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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की तरफ भारत ने बढ़ाया कदम तो होगी जंग! किसने दी ये कड़ी चेतावनी, अब आगे क्या?

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अगर भारत Strait of Hormuz की स्थिति में सीधे तौर पर शामिल होता है, तो इसे युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है.

Shashi Tharoor War Warning india Strait of Hormuz
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Strait of Hormuz

( Image Source:  AI: Sora )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर3 Mins Read

Updated on: 20 March 2026 1:08 PM IST

Iran Israel Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे के बीच भारत की रणनीतिक स्थिति को लेकर नई बहस छिड़ गई है. इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर भारत Strait of Hormuz की स्थिति में सीधे तौर पर शामिल होता है, तो इसे युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है.

थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-इजरायल जंग के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है और वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति तथा समुद्री मार्गों पर बड़ा असर पड़ रहा है. उन्होंने साफ किया कि भारत को इस संवेदनशील स्थिति में बेहद सावधानी से कदम उठाने होंगे.

क्या बोले शशि थरूर?

शशि थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि" भारत का होर्मुज की ओर बढ़ना युद्ध का कार्य है." उनका मानना है कि इस तरह का कोई भी कदम सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप माना जाएगा, जिससे भारत अनचाहे ही एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में फंस सकता है.

भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. भारत के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले तेल और गैस पर निर्भर करता है. इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या अवरोध का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

भारत पर क्या है युद्ध का असर?

1. खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा

2. तेल और गैस की कीमतों में उछाल

3. व्यापार और रेमिटेंस पर असर

भारत की रणनीति क्या होनी चाहिए?

थरूर का मानना है कि भारत को इस स्थिति में सैन्य हस्तक्षेप से दूर रहकर कूटनीति पर जोर देना चाहिए. उन्होंने संकेत दिया कि भारत को शांति, संवाद और तनाव कम करने की दिशा में काम करना चाहिए, न कि किसी पक्ष में खड़े होकर जोखिम बढ़ाना चाहिए. शशि थरूर का यह बयान भारत के लिए एक स्पष्ट चेतावनी की तरह है. ऐसे में भारत के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता कूटनीति, संतुलन और रणनीतिक धैर्य ही माना जा रहा है.

ईरान-इजरायल जंग के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. इसका असर केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है.

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