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जब CEC ज्ञानेश कुमार तक पहुंची दो चुनाव आयुक्तों की चिट्ठी, तो क्या उठाए गए कदम? RTI ने खोला इलेक्शन कमीशन के अंदर का राज़

चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी की मनीष गर्ग के खिलाफ शिकायत CEC ज्ञानेश कुमार तक पहुंची तो क्या कदम उठाए गए. एक आरटीआई में इस बारे में जानकारी सामने आई है.

जब CEC ज्ञानेश कुमार तक पहुंची दो चुनाव आयुक्तों की चिट्ठी, तो क्या उठाए गए कदम? RTI ने खोला इलेक्शन कमीशन के अंदर का राज़
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चुनाव आयोग में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कथित मतभेदों को लेकर एक नया खुलासा हुआ है. सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्रों को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यालय के साथ-साथ कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भी भेजा था. इन पत्रों में सीनियर उप चुनाव आयुक्त (DEC) मनीष गर्ग पर कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगाए गए थे.

RTI के जवाब में जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि कैबिनेट सचिवालय ने 3 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इन पत्रों पर उनकी राय लेने का प्रस्ताव रखा था. वहीं, 4 अगस्त के एक दूसरे दस्तावेज में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने ये पत्र अपनी व्यक्तिगत हैसियत में लिखे थे. ये भारतीय निर्वाचन आयोग की ओर से भेजे गए आधिकारिक पत्र नहीं थे.

कैबिनेट सचिवालय ने क्या कहा?

RTI से मिली जानकारी के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने 3 अगस्त को प्रस्ताव दिया था कि चुनाव आयुक्तों के पत्रों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की राय मांगी जाए. इसके अगले दिन, यानी 4 अगस्त को दर्ज टिप्पणी में कहा गया कि सुखबीर संधू और विवेक जोशी के पत्र उनकी व्यक्तिगत हैसियत में लिखे गए थे, न कि भारतीय निर्वाचन आयोग की ओर से औपचारिक संवाद के रूप में.

दोनों चुनाव आयुक्तों को केवल जानकारी दी गई थी कि उनके पत्र मिल गए हैं. 5 अगस्त को भेजे गए इन जवाबों की कॉपियां कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के सचिव, DoPT के स्थापना अधिकारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रधान निजी सचिव को भी भेजी गई थीं.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट सचिव ने इन पत्रों पर कार्रवाई नहीं की थी, क्योंकि ये भारतीय निर्वाचन आयोग की ओर से आधिकारिक तौर पर नहीं लिखे गए थे, बल्कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन्हें अपनी व्यक्तिगत हैसियत में भेजा था. इस मामले में बत्रा ने 24 सितंबर को RTI आवेदन दाखिल किया था.

29 जुलाई को कैबिनेट सचिव को भेजे गए थे पत्र

चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को लगभग एक जैसे पत्र भेजे थे. संधू के पत्र के साथ मनीष गर्ग की ओर से 28 जुलाई को जारी एक आदेश की कॉपी भी अटैच की थी. इस आदेश में गर्ग ने अपने और निर्वाचन आयोग के अन्य अधिकारियों के बीच काम का बंटवारा किया था. इसमें महानिदेशक (IT) सीमा खन्ना और उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार भी शामिल थे.

हिंदुस्तान टाइम्स की 3 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्तों को गर्ग के उस फैसले पर चिंता थी, जिसमें IT विभाग की फाइलों को भेजने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया था. इस विभाग का नेतृत्व सीमा खन्ना कर रही थीं. पहले इन फाइलों को उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार के पास भेजा जाता था.

मनीष गर्ग ने क्या उठाए थे सवाल?

कैबिनेट सचिव को लिखे गए गोपनीय पत्रों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने बताया कि 28 जुलाई को मनीष गर्ग को प्रशासनिक विभाग (Administration Division) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. उस समय उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरु 9 अगस्त तक छुट्टी पर थे. पत्रों के मुताबिक, अतिरिक्त प्रभार मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर गर्ग ने काम के बंटवारे से जुड़ा एक आदेश जारी कर दिया. इस आदेश में उन अधिकारियों के काम भी शामिल थे, जो पद के स्तर पर उनके वरिष्ठ या उनके समकक्ष थे.

दोनों चुनाव आयुक्तों ने पत्रों में कहा कि यह फैसला लेने से पहले उनसे सलाह नहीं ली गई थी. उन्होंने अपने पत्रों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18(1) और 18(2) का भी जिक्र किया. वहीं, विवेक जोशी ने अपने पत्र में एक और मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक विभाग से उन्होंने जो फाइल मांगी थी, वह उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई.

RTI के जवाब में क्या बताया गया?

बत्रा ने अपने RTI आवेदन में पूछा था कि इन पत्रों पर क्या-क्या कदम उठाए गए. इसके जवाब में कैबिनेट सचिवालय के सूचना अधिकारी ने पत्रों की प्राप्ति स्वीकार किए जाने और संबंधित अधिकारियों को उनकी प्रतियां भेजे जाने की डिटेल दी. इस तरह, RTI से सामने आई जानकारी में पत्रों पर किसी ठोस कार्रवाई की कोई ठोल डिटेल नहीं दी गई. इसमें मुख्य रूप से पत्र मिलने की पुष्टि और उन्हें संबंधित अधिकारियों तक भेजे जाने की जानकारी शामिल थी.

IT प्रोटोकॉल को लेकर पहले से विवाद?

इन पत्रों और कैबिनेट सचिवालय के जवाब का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि सीमा खन्ना और निर्वाचन आयोग का IT विभाग पहले से एक विवाद के केंद्र में हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सीमा खन्ना की ओर से लागू की गई और निर्वाचन आयोग की ओर से मंजूर की गई नई IT प्रक्रिया या प्रणाली के कारण मतदाताओं के डेटाबेस यानी मतदाता सूची तक पहुंच सीमित हो गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव के बाद उन अधिकारियों की मतदाता सूची तक पहुंच प्रभावित हुई, जो मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने के लिए जिम्मेदार हैं. इन अधिकारियों को निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) कहा जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की जांच में यह भी बताया गया था कि चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद थे और विवेक जोशी तथा सुखबीर संधू ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कई बार असहमति जताई थी.

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन दावों को खारिज किया था. आयोग ने कहा था कि सभी फैसले नियमों के अनुसार या तो सर्वसम्मति से लिए गए थे या फिर बहुमत के आधार पर किए गए थे.

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