Pax Silica सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए बनेगा गेम चेंजर, भारत के दोनों हाथों में होंगे लड्डू - बड़ी बातें
भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले Pax Silica गठबंधन में शामिल होकर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र बड़ी छलांग लगा दी है. इससे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में न केवल बड़ा बूस्ट मिलेगा बल्कि दुनिया भर से निवेश भी देश में आएगा.
भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले वैश्विक गठबंधन Pax Silica में शामिल होकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन की वैश्विक राजनीति में बड़ा कदम रख दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में चिप्स, क्रिटिकल मिनरल्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है.
दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit के आखिरी दिन इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जहां सैकड़ों स्टार्टअप्स, टेक कंपनियां और नीति-निर्माता मौजूद थे. सरकार का मानना है कि इस साझेदारी से भारत न सिर्फ चिप डिजाइन और उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि उसे भरोसेमंद वैश्विक टेक हब के रूप में भी स्थापित करेगा. अमेरिका के साथ यह रणनीतिक तालमेल भारत की इंडो-पैसिफिक नीति, डिजिटल इकोनॉमी और उभरती AI ताकत को नई दिशा देगा. Pax Silica का मकसद उन देशों को साथ लाना है जो तकनीक को आज़ादी, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं.
- भारत अमेरिका-नेतृत्व वाले गठबंधन Pax Silica में शामिल हुआ, जिसका उद्देश्य AI और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाना है.
- इस समझौते पर हस्ताक्षर दिल्ली में हुए AI Impact Summit के अंतिम दिन, जिसमें 600 से ज्यादा AI स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया.
- केंद्रीय आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि यह करार भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को बड़ा फायदा देगा.
- उन्होंने बताया कि भारत में 10 सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित हो चुके हैं और जल्द पहला प्लांट व्यावसायिक उत्पादन शुरू करेगा.
- अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा कि Pax Silica “आजादी बनाम निगरानी राज्यों” की लड़ाई है और भारत के जुड़ने से साझेदारी और मजबूत होगी.
- गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भारत-अमेरिका साझेदारी को AI के लाभ दुनिया तक पहुंचाने के लिए जरूरी बताया.
- Pax Silica का लक्ष्य ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, चिप निर्माण और AI मॉडल तक पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है.
- इस गठबंधन में अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्रिटेन, यूएई, इज़राइल, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं.
- घोषणा पत्र में कहा गया है कि AI क्रांति वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को नए सिरे से आकार दे रही है.
- Pax Silica का एक मुख्य उद्देश्य “coercive dependency” कम करना है, यानी किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचना.
- भारत की एंट्री से उसे वैश्विक AI और चिप इकोनॉमी में भरोसेमंद साझेदार के रूप में पहचान मिलेगी.
- विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भारत को भविष्य की डिजिटल और टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका दिला सकता है.
- भारत बहुत तेज़ी से खुद को सेमीकंडक्टर और AI सुपरपावर बनाने की दिशा में बढ़ रहा है. ऐसे में इस वैश्विक टेक ग्रुप में शामिल होना भारत के लिए सिर्फ कूटनीतिक जीत नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी छलांग भी है.
- इस गठबंधन से भारत को अमेरिका और विकसित देशों से एडवांस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलेगा, जिससे चिप डिजाइन और निर्माण में तेजी आएगी.
- विदेशी कंपनियों का भारी निवेश (Investment) भारत में आएगा, जिससे सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियां और AI रिसर्च सेंटर स्थापित होंगे.
- भारतीय युवाओं को हाई-स्किल ट्रेनिंग मिलेगी, जिससे इंजीनियरिंग, AI और चिप मैन्युफैक्चरिंग में लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी.
- भारत को अब मोबाइल, कार, मिसाइल और सुपरकंप्यूटर के लिए चिप्स बाहर से मंगाने पर कम निर्भर रहना पड़ेगा, यानी आत्मनिर्भर भारत को ताकत मिलेगी.
- इससे भारत एक भरोसेमंद ग्लोबल टेक हब बनेगा और चीन पर दुनिया की निर्भरता घटाने में भारत अहम भूमिका निभा सकेगा.
- सीधे शब्दों में कहें तो, यह कदम भारत को सिर्फ यूज़र नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी बनाने वाला देश बनाने की दिशा में बड़ा मोड़ है.




