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BRICS के दरवाजे पर क्यों अटका है Pakistan? पहलगाम ने कैसे बंद कर दिया रास्ता, भारत का वीटो कैसे बना 'ब्रह्मास्त्र'

BRICS के दरवाजे पर अटका पाकिस्तान, पहलगाम हमले के बाद भारत का वीटो बना ब्रह्मास्त्र. 2023 से मेंबरशिप के लिए भटक रहे इस्लामाबाद को दिल्ली घोषणापत्र में मिली निंदा के बाद बड़ा झटका.

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( Image Source:  Meta AI )

BRICS अब सिर्फ 5 देशों का क्लब नहीं रहा. 11 सदस्य भी इसमें शामिल हैं. इसके अलावा इसका मेंबर बनने के लिए दर्जनों कतार में हैं. 2026 में भारत जब नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा था, तो एक देश सबसे ज्यादा बेचैन रहा, उसका नाम है 'पाकिस्तान'. जिसने 2023 में ही BRICS में शामिल होने के लिए औपचारिक आवेदन कर दिया था, लेकिन तीन साल बाद भी उसकी फाइल धूल खा रही है. वजह सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, भारत का वीटो है, और अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले ने तो इस्लामाबाद के लिए वो आखिरी खिड़की भी बंद कर दी है.

BRICS में पाकिस्तान जाना क्यों चाहता है?

इसके जवाब में अहम सवाल यह सामने आता है कि पाकिस्तान को BRICS की इतनी जरूरत क्यों है? इसके पीछे तीन कारण गिनाए जा रहे हैं.

  • पहला आर्थिक ऑक्सीजन. IMF के कर्ज और चीन के कर्ज जाल में फंसे पाकिस्तान को BRICS के New Development Bank (NDB) से सस्ता फंड चाहिए. इसी उम्मीद में उसने NDB में 580-582 मिलियन डॉलर की हिस्सेदारी तक खरीद ली.
  • दूसरा कूटनीतिक लेगिटिमेसी. G7 के मुकाबले Global South की आवाज बन रहे BRICS में जगह मिलने का मतलब है, भारत के बराबर खड़ा दिखना.
  • तीसरा चीन-रूस का सहारा. बीजिंग और मॉस्को खुलकर उसकी पैरवी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें BRICS को ज्यादा चीन-केन्द्रित बनाना है.

इसलिए इस्लामाबाद का नैरेटिव है - हम भी महत्वपूर्ण विकासशील देश हैं, शांति में योगदान दिया है.

पाकिस्तान BRICS के दरवाजे पर अटका क्यों है?

पाकिस्तान BRICS के दरवाजे पर इसलिए अटका है, क्योंकि BRICS में एंट्री का नियम है - कंसेंसस. यानी सभी सदस्यों की हामी. और एक नियम और है जो 2026 में भारत की अध्यक्षता में और सख्त हो गया, वो है नए सदस्य या पार्टनर का "सभी सदस्यों के साथ अच्छे संबंध" होना जरूरी है.

यहीं भारत दीवार बन जाता है. रिपोर्ट्स साफ कहती हैं - भारत के विरोध ने पाकिस्तान को बाहर रखा है, नई दिल्ली का वीटो पावर इफेक्टिवली ब्लॉक कर रहा है. 2024 के विस्तार में जब अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, UAE को लिया गया, पाकिस्तान को नजरअंदाज कर दिया गया और इस्लामाबाद को कहना पड़ा कि हमने तो औपचारिक रिक्वेस्ट ही नहीं की. 2026 तक आते-आते हालत ये है कि उसे BRICS पार्टनर फ्रेमवर्क में भी जगह नहीं मिली, फुल मेंबरशिप तो दूर.

पहलगाम ने उसकी राह कैसे और मुश्किल कर दी?

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में 26 नागरिकों, ज्यादातर टूरिस्टों की आतंकी हत्या ने सब बदल दिया. भारत ने इसे सीधे पाकिस्तान-प्रायोजित आतंक बताया. साथ ही इसके खिलाफ 4 कदम उठाए. पहला भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबन में डाल दिया. दूसरा सभी पाकिस्तानी आयात पर बैन लगा दिया. तीसरा 14 कैटेगरी के वीजा रद्द करन दिए और चौथा हवाई क्षेत्र बंद कर दिए.

BRICS के कॉन्टेक्स्ट में इसका मतलब क्या?

पहलगाम के बाद भारत ने आतंकवाद को BRICS के एजेंडे के सेंटर में ला दिया. भारत की अध्यक्षता की थीम ही है - Global South का प्लेटफॉर्म, लेकिन आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस. जब आप 26 टूरिस्टों की हत्या के आरोपी देश को उसी मंच पर बगल में बिठाएंगे, तो आपकी क्रेडिबिलिटी क्या रहेगी? इस एक घटना ने पाकिस्तान के "good relations with all members" वाले क्राइटेरिया को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. अब भारत के पास नैतिक और सुरक्षा दोनों ग्राउंड हैं.

भारत का Diplomatic Weapon क्या?

भारत ने कोई हल्ला नहीं मचाया. उसका हथियार है - साइलेंटो प्लस नैरेटिव कंट्रोल. इसके तहत मोदी सरकार ने तीन कदम उठाए.

1. कंसेंसस का हथियार: BRICS में औपचारिक वीटो नहीं, लेकिन कंसेंसस ही वीटो है. भारत बस कहता है - हम सहमत नहीं. और कोई भी प्रस्ताव गिर जाता है. यह संयुक्त राष्ट्र जैसा सार्वजनिक वीटो नहीं, बंद कमरे का इंकार है, इसलिए चीन भी ज्यादा प्रेशर नहीं बना पाता.

2. अध्यक्षता का हथियार: 2026 भारत की अध्यक्षता का साल है. रिपोर्ट्स कहती हैं भारत दो काम एक साथ बैलेंस कर रहा है. BRICS को समावेशी Global South प्लेटफॉर्म बताना, और इसे चीन की पसंद का ब्लॉक बनने से रोकना. अध्यक्ष के तौर पर एजेंडा तय करना, नए सदस्यों के क्राइटेरिया लिखना भारत के हाथ में है. उसने "अच्छे संबंध" की शर्त को और मजबूत कर दिया.

3. आतंकवाद बनाम विकास का नैरेटिव: भारत ने BRICS को आर्थिक क्लब से ज्यादा "रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज्म" का क्लब बनाया है. उसका तर्क है - जो देश FATF ग्रे लिस्ट में रहा हो, जो आतंक की फैक्ट्री के आरोप झेल रहा हो, वो विकास बैंक के पैसे का क्या करेगा? यह तर्क ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों को भी समझ आता है.

पाकिस्तान BRICS के दरवाजे पर खड़ा है, ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में पैसे लगाकर टिकट खरीदने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पहलगाम के बाद भारत के पास उसे रोकने के लिए अब सिर्फ रणनीतिक नहीं, नैतिक हथियार भी है. और जब तक भारत- पाकिस्तान संबंध "फ्री फॉल" में हैं, BRICS का दरवाजा इस्लामाबाद के लिए बंद ही रहेगा.

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