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आस्था बनाम दलील: 'मंदिर को कार्तिगई दीपम जलाना ही होगा', मद्रास हाई कोर्ट का आदेश - सरकार की आपत्ति 'हास्यास्पद'

मद्रास हाई कोर्ट ने कार्तिगई दीपम को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मंदिर में कार्तिगई दीपम जलाया जाएगा और राज्य सरकार की ओर से दी गई आपत्तियों को हास्यास्पद करार दिया. हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं में बिना ठोस आधार के दखल स्वीकार्य नहीं. इस फैसले को आस्था, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के संतुलन के तौर पर देखा जाना चाहिए.

आस्था बनाम दलील: मंदिर को कार्तिगई दीपम जलाना ही होगा, मद्रास हाई कोर्ट का आदेश - सरकार की आपत्ति हास्यास्पद
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( Image Source:  ani )

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने छह जनवरी (मंगलवार) को थिरुपरंकुन्द्रम पहाड़ियों के ऊपर स्थित कार्तिगई दीपम जलाने का आदेश बरकरार रखा. अदालत ने राज्य सरकार की इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया कि यह अनुष्ठान सार्वजनिक शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ सकता है. जस्टिस जी जयचंद्रन और केके रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने तिरुपरनकुंड्रम मुरुगन मंदिर के कार्यकारी अधिकारी, मदुरै जिला कलेक्टर और मदुरै शहर पुलिस आयुक्त द्वारा दायर अपीलों का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया. इससे पहले बेंच ने सभी पक्षों की ओर से दलीलें सुनने के बाद 18 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

मद्रास हाई कोर्ट में अपील सिंगल जज जस्टिस जीआर स्वामीनाथन द्वारा 1 दिसंबर को पारित एक आदेश से संबंधित थीं, जिन्होंने पहाड़ी की चोटी पर पत्थर के खंभे पर कार्तिगई दीपम के अवसर पर अनुष्ठान दीपक जलाने के निर्देश मांगने वाली एक याचिका को स्वीकार कर लिया था. हालांकि, अधिकारियों द्वारा संभावित कानून-व्यवस्था की चिंताओं का हवाला देने के बाद इस आदेश को लागू नहीं किया गया.

डिवीजन बेंच के सामने विचार के लिए दो मुख्य सवाल उठे, क्या पत्थर के खंभे को हिंदुओं के लिए दीपाथून (दीपम स्थान) माना जा सकता है, जिससे उन्हें कार्तिगई दीपम अनुष्ठान के हिस्से के रूप में दीपक जलाने का अधिकार मिले? क्या दीपक जलाने की अनुमति देने से पास के मुस्लिम दरगाह के अधिकारों का उल्लंघन होगा या उन पर असर पड़ेगा? इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अपने फैसले में राज्य और अन्य अपीलकर्ताओं के रुख पर सख्त नाराजगी जाहिर की.

राज्य सरकार की दलील खारिज

हाई कोर्ट बेंच ने टिप्पणी की कि यह "हास्यास्पद और अविश्वसनीय" है कि 'राज्य सरकार' यह दावा कर सकती है कि मंदिर की जमीन पर मंदिर द्वारा दीपक जलाने से सार्वजनिक शांति भंग होगी. अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती. जजों ने दलीलों के दौरान किए गए उस शरारती बयान की भी आलोचना की कि पत्थर का खंभा दरगाह का हिस्सा है. अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया.

मद्रास हाई कोर्ट की बेंच ने धार्मिक प्रथा पर जोर देते हुए बेंच ने कहा कि एक ऊंची जगह पर दीपक जलाने की प्रथा है. ताकि सभी हिंदू भक्तों को दिखाई दे. यह प्रथा अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त है. मंदिर मैनेजमेंट के पास कार्तिगई दीपम के मौके पर दीया जलाने की भक्तों की रिक्वेस्ट को मना करने या उसमें देरी करने का सही कारण नहीं है.

शांति भंग की आशंका को बताया मनगढ़ंत

कानून-व्यवस्था की चिंताओं को बार-बार उठाने पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक शांति भंग होने का डर कुछ नहीं बल्कि जानबूझकर बनाया गया एक काल्पनिक भूत है. बेंच ने राज्य सरकार को चेताते हुए कहा कि ऐसे बेबुनियाद डर सिर्फ "समुदायों के बीच अविश्वास पैदा करते हैं."

हाई कोर्ट के सिंगल जज के फैसले को पूरी तरह से बरकरार रखते हुए डिवीजन बेंच ने साफ तौर पर निर्देश दिया कि मंदिर देवस्थान को दीपाथून पर दीया जलाना ही होगा. कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए खास निर्देश जारी किए कि यह रस्म व्यवस्थित तरीके से और जगह को कोई नुकसान पहुंचाए बिना पूरी की जाए.

हाई कोर्ट ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) स्मारक के संरक्षण के लिए जरूरी शर्तें लगाने के लिए आजाद होगा. बेंच ने आगे निर्देश दिया कि दीया जलाते समय मंदिर देवस्थान के अधिकारियों के साथ किसी भी आम आदमी को जाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. मदुरै जिला कलेक्टर को पूरे कार्यक्रम की निगरानी करने का निर्देश दिया गया.

DMK फैसले को सुप्रीम कोर्ट में देगी चुनौती

तमिलनाडु सरकार ने कहा कि वह मदुरै बेंच के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी. कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी DMK ने कहा कि वह फैसले का अध्ययन करेगी. पार्टी ने कहा, "सरकार आगे की कार्रवाई पर फैसला लेगी." DMK ने किसी भी दूसरी पार्टी से ज्यादा हिंदुओं के लिए काम किया है. तमिलनाडु के लोग हमें 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट डीएमके को मिला था.

हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान

वहीं, तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने भी इस फैसले की तारीफ की और कहा कि हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान किया गया है.

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