IRIS Dena Attack: अमेरिकी हमले से पहले भारत ने ईरानी युद्धपोत को दिया था सुरक्षित ठिकाने का ऑफर
IRIS Dena Attack: अमेरिकी हमले से पहले भारत ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को अपने बंदरगाह पर सुरक्षित ठहरने का विकल्प दिया था. हमले के बाद भारतीय नौसेना ने बचाव अभियान में भी मदद की और दूसरे ईरानी जहाज IRIS Lavan को कोच्चि पोर्ट पर डॉकिंग की अनुमति दी.
अमेरिकी हमले में डूबने से पहले ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को भारत ने अपने किसी बंदरगाह पर सुरक्षित ठहरने का विकल्प दिया था. यह पेशकश उस समय की गई थी जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेजी से बढ़ रहा था. हालांकि इससे पहले कि जहाज भारतीय बंदरगाह पहुंच पाता, श्रीलंका के पास समुद्र में उसे अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से निशाना बना दिया.
वहीं तकनीकी खराबी से जूझ रहे दूसरे ईरानी जहाज IRIS Lavan को भारत ने कोच्चि पोर्ट पर डॉकिंग की अनुमति दी है. इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में किया गया है.
विशाखापत्तनम से रवाना होने के बाद हुआ हमला
रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena ने भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लिया था. यह युद्धपोत International Fleet Review और MILAN 2026 naval exercise में शामिल हुआ था, जो 25 फरवरी को समाप्त हुआ. इसके बाद जहाज समुद्र में अपने अगले गंतव्य की ओर रवाना हुआ. भारतीय नौसेना के अनुसार 4 मार्च की सुबह श्रीलंका के Galle से लगभग 20 समुद्री मील पश्चिम में यह युद्धपोत अमेरिकी हमले का शिकार हो गया.
अमेरिका-इज़राइल हमलों के बाद बढ़ा तनाव
रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए थे. इसके बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था. इसी परिस्थिति को देखते हुए भारत ने ईरानी युद्धपोत को सुरक्षित बंदरगाह उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था.
दूसरा ईरानी जहाज कोच्चि पहुंचा
इसी बीच एक अन्य ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan तकनीकी समस्या के कारण भारत से मदद मांगने पर मजबूर हो गया. ईरान ने 28 फरवरी को भारत से अनुरोध किया कि जहाज को अस्थायी तौर पर शरण दी जाए. भारत सरकार ने 1 मार्च को इसकी अनुमति दे दी और यह जहाज 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंच गया. अधिकारियों के मुताबिक जहाज के 183 चालक दल के सदस्यों को कोच्चि में नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है.
श्रीलंका ने भी ईरानी जहाज को दी डॉकिंग अनुमति
उधर श्रीलंका ने भी एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Bushehr को अपने एक बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी है. इससे एक दिन पहले IRIS Dena से एसओएस मैसेज मिलने के बाद श्रीलंकाई नौसेना ने सर्च एंड रेस्क्यू अभियान शुरू किया था.
बचाव अभियान में भारत भी शामिल
श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार बचाव दल ने डूबते जहाज से 32 नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला. वहीं Galle के अस्पतालों में सैन्य बचाव दल द्वारा 87 शव लाए जाने की पुष्टि हुई. जहाज पर मौजूद करीब 180 लोगों में से लगभग 60 अब भी लापता बताए जा रहे हैं. भारतीय नौसेना ने भी बचाव कार्यों में मदद के लिए अपने संसाधन तैनात किए. इसमें Boeing P-8I Poseidon समुद्री गश्ती विमान और नौसैनिक जहाज INS Tarangini को इलाके में भेजा गया.
इसके अलावा INS Ikshak को भी कोच्चि से रवाना किया गया ताकि लापता कर्मियों की तलाश में मदद मिल सके. नौसेना ने एयर-ड्रॉपेबल लाइफ राफ्ट से लैस एक और विमान को भी तैयार रखा था. इस पूरे घटनाक्रम ने हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सामरिक तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.




