SIR के बाद हटे 13 करोड़ नाम, तो अब चुनाव आयोग ने क्या उठाया बड़ा कदम, 20 राज्यों में अब ECI का कौनसा चलेगा विशेष अभियान?
एसआईआर से अब तक 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिसको लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है. अब छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है.
Election Commission of India
देशभर के सभी राज्यों में हुए SIR के बाद 13 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए गए, जिसको लेकर भारी बवाल भी मचा हुआ है. विपक्षी पार्टियां भी इसको लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर घपला करने का आरोप लगा रही है. वहीं अब SIR को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को कहा है कि वे छूटे हुए मतदाताओं के साथ-साथ 18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए और पहली बार मतदान करने वाले पात्र लोगों का नाम भी मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया तेज करें.
आयोग का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब SIR के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. 29 सितंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखित निर्देश भेजे गए थे. इसके बाद गुरुवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी अधिकारियों को इस अभियान के बारे में विस्तार से बताया गया.
फॉर्म 6 को लेकर क्या?
इस विशेष अभियान में फॉर्म 6 के उस सवाल को शामिल नहीं किया जाएगा, जिसे जुलाई में जोड़ा गया था. SIR के बाद ऑनलाइन फॉर्म में आवेदकों से पूछा जा रहा था कि क्या उनका या उनके माता-पिता का नाम मतदाता सूची में दर्ज है. इस सवाल का जवाब दिए बिना फॉर्म जमा करने की अनुमति नहीं थी. ऐसे में उन 18 वर्षीय युवाओं के लिए परेशानी खड़ी हो सकती थी, जिनके माता-पिता का नाम SIR के दौरान मतदाता सूची से हट गया था. ऐसी स्थिति में उनके लिए सही जानकारी दर्ज कर फॉर्म पूरा करना मुश्किल हो जाता था.
चुनाव आयुक्तों क्या उठाए थे सवाल?
रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर आयोग के भीतर भी सवाल उठे हैं. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने में 14 बार ऐसे फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई, जिन्हें कथित तौर पर आयोग की जानकारी के बिना लिया गया था. इनमें फॉर्म 6 में किए गए बदलाव और ECI-NET के केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे. ECI-NET वही सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल SIR के दौरान मतदाता सूची तैयार करने और अब मतदाता सूचियों को रखने के लिए किया जा रहा है.
क्या दिए गए निर्देश?
गुरुवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में आयोग की ओर से विधानसभा क्षेत्रों के अधिकारियों को SIR से पहले और बाद की मतदाता सूचियों की तुलना करने के निर्देश भी दिए गए. अधिकारियों से कहा गया कि वे हटाए गए नामों की सूची तैयार करें और ऐसे लोगों की पहचान करें जो गलती से सूची से बाहर हो गए हैं. एक अधिकारी के मुताबिक "विशेष रूप से उन मामलों में जहां मतदाताओं का नाम कहीं और दर्ज नहीं है, या वे डुप्लिकेट नहीं हैं, या उनकी मृत्यु नहीं हुई है, उनके घरों का दौरा करने और उनसे फॉर्म 6 भरवाने के निर्देश दिए गए हैं,"
आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अगर किसी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से मतदाता सूची से छूट गया है, तो उसे नए मतदाताओं के लिए निर्धारित फॉर्म 6 के जरिए दोबारा सूची में शामिल किया जाए. इसका एक उदाहरण गोवा में भी सामने आया है. वहां 21 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची से छूटे 97 मतदाताओं को इसी प्रक्रिया के तहत फिर से नामांकित किया जाएगा. राज्य के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों ने इन मतदाताओं को पात्र पाया था, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो सके.




