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PM Awas Yojana पर बघेल vs विजय शर्मा: किसने बनवाए ज्यादा घर? 80 मिनट तक चली आंकड़ों की लड़ाई में उठे ये बड़े सवाल

छत्तीसगढ़ में PM Awas Yojana पर भूपेश बघेल और विजय शर्मा आमने-सामने हैं. जानें किसने कितने घरों का दावा किया और पोर्टल विवाद क्या है.

PM Awas Yojana पर बघेल vs विजय शर्मा: किसने बनवाए ज्यादा घर? 80 मिनट तक चली आंकड़ों की लड़ाई में उठे ये बड़े सवाल
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छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) एक बार फिर सियासत का बड़ा अखाड़ा बन गई है. इस बार बयानबाजी सोशल मीडिया या विधानसभा तक सीमित नहीं रही, बल्कि रायपुर प्रेस क्लब में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और डिप्टी सीएम विजय शर्मा आमने-सामने बैठ गए. मुद्दा एक था- गरीबों के घर. लेकिन जैसे-जैसे आंकड़े सामने आए, बहस सवालों, आरोपों और तीखी नोकझोंक में बदलती चली गई.

विजय शर्मा का दावा था कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में पीएम आवास पूरे हुए हैं और राज्य 2025-26 में देश में सबसे ज्यादा आवास बनाने वाले राज्यों में रहा. दूसरी तरफ भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल के आंकड़े रखते हुए केंद्र से राशि, पोर्टल और स्वीकृत आवासों का मुद्दा उठाया. सबसे बड़ा सवाल यही रहा- आखिर छत्तीसगढ़ में पीएम आवास के सही आंकड़े क्या हैं और किस सरकार के दावे पर भरोसा किया जाए?

खुली बहस की चुनौती से शुरू हुई कहानी

पीएम आवास को लेकर राजनीतिक तकरार पहले से चल रही थी. डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को खुली बहस की चुनौती दी थी. बघेल ने चुनौती स्वीकार कर ली और फिर रायपुर प्रेस क्लब में दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की बहस तय हुई. करीब 1 घंटे 20 मिनट तक चली इस बहस में दोनों नेताओं ने अपने-अपने कार्यकाल के आंकड़े सामने रखे. लेकिन यह सिर्फ नंबरों की लड़ाई नहीं रही. एक तरफ सवाल था कि कितने घर स्वीकृत हुए, दूसरी तरफ पूछा गया कि कितने घर वास्तव में बनकर तैयार हुए. फिर बात पहुंच गई उस पोर्टल तक, जिस पर पीएम आवास का डेटा दर्ज होता है. यहीं से बहस और ज्यादा गर्म हो गई.

विजय शर्मा का दावा- 17.75 लाख पीएम आवास पूरे हुए

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बहस में केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ में 17 लाख 75 हजार पीएम आवास पूर्ण किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को भारत सरकार की वेबसाइट पर देखा जा सकता है. विजय शर्मा ने यह भी दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने देश में सर्वाधिक पीएम आवास बनाए. यानी भाजपा सरकार का सीधा तर्क है कि उसके कार्यकाल में सिर्फ मंजूरी नहीं दी गई, बल्कि बड़ी संख्या में मकान वास्तव में पूरे भी किए गए.

कांग्रेस सरकार पर विजय शर्मा का हमला- स्वीकृति हुई, घर पूरे नहीं हुए?

विजय शर्मा ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए. उनका दावा था कि कांग्रेस सरकार के पांच साल के दौरान पीएम आवास के लिए करीब 3,900 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति हुई, लेकिन करीब 3 लाख आवास ही पूरे हो पाए. इसके मुकाबले उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने करीब ढाई साल में लगभग 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए. यहीं भाजपा का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा होता है- अगर आवास के लिए स्वीकृति और पैसा था, तो बड़ी संख्या में घर पूरे क्यों नहीं हुए?

भूपेश बघेल बोले- हमारे कार्यकाल में करीब 7 लाख आवास स्वीकृत हुए. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विजय शर्मा के दावों का जवाब अपने आंकड़ों से दिया. उन्होंने बताया कि 2018 में 3 लाख 48 हजार 960 घर स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 1 लाख 39 हजार मकान पूरे हुए. इसके बाद वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1 लाख 97 हजार 811 आवास का लक्ष्य था और उनके अनुसार इनमें से 1 लाख 22 हजार आवास पूरे किए गए.

बघेल ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान राज्यों की आर्थिक स्थिति खराब थी और सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं था. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार ने आवास निर्माण के लिए RBI से लोन तक लिया था. सबसे बड़ा सवाल- पीएम आवास का पोर्टल बंद हुआ था या नहीं? पूरी बहस में सबसे ज्यादा गर्मी शायद इसी मुद्दे पर दिखाई दी.

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि 2022-23 में पीएम आवास का पोर्टल बंद कर दिया गया था, जिससे योजना प्रभावित हुई. उनका कहना था कि उनकी सरकार ने केंद्र से अपना पैसा मांगा और इस संबंध में लगातार पत्राचार किया. विजय शर्मा ने इस दावे को खारिज कर दिया. उनका कहना था कि पोर्टल बंद नहीं था और कोरोना काल में भी केंद्र से राशि आती रही. अब सवाल यह है कि पोर्टल वास्तव में कब बंद हुआ, कितने समय तक बंद रहा और इसका आवासों पर वास्तविक असर कितना पड़ा? यही वह सवाल है, जिसका जवाब राजनीतिक बयान से नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और पोर्टल के डेटा से मिलना चाहिए.

विजय शर्मा का तंज- 'Grok से पूछिए, सच बताएगा'

बहस के दौरान विजय शर्मा ने बघेल के दावों पर सवाल उठाते हुए पूर्व मंत्री टीएस सिंहदेव के पुराने रुख का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार में राशि नहीं मिलने को लेकर आवास नहीं बन पाने की बात कही गई थी. इसी दौरान विजय शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि 'Grok से पूछिए, सच बताएगा.' यह टिप्पणी भी बहस के दौरान चर्चा का हिस्सा बन गई.

हालांकि यहां असली सवाल AI का नहीं, बल्कि आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड का है. पीएम आवास जैसी योजना में अंतिम सत्य वही आंकड़े होंगे जिन्हें संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से सत्यापित किया जा सके. बघेल का दावा- 6.97 लाख आवास हमारी सरकार ने स्वीकृत किए. भूपेश बघेल ने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर राज्य में करीब 18 लाख आवास बाकी थे. उनके मुताबिक, उनकी सरकार ने इनमें से करीब 6 लाख 97 हजार आवास स्वीकृत किए.

बघेल का तर्क था कि केवल यह कहना कि उनके कार्यकाल में इतने मकान पूरे नहीं हुए, पूरी तस्वीर नहीं बताता. उनके अनुसार यह देखना भी जरूरी है कि कितने आवास स्वीकृत हुए, केंद्र से राशि कब मिली और किन परिस्थितियों में निर्माण प्रभावित हुआ. यहीं से एक महत्वपूर्ण सवाल निकलता है- क्या 'स्वीकृत', 'निर्माणाधीन' और 'पूर्ण' आवासों को दोनों नेता एक ही तरीके से गिन रहे हैं?

अगर नहीं, तो दोनों के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दे रहा है?

18 लाख आवास पर भी आमने-सामने दावे. बहस में 18 लाख पीएम आवास का आंकड़ा भी सामने आया. भूपेश बघेल ने दावा किया कि 25 सितंबर 2023 से दिसंबर 2024 के बीच 18 लाख मकान स्वीकृत किए गए. वहीं विजय शर्मा ने भाजपा सरकार की ओर से 18 लाख पीएम आवास के संकल्प का जिक्र किया. इससे एक और सवाल पैदा होता है- क्या यहां 'स्वीकृति', 'संकल्प' और 'पूर्ण निर्माण' को अलग-अलग आंकड़ों के रूप में देखा जा रहा है? यही अंतर आम लोगों के लिए सबसे ज्यादा भ्रम पैदा कर सकता है. विजय शर्मा बोले- 2024-25 में 10.42 लाख आवास केंद्र ने दिए

विजय शर्मा ने 2024-25 के आंकड़ों का भी जिक्र किया.

उनके मुताबिक, केंद्र सरकार ने 10 लाख 42 हजार 797 आवास दिए, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार ने 10 लाख 26 हजार 586 आवास लिए. उन्होंने कहा कि केंद्र में फिर भाजपा सरकार बनने के बाद 2 करोड़ आवास बनाने का संकल्प लिया गया और इसके लिए केंद्र की ओर से किस्त भी जारी की गई. विजय शर्मा ने कहा कि वह राजनीति करने नहीं, बल्कि आंकड़ों पर बात करने आए हैं और अगर कहीं कमी है तो उसे मिलकर ठीक किया जा सकता है.

बघेल का सवाल- फिर पोर्टल बंद होने की बात कहां से आई?

बघेल अपने इस दावे पर कायम रहे कि पीएम आवास का पोर्टल बंद किया गया था. उन्होंने कहा कि अगर उनके दावे पर विश्वास नहीं किया जा रहा तो पत्रकार और संबंधित लोग रिकॉर्ड देखकर खुद तय कर सकते हैं कि सही कौन है. यानी बहस का एक बड़ा हिस्सा अब 'किसने कितने घर बनाए' से आगे बढ़कर 'डेटा आया कहां से और रिकॉर्ड में क्या दर्ज है' पर पहुंच गया है. 'आपने गरीबों की आह ली, इसलिए सरकार गई'- बहस में बढ़ा तापमान

बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखे राजनीतिक आरोप भी लगे.

विजय शर्मा ने बघेल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान गरीबों के आवास प्रभावित हुए. उन्होंने यहां तक कहा कि कई लोग मकान मिलने का इंतजार करते-करते दुनिया से चले गए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने पोर्टल पर जानकारी नहीं डाली और बाद में केंद्र पर आरोप लगाया. बहस के दौरान विजय शर्मा ने बघेल से यह भी कहा कि 'आपने गरीबों की आह ली, इसलिए सरकार गई.' यह बयान राजनीतिक बहस को आंकड़ों से सीधे आरोप-प्रत्यारोप की तरफ ले गया. बघेल बोले- कोरोना में सरकार के पास पैसा तक नहीं था.

उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान राज्यों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी. उनका दावा था कि सरकार के सामने वेतन देने तक की चुनौती थी और इसके बावजूद आवास निर्माण के लिए RBI से लोन लेना पड़ा. बघेल का कहना था कि उस दौर की परिस्थितियों को नजरअंदाज करके सिर्फ पूर्ण हुए मकानों की संख्या के आधार पर सरकार के प्रदर्शन का आकलन नहीं किया जा सकता.

प्रेस क्लब के बाहर भी भिड़े कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता

अंदर नेताओं के बीच बहस चल रही थी तो बाहर भी राजनीतिक तापमान बढ़ गया. रायपुर प्रेस क्लब के बाहर कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार पर गरीबों को पीएम आवास नहीं देने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार के दौरान आवास निर्माण के आंकड़ों को लेकर पलटवार किया. स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया.

असली सवाल- गरीब को घर मिला या सिर्फ आंकड़ों में बन गया?

पूरी राजनीतिक बहस को अगर एक लाइन में समेटें तो सवाल बेहद सीधा है. किस सरकार ने कितने पीएम आवास स्वीकृत किए, कितने की राशि जारी हुई, कितने मकान निर्माणाधीन रहे और आखिर कितने घरों में गरीब परिवार वास्तव में रहने पहुंचे? क्योंकि एक तरफ स्वीकृति है, दूसरी तरफ फंड, तीसरी तरफ निर्माण की शुरुआत और आखिर में पूरा हुआ मकान. इन चारों को एक ही आंकड़ा मान लिया जाए तो राजनीतिक बयानबाजी तो आसान हो जाती है, लेकिन जमीन की असली तस्वीर छिप सकती है.

पीएम आवास पर अब सिर्फ बयान नहीं, रिकॉर्ड की जरूरत

रायपुर प्रेस क्लब की बहस ने एक बात साफ कर दी है- छत्तीसगढ़ में पीएम आवास अब सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. भाजपा अपने कार्यकाल में तेजी से आवास निर्माण का दावा कर रही है. कांग्रेस अपने कार्यकाल में स्वीकृत आवास, कोरोना की परिस्थितियों, केंद्र से पत्राचार और पोर्टल बंद होने के दावे को सामने रख रही है. लेकिन इस पूरी बहस का अंतिम जवाब किसी नेता के बयान या किसी AI के जवाब से नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलना चाहिए. कितने आवास स्वीकृत हुए? कितने पूरे हुए? पैसा कब आया? पोर्टल कब बंद हुआ? और आज कितने परिवार अपने पक्के घर में रह रहे हैं?

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