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असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय... क्या है इस मंत्र का अर्थ, जिसे दादी इंदिरा गांधी को याद करते हुए राहुल गांधी ने किया पोस्ट?

राहुल गांधी ने अपनी दादी इंदिरा गांधी को याद करते हुए पोस्ट में 'असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय' मंत्र लिखा. यह मंत्र जीवन में अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने के लिए कहा जाता है.

rahul gandhi and indira gandhi
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( Image Source:  x-@RahulGandhi )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 31 Oct 2026 2:00 PM IST

कभी-कभी जिंदगी के सबसे अनमोल पल किसी बड़ी सीख या लंबे भाषण में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए छोटे-छोटे लम्हों में छिपे होते हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी दादी और देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर दादी को याद करते हुए ऐसा ही एक किस्सा शेयर किया है. उन्होंने बताया कि कैसे बचपन में दादी की गोद में बैठकर, उनका हाथ थामकर वह एक संस्कृत मंत्र सुनते थे और उनके पीछे-पीछे उसे दोहराते थे. राहुल के शब्दों में, उस समय दादी ने उन्हें जो सिखाया, वह उनके लिए जिंदगी का बेहद खूबसूरत तोहफा है.

राहुल गांधी ने इस याद के साथ ‘असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय’ मंत्र भी साझा किया. यह सिर्फ कुछ संस्कृत पंक्तियां नहीं हैं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाली एक प्रार्थना है. इसमें इंसान सत्य, ज्ञान और अमरता की ओर बढ़ने की कामना करता है.

दादी को याद कर क्या बोले राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में उस पल को याद किया, जब वह दादी इंदिरा गांधी की गोद में बैठते थे. वह उनके दोनों हाथ पकड़कर उनकी आवाज में मंत्र सुनते और फिर उनके साथ-साथ उसे दोहराते थे. राहुल ने इस एक्सपीरियंस को ऐसा गिफ्ट बताया, जिसकी अहमियत उन्हें आज भी महसूस होती है.

क्या है 'असतो मा सद्गमय' मंत्र?

ॐ असतो मा सद्गमय ।

तमसो मा ज्योतिर्गमय ।

मृत्योर्मा अमृतं गमय ।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

क्या है 'असतो मा सद्गमय का अर्थ

यह मंत्र प्राचीन उपनिषदों में मिलता है. इसका भावार्थ है कि इंसान अपने जीवन में सही रास्ते पर आगे बढ़े और अज्ञान से बाहर निकले.

  • असतो मा सद्गमय: मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो.
  • तमसो मा ज्योतिर्गमय: मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो.
  • मृत्योर्मा अमृतं गमय: मुझे मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो.

यहां अंधकार का मतलब केवल रात या रोशनी की कमी नहीं है, बल्कि मन का भ्रम, अज्ञान और गलत सोच भी है. इसी तरह प्रकाश ज्ञान, समझ और सच्चाई का प्रतीक है.

जीवन को बेहतर बनाने की सीख देता है मंत्र

इस प्रार्थना में इंसान ईश्वर से मांगता है कि वह उसे झूठ और भ्रम से निकालकर सच का रास्ता दिखाए. वह ऐसी समझ चाहता है, जिससे जीवन में सही और गलत का फर्क कर सके. आखिरी पंक्ति में मृत्यु से अमरता की ओर ले जाने की बात कही गई है. इसका भाव केवल शरीर के हमेशा जीवित रहने से नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और उस सत्य की प्राप्ति से भी जुड़ा है, जो जीवन और मृत्यु से परे माना जाता है.

आखिर में क्यों कहा जाता है 'ॐ शांति'?

मंत्र के अंत में तीन बार 'ऊँ शांति' बोलने का भाव मन, वातावरण और जीवन में शांति की कामना करना है. यह प्रार्थना याद दिलाती है कि इंसान को अपने भीतर भी सुकून चाहिए और दुनिया में भी प्रेम और शांति बनी रहनी चाहिए.

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