महसूस करेंगे.
अकेलेपन काटने लगा तो की दूसरी शादी
तलाक सईद के लिए एक बड़ा झटका था, वह अकेला महसूस करने लगी थी. उसने अचानक गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल (GSVM) मेडिकल कॉलेज से नाम वापस ले लिया, जहां वह पढ़ाती थी और बिना किसी नोटिस के कॉलेज जाना बंद कर दिया. सूत्रों के अनुसार सईद आठ साल तक बिना किसी से संपर्क के रही और 2021 में उसकी नौकरी खत्म कर दी गई. इसके बाद उसने गाजियाबाद में टेक्सटाइल का बिजनेस करने वाले एक आदमी से दोबारा शादी की, लेकिन यह शादी भी ज्यादा समय तक नहीं चली.
मुजम्मिल सईद की जिंदगी में आया
हरियाणा के फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी वही जगह है जहां सईद का जूनियर और कश्मीरी डॉक्टर मुजम्मिल शकील डॉक्टर की जिंदगी में आया. रोजाना मिलना, कॉलेज में साथ काम करना और एक जैसे प्रोफेशन होने से उनका रिश्ता और मजबूत हुआ.
इन मीटिंग के दौरान, जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की महिला विंग जमात उल-मोमिनात के सदस्यों ने उससे संपर्क किया, जिन्होंने, जांच एजेंसियों के अनुसार सईद को कट्टरपंथ और आतंकवादी विचारधारा की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया.
दो तलाक के बाद लाइक शाहीन सईद को लाइक माइंडेड लवर मुजम्मिल मिला, फिर बन गई जमात उल मोमिनाि की इंडिया इंचार्ज. फिर क्या था, वो उस राह पर चल पड़ी, जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं होता. अपनी मेडिकल पहचान का इस्तेमाल करके, सईद ने जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-NCR और हरियाणा के बीच घूमना शुरू कर दिया, फंड ट्रांसफर करने और मैसेज पहुंचाने में मदद की.
कहा जाता है कि सईद को जमात उल-मोमिनात की भारत ब्रांच का चार्ज दिया गया था, जिसे पाकिस्तान में JeM के फाउंडर मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर हेड करती है.
परिवार को यकीन नहीं
सईद के बड़े भाई, मोहम्मद शोएब, पिछले चार साल से उसके कॉन्टैक्ट में नहीं थे. उन्होंने कहा, "जब वह मेडिसिन की पढ़ाई कर रही थी, तब भी उसके किसी भी संदिग्ध काम में शामिल होने का कोई संकेत नहीं मिला. मुझे अब भी इन आरोपों पर यकीन नहीं होता. जैसा कि मैंने पहले कहा है, मैं बस इस पर यकीन नहीं कर सकता."
डॉ. सईद के पिता, सैयद अहमद अंसारी ने भी उनके भाई की तरह ही यकीन नहीं किया. न्यूज एजेंसी IANS के हवाले से उन्होंने कहा, "मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मेरी बेटी ऐसी एक्टिविटी में शामिल थी." यही है शाहीन की लव स्टोरी, जो उसके लिए जहर साबित हुई.
सईद के पिता सैयद अंसारी के मुताबिक इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि सईद पांच टेरर डॉक्टरों की एक टीम बनाने का इंचार्ज था. सईद और उसके दो साथियों मुजम्मिल शकील, और अदील अहमद राथर को दिल्ली ब्लास्ट की जांच में गिरफ्तार किया गया है. लाल किले के पास एक धीमी गति से चल रही हुंडई i20 कार में धमाका हुआ, जिसमें कम से कम 15 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. इस कार को एक सुसाइड बॉम्बर उमर मोहम्मद उर्फ उमर उन नबी चला रहा था. उमर, एक कश्मीरी डॉक्टर थे और अल-फलाह यूनिवर्सिटी से भी जुड़े थे.





