भैंसों के बाड़े में स्कूल का दावा, फिर जयपुर के गांव में CJP टीम पर हमला! BJP पर आरोप, गांव वालों ने क्या कहा?
जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची CJP टीम पर कथित हमले से विवाद बढ़ गया. CJP ने BJP कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया, जबकि ग्रामीणों ने अलग दावा किया। जानें स्कूल की बदहाली, हमले के आरोप और पूरे विवाद की कहानी.
जयपुर के एक गांव में सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची Cockroach Janta Party (CJP) की टीम पर कथित हमले का मामला सामने आया है. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि टीम के सदस्यों, जिनमें आशुतोष रांका भी शामिल थे, पर हमला किया गया. उन्होंने इस घटना के लिए BJP कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए राजस्थान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए. दिपके ने सोशल मीडिया पर कथित झड़प और क्षतिग्रस्त कार की तस्वीरें भी साझा कीं.
हालांकि, गांव के लोगों ने CJP के आरोपों से अलग पक्ष रखा है. एक ग्रामीण ने PTI से कहा कि ग्रामीण इस मामले का राजनीतिकरण नहीं चाहते और स्कूल के निर्माण के लिए 12 लाख रुपये मंजूर हो चुके हैं. ग्रामीण ने CJP के विचारों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि वे ऐसी पार्टी का समर्थन नहीं करते, जिस पर भगवान राम के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने और देश को बांटने की बात करने के आरोप हैं. यह पूरा विवाद CJP के सरकारी स्कूलों का दौरा कर उनकी स्थिति और सुविधाओं की कमी को सामने लाने के अभियान के दौरान हुआ.
10 Points में जानें पूरा मामला
1. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल का दौरा करने पहुंची CJP टीम पर हमला किया गया. उन्होंने कहा कि CJP के स्वयंसेवकों, जिनमें आशुतोष रांका भी शामिल थे, को निशाना बनाया गया.
2. दिपके ने आरोप लगाया कि BJP के लोग CJP के स्वयंसेवकों के पीछे पड़े हैं और राजस्थान पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के हमले की अनुमति कैसे दी जा सकती है. उन्होंने कथित हमले की तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें झड़प और एक कार की टूटी खिड़की दिखाई दे रही है.
3. CJP कार्यकर्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि उनकी टीम रामपुरा-कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने गई थी. उनके अनुसार, स्कूल पिछले कई वर्षों से एक भैंसों के बाड़े में चल रहा है. उन्होंने कहा कि CJP की टीम पिछले साल भी स्कूल का निरीक्षण करने गई थी और तब भी स्कूल उसी जगह चल रहा था.
4. रांका का आरोप है कि टीम के स्कूल पहुंचने से पहले ही कुछ लोग वहां मौजूद थे. उन्होंने दावा किया कि CJP के स्वयंसेवकों पर पहले हमला किया गया. रांका ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस को सूचना देने के बावजूद समूह पर पत्थरों से हमला किया गया.
5. रांका ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को 48 घंटे का समय देते हुए कथित हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करने और संबंधित आदेश वापस लेने की मांग की. उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने पर पूरे राजस्थान में आंदोलन करने की चेतावनी दी और घटना को राजस्थान के लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन बताया.
6. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने राजस्थान पुलिस पर कथित हमले के दौरान मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उनकी टीम को स्कूल जाने से क्यों रोका गया, जबकि उनका दावा है कि वहां बच्चों को भैंसों के बाड़े में पढ़ाया जा रहा था.
7. CJP कार्यकर्ता शिवांगी शर्मा ने भी टीम पर हमले का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं को आतंकवादी और नक्सली तक कहा गया. उन्होंने सवाल उठाया कि किसी को बाहरी या अंदर का व्यक्ति कहने का क्या मतलब है, क्योंकि यह पूरा देश एक है और CJP टीम देश के ही बच्चों की बात कर रही थी.ॉ
8. दूसरी ओर, गांव के एक निवासी ने CJP के दावों पर आपत्ति जताई. ग्रामीण ने PTI से कहा कि गांव के लोग इस मामले का राजनीतिकरण नहीं चाहते. उन्होंने बताया कि स्कूल के निर्माण के लिए 12 लाख रुपये मंजूर हो चुके हैं और ग्रामीण खुद स्कूल बनाने में सक्षम हैं.
9. ग्रामीण ने CJP के विचारों का विरोध करते हुए कहा कि वे ऐसी पार्टी के खिलाफ हैं, जिस पर भगवान राम के बारे में आपत्तिजनक बातें कहने और देश को बांटने की बात करने के आरोप हैं. ग्रामीण ने कहा कि गांव के लोग ऐसे लोगों का समर्थन नहीं करते और उन्हें ऐसे लोगों की जरूरत है जो देश के लिए काम करें.
10. मामले पर BJP विधायक गोपाल शर्मा ने CJP की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि घर के अंदर कॉकरोच का कोई उपयोग नहीं होता और बच्चों तथा युवाओं का स्थान घर में है. वहीं, BJP विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने हिंसा का समर्थन नहीं करने की बात कही. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन अगर CJP को कोई शिकायत है तो उसे संबंधित विभाग, अधिकारी या जनप्रतिनिधि के सामने रखना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि किसी शिक्षण संस्थान में जाकर हंगामा करने से छात्रों के भविष्य पर असर पड़ता है और टीम को स्कूल जाने से पहले अनुमति लेनी चाहिए थी.




