जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रोटेस्ट, विदेशों तक गूंज... BBC, Al Jazeera से लेकर जानें NYT और The Guardian तक ने क्या-क्या छापा?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रोटेस्ट लाठी-डंडे खाने के बाद भी जारी है. सोमवार को छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया था, जिसकी गूंज भारत ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया में भी सुनाई दी.
Jantar mantar students Protest
पिछले कई दिनों से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों का शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर प्रोटेस्ट चल रहा है. इस प्रोटेस्ट ने 20 जुलाई को उस वक्त उग्र रूप ले लिया जब दिल्ली पुलिस ने संसद तक जानें की जिद कर रहे छात्रों पर जमकर लाठियां बरसाई. पुलिस और फोर्स के लाठीचार्ज में कई स्टूडेंट्स को गंभीर चोटें आईं. देखते ही देखते छात्रों का ये आंदोलन इंटरनेशनल लेवल तक पहुंच गया.
सोमवार को हुए छात्र प्रदर्शन और संसद मार्च ने देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान अपनी ओर खींचा. प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले दागे जाने, लाठीचार्ज, बैरिकेडिंग और प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़पों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बनीं. चलिए हम आपको बताते हैं कि विदेशी मीडिया ने इस छात्र आंदोलन को किस तरह से दिखाया है?
न्यूयॉर्क टाइम्स ने क्या लिखा?
The New York Times ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हजारों युवा पुलिस कार्रवाई के बावजूद अपने आंदोलन पर कायम रहे. रिपोर्ट के अनुसार, संसद मार्च के अगले दिन भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर लौटे और सरकार से जवाबदेही की मांग जारी रखी. अखबार ने आयोजकों के हवाले से दावा किया कि सोमवार की झड़पों में 150 प्रदर्शनकारी घायल हुए. वहीं, दिल्ली पुलिस के अनुसार 118 पुलिसकर्मी घायल हुए और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया.
The Guardian ने क्या लिखा?
The Guardian ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र आंदोलन जारी रहा और अगले दिन हजारों प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंचे. रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार के प्रदर्शन में 50 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी का दावा किया गया. अखबार ने यह भी लिखा कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए और आंसू गैस के साथ लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया. रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा गया कि घायल होने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. वहीं, एक प्रदर्शनकारी को गंभीर चोटों के चलते आईसीयू में भर्ती कराए जाने का भी उल्लेख किया गया.
Al Jazeera ने क्या लिखा?
Al Jazeera ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटे और अगले दिन फिर जंतर-मंतर पहुंचकर विरोध जारी रखा. रिपोर्ट के अनुसार, संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा आंसू गैस के इस्तेमाल और लाठीचार्ज में 100 से अधिक छात्रों के घायल होने का दावा किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रवेश परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और मूल्यांकन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर पिछले कुछ समय से छात्रों में आक्रोश बढ़ रहा है.
Al Jazeera ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि प्रकाशन के समय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इन प्रदर्शनों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी. साथ ही विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रदर्शनकारियों के समर्थन का भी जिक्र किया गया.
BBC की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
BBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पुलिस कार्रवाई के अगले दिन हजारों प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर पहुंचे, जिससे आंदोलन जारी रखने के उनके इरादे का संकेत मिला. रिपोर्ट के अनुसार, संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई में कम से कम 60 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई, जबकि दिल्ली पुलिस ने 118 पुलिसकर्मियों के घायल होने और लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही. बीबीसी ने यह भी लिखा कि पुलिस ने विरोध स्थल पर बने अस्थायी मंच और ढांचों को हटाया. कई प्रदर्शनकारियों ने बीबीसी को बताया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं समेत कई लोग घायल हुए.




