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कितने खास हैं शौर्य कमांडो, जो अरुणाचल बॉर्डर पर चीन के दांत कर रहे खट्टे, ITBP चीफ ने की जमकर तारीफ; जानिए कैसे होती है इनकी ट्रेनिंग

अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कई जगहों पर टकराव जारी है. ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि शौर्य कमांडो चीन को मुंह तोड़ जवाब दे रहे हैं. आखिर कितनी खास है ये फोर्स, कैसे होती है ट्रेनिंग.

कितने खास हैं शौर्य कमांडो, जो अरुणाचल बॉर्डर पर चीन के दांत कर रहे खट्टे, ITBP चीफ ने की जमकर तारीफ; जानिए कैसे होती है इनकी ट्रेनिंग
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भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव जारी है. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि इन टकरावों के दौरान ITBP की शौर्य कमांडो टीमों ने शानदार काम किया. उनके इस बयान को अरुणाचल प्रदेश में दोनों देशों के सैनिकों के बीच जारी टकराव की पहली आधिकारिक पुष्टि माना जा रहा है.

गुरुवार को राजस्थान के अलवर में ITBP के जवानों, जिन्हें 'हिमवीर' कहा जाता है, के सम्मान समारोह में शत्रुजीत कपूर ने कहा, "हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में ऐसी स्थिति बनी, जहां कई जगहों पर आमना-सामना हुआ. यह अभी भी जारी है. वहां हमारी शौर्य कमांडो टीमों ने शानदार काम किया है."

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब जुलाई से अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई बार टकराव होने की खबरें सामने आई हैं. स्थानीय लोगों ने भी कई जगहों पर सैनिकों के बीच आमना-सामना होने का दावा किया था. रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने के दौरान भी ये टकराव जारी रहे.

कांग्रेस ने क्या कहा?

ITBP प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के बीच जारी टकराव पर चुप्पी साधे हुए है. जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "भारत 19 जून 2020 को चीन को प्रधानमंत्री की ओर से दी गई उस चर्चित क्लीन चिट की कीमत चुका रहा है."

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से चीन को दी जा रही रियायतों के बीच ITBP के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ हालिया टकरावों में ITBP के प्रदर्शन की तारीफ की है. रमेश ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की ओर से पूरी तरह चुप्पी बनी हुई है.

कौन हैं ITBP के शौर्य कमांडो?

ITBP की शौर्य कमांडो प्लाटून विशेष प्रशिक्षण प्राप्त सामरिक यूनिट्स हैं. इन्हें भारतीय सेना की घातक प्लाटून की तर्ज पर तैयार किया गया है. इनका मुख्य काम ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में लड़ाई और सीमा पर होने वाले ऑपरेशन में हिस्सा लेना है. इन कमांडो को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के मुकाबले तेजी से कार्रवाई करने वाली विशेष टुकड़ियों के रूप में तैयार किया गया है.

शौर्य कमांडो भारतीय सेना के साथ मिलकर भी ट्रेनिंग लेते हैं. इसमें लद्दाख में सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर और अरुणाचल प्रदेश में दाओ डिवीजन, जिसे स्पीयर कोर भी कहा जाता है, के साथ ट्रेनिंग शामिल है. इस ज्वाइंट ट्रेनिंग का मकसद दोनों बलों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना और ऊंचाई वाले इलाकों में एक साथ प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता बढ़ाना है.

किन चीजों की दी जाती है ट्रेनिंग?

शौर्य कमांडो को कई तरह के विशेष प्रशिक्षण दिए जाते हैं. इनमें शामिल हैं:

- ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध: पहाड़ों पर कठिन परिस्थितियों में लड़ने और काम करने की ट्रेनिंग.

- आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल: नई पीढ़ी के हथियारों को चलाने और उनका प्रभावी उपयोग करने का प्रशिक्षण.

- ड्रोन ऑपरेशन: ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल और उससे जुड़े ऑपरेशन की जानकारी.

- बिना हथियार के मुकाबला: नजदीकी संघर्ष की स्थिति में खुद का बचाव करने और मुकाबला करने की ट्रेनिंग.

- पर्वतारोहण और फील्डक्राफ्ट: मुश्किल पहाड़ी इलाकों में आगे बढ़ने, निगरानी करने और ऑपरेशन की तैयारी करने में इन्हें खास महारत हासिल होती है.

- शारीरिक और युद्ध क्षमता: कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करने के लिए इन्हें खास ट्रेनिंग दी जाती गहै.

क्या खास ट्रेनिंग में लेते हैं हिस्सा?

शौर्य कमांडो ने संयुक्त अभ्यासों में भी हिस्सा लिया है. इनमें अरुणाचल प्रदेश में आयोजित 24 घंटे का ऊंचाई वाले क्षेत्र का फील्ड अभ्यास 'एक्सरसाइज माउंटेन प्रहरी' और फायर एंड फ्यूरी कोर के साथ किए गए अभ्यास शामिल हैं. इन अभ्यासों का मकसद कठिन पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन करने, तेजी से प्रतिक्रिया देने और भारतीय सेना के साथ मिलकर काम करने की क्षमता को बेहतर बनाना है.

शौर्य कमांडो को सीमा पर तैनात बटालियनों के भीतर विशेष टुकड़ियों के रूप में रखा जाता है. इनकी जिम्मेदारियों में घुसपैठ रोकने, अचानक पैदा होने वाली स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने और हिमालयी सीमा पर निगरानी बनाए रखने जैसे काम शामिल हैं.

क्या बोले शत्रुजीत कपूर?

ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने ड्रोन से बढ़ते खतरे को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक ने पारंपरिक युद्ध के तरीके को काफी बदल दिया है. इसके साथ ही रक्षा बलों की भूमिका और युद्ध के मैदान में उनकी जरूरतें भी बदल रही हैं. कपूर के मुताबिक, ITBP की योजना हर प्लाटून में एक ड्रोन यूनिट स्थापित करने की है. इसके लिए बल अपने स्तर पर ड्रोन बनाने की क्षमता बढ़ाएगा और ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण भी देगा. उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही एक अलग स्ट्राइक कोर बनाए जाने की उम्मीद है.

रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान का क्या दिया उदाहरण?

शत्रुजीत कपूर ने युद्ध के बदलते फॉर्मेट को समझाने के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों से जारी इस युद्ध में यूक्रेन जैसे छोटे देश ने रूस को जिस तरह नुकसान पहुंचाया है, उससे पता चलता है कि आधुनिक युद्ध के तरीके बदल रहे हैं. उन्होंने ईरान का भी उदाहरण दिया और कहा कि वहां के हालात भी संघर्ष के बदलते स्वरूप को समझने में मदद करते हैं. कपूर के मुताबिक, अब युद्ध में केवल पारंपरिक सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि नई तकनीक और आधुनिक उपकरणों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है.

LAC पर अंडरग्राउंड शेल्टर बना रही ITBP?

ड्रोन से बढ़ते खतरे को देखते हुए ITBP सीमावर्ती इलाकों में अपने जवानों और जरूरी संसाधनों की सुरक्षा के लिए जमीन के नीचे सुरक्षित ठिकाने बनाने पर भी काम कर रही है. शत्रुजीत कपूर ने बताया कि ITBP की कई फ्रंटियर यूनिटों ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत अपनी बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) पर अंडरग्राउंड शेल्टर बनाए हैं.

इन शेल्टर का उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तैनात जवानों की सुरक्षा और आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है. उभरते खतरों को देखते हुए ITBP अपने उपकरणों, बुनियादी ढांचे और ऑपरेशन से जुड़ी क्षमताओं को बेहतर बनाने में जुटी है.

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