अब GPS पर भारत की निर्भरता होगी कम! ISRO ने लॉन्च किया NVS-03, स्मार्टफोन में भी मिलेगी NavIC की ताकत, PM मोदी ने क्या कहा?
ISRO ने शुक्रवार को अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को GSLV रॉकेट से सफलतापूर्वक लॉन्च किया. ह भारत के NavIC सिस्टम को मजबूत करेगा. इसमें स्वदेशी Rubidium Atomic Clock और L1, L5 व S बैंड सिग्नल हैं। L1 बैंड से आधुनिक स्मार्टफोन और वियरेबल डिवाइस के साथ NavIC की अनुकूलता बढ़ेगी.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को देश की स्वदेशी नेविगेशन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कामयाबी हासिल की. इसरो ने अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. इस सैटेलाइट को लेकर गया जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से रवाना हुआ.
NVS-03 भारत के अपने नेविगेशन सिस्टम NavIC यानी Navigation with Indian Constellation का अहम हिस्सा है. इसे भारत का अपना GPS भी कहा जाता है.इस सैटेलाइट के जुड़ने से देश की स्वदेशी नेविगेशन व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
पीएम मोदी ने ISRO को दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NVS-03 को ले जाने वाले GSLV-F18 के सफल प्रक्षेपण पर ISRO को बधाई दी है. उन्होंने X पर लिखा, "यह मिशन हमारे स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, 'नाविक' (NavIC) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. बेहतर क्षमताओं से लैस, NVS-03 महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भर बनने के हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाएगा और ऐसी नेविगेशन सेवाओं में मदद करेगा जिनसे हमारे लोगों को लाभ मिलेगा. हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का समर्पण और उनकी सूझबूझ लगातार हमारे देश को गौरवान्वित कर रही है."
NVS-03 की सबसे खास बात क्या है?
NVS-03 की सबसे खास बात इसमें लगा स्वदेशी Rubidium Atomic Clock है. इसे इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ने विकसित किया है. यह घड़ी सैटेलाइट को बेहद सटीक समय उपलब्ध कराने में मदद करेगी. नेविगेशन सिस्टम में सही लोकेशन बताने के लिए सटीक समय बेहद जरूरी होता है. समय की गणना में मामूली अंतर भी लोकेशन की सटीकता को प्रभावित कर सकता है. यही वजह है कि सैटेलाइट नेविगेशन में परमाणु घड़ियों की अहम भूमिका होती है. VS-03 से मिलने वाले सिग्नल L1, L5 और S बैंड पर प्रसारित होंगे.
आम लोगों को क्या फायदा होगा?
इस सैटेलाइट में L1 बैंड को शामिल किया जाना आम लोगों के लिए भी खास है. इसकी मदद से NavIC आधुनिक स्मार्टफोन चिपसेट और स्मार्टवॉच जैसे वियरेबल डिवाइस के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकेगा. यानी आने वाले समय में NavIC आधारित नेविगेशन सेवाओं का इस्तेमाल आम मोबाइल यूजर्स के लिए आसान हो सकता है. अभी तक GPS जैसी विदेशी नेविगेशन सेवाओं का इस्तेमाल दुनियाभर में बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन भारत अपने स्वदेशी सिस्टम को मजबूत कर इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना चाहता है.
NVS-03 का महत्व सिर्फ रास्ता बताने या लोकेशन ट्रैक करने तक सीमित नहीं है. इसकी परमाणु घड़ी सटीक समय उपलब्ध कराने में भी मददगार होगी. बैंक, शेयर बाजार और सशस्त्र बलों जैसे क्षेत्रों में समय की सटीकता बेहद जरूरी होती है. वित्तीय लेन-देन, स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग और सैन्य अभियानों में समय का मामूली अंतर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है. इसलिए भारत ने नेविगेशन के साथ-साथ देश के भीतर ही सटीक समय उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम शुरू किया है.
GPS पर निर्भरता कम करने की तैयारी
भारत सरकार ने जून 2025 में बताया था कि भारतीय मानक समय (IST) को बनाए रखने के लिए अमेरिका की सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले GPS पर निर्भरता खत्म की जाएगी. इसके स्थान पर देश में स्थापित पांच परमाणु घड़ियों की मदद ली जाएगी. ये घड़ियां गुवाहाटी, बेंगलुरु, अहमदाबाद, फरीदाबाद और भुवनेश्वर में लगाई गई हैं. सरकार के मुताबिक, इन घड़ियों का परीक्षण किया जा चुका था और सिस्टम को जल्द चालू करने की तैयारी थी.
इस व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद बैंकों और कारोबार से जुड़ी संस्थाओं को भी इसी सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा. इससे भारत के पास अपना स्वतंत्र और भरोसेमंद टाइमकीपिंग सिस्टम होगा. NVS-03 की लॉन्चिंग इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें भारत नेविगेशन और समय निर्धारण के लिए विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करके स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना चाहता है.




