New Aviation Rules: फ्लाइट में अब पावर बैंक से चार्जिंग बंद: DGCA ने बदले एविएशन सेफ्टी नियम, जानिए क्या ले जा सकते हैं और क्या नहीं
DGCA New Rules: हवाई यात्रियों के लिए DGCA ने पावर बैंक और लिथियम बैटरी से चलने वाले उपकरणों को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं. अब फ्लाइट के दौरान पावर बैंक से मोबाइल या अन्य गैजेट चार्ज करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा. पावर बैंक और अतिरिक्त बैटरियां केवल हैंड बैगेज में ही ले जाई जा सकेंगी और इन्हें ओवरहेड केबिन में रखने की अनुमति नहीं होगी.
DGCA New Rules: अगर आप हवाई यात्रा करते हैं और फ्लाइट में बैठकर पावर बैंक से मोबाइल चार्ज करने की आदत है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. अब फ्लाइट के दौरान पावर बैंक का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.
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नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पावर बैंक और अन्य लिथियम बैटरी से चलने वाले उपकरणों को लेकर नए सख्त नियम लागू किए हैं. इन नियमों के तहत अब यात्री विमान में बैठकर अपने मोबाइल या अन्य गैजेट्स को पावर बैंक से चार्ज नहीं कर पाएंगे, चाहे वह सीट में लगे चार्जिंग पॉइंट से ही क्यों न हो.
अब फ्लाइट में पावर बैंक को लेकर क्या बदला?
DGCA के नए नियमों के मुताबिक:
- फ्लाइट में पावर बैंक से मोबाइल या कोई भी डिवाइस चार्ज नहीं कर सकते
- विमान की सीट में लगे चार्जिंग पॉइंट से भी पावर बैंक चार्ज करना मना
- पावर बैंक सिर्फ हैंड बैग (कैबिन बैगेज) में ही ले जा सकते हैं
- पावर बैंक को ओवरहेड केबिन (ऊपर की अलमारी) में रखना मना
DGCA का कहना है कि ऊपर रखे बैग में अगर आग लगती है तो उसे देखना और काबू करना मुश्किल हो जाता है.
लिथियम बैटरी इतनी खतरनाक क्यों होती है?
आजकल मोबाइल, लैपटॉप, ईयरबड्स और पावर बैंक-सबमें लिथियम बैटरी होती है. दरअसल, लिथियम बैटरियों से जुड़ी आग को सबसे खतरनाक माना जाता है. ये बैटरियां बहुत ज्यादा ऊर्जा वाली होती हैं और कई बार अपने आप जलती रहती हैं, जिससे आग बुझाना कठिन हो जाता है. DGCA के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा गर्म होना, ओवरचार्जिंग, दबाव पड़ना, अंदरूनी शॉर्ट सर्किट या खराब क्वालिटी की बैटरी की वजह से इनमें आग लग सकती है. कई मामलों में तो बैटरी फटने तक की नौबत आ जाती है. खास बात यह है कि लिथियम बैटरी की आग अपने आप बुझती नहीं, उसे काबू करना बहुत मुश्किल होता है. DGCA ने चेतावनी दी है कि ऐसी आग से यात्री और क्रू दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है.
एयरलाइंस को क्या निर्देश दिए गए हैं?
नए नियमों के तहत एयरलाइंस को भी अपनी जिम्मेदारी बढ़ानी होगी. DGCA ने सभी एयरलाइंस को निर्देश दिए हैं कि वे लिथियम बैटरियों से जुड़े जोखिमों को लेकर अपने सेफ्टी ऑडिट और रिस्क असेसमेंट की समीक्षा करें. इसके अलावा केबिन क्रू को खास ट्रेनिंग देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि वे समय रहते ज्यादा गर्म होने, धुएं या आग के शुरुआती संकेत पहचान सकें और सही तरीके से आग बुझाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल कर सकें.
यात्रियों को जागरूक करने के लिए फ्लाइट के दौरान अनाउंसमेंट करना भी अब जरूरी कर दिया गया है. DGCA ने कहा है कि अगर किसी यात्री के डिवाइस से गर्मी, धुआं या अजीब सी गंध आए तो वह तुरंत केबिन क्रू को जानकारी दे. वहीं एयरलाइंस को ऐसे सभी मामलों की रिपोर्ट DGCA को देने के निर्देश भी दिए गए हैं.
यात्रियों के लिए भी जरूरी निर्देश
अब यात्रियों को भी सतर्क रहना होगा. अगर किसी यात्री का मोबाइल, पावर बैंक या कोई डिवाइस गर्म हो, धुआं निकाले, अजीब बदबू दे तो तुरंत केबिन क्रू को बताना होगा. एयरलाइंस को ऐसी हर घटना की रिपोर्ट DGCA को देनी होगी.
एयरपोर्ट पर भी दिखेंगे चेतावनी संदेश
एयरपोर्ट्स की भूमिका भी इस नई व्यवस्था में अहम होगी. DGCA ने एयरपोर्ट ऑपरेटर्स से कहा है कि टर्मिनल एंट्री, चेक-इन काउंटर, सिक्योरिटी चेक और बोर्डिंग गेट पर लिथियम बैटरी से होने वाले आग के खतरे को लेकर साफ और स्पष्ट चेतावनी संदेश और वीडियो दिखाए जाएं. साथ ही यात्रियों को यह भी समझाया जाए कि बोर्डिंग से ठीक पहले पावर बैंक चार्ज करने से बचें.
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नियम क्यों सख्त किए गए?
DGCA के मुताबिक, दुनियाभर में फ्लाइट्स के दौरान लिथियम बैटरियों से जुड़े हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो की एक फ्लाइट में टैक्सींग के दौरान एक यात्री का पावर बैंक आग पकड़ बैठा था. हालांकि उस घटना में कोई घायल नहीं हुआ. इसी तरह जनवरी में दक्षिण कोरिया के गिम्हे एयरपोर्ट पर एयर बुसान के विमान में आग लगने की जांच में भी पावर बैंक को संभावित वजह माना गया था.
यात्रियों के लिए आसान सलाह
- फ्लाइट में चढ़ने से पहले मोबाइल चार्ज कर लें
- पावर बैंक सिर्फ हैंड बैग में रखें
- फ्लाइट में पावर बैंक का इस्तेमाल न करें
- किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत क्रू को बताएं
DGCA का कहना है कि आज के दौर में जहां हर यात्री के पास मोबाइल, टैबलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होते हैं, वहां ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सख्ती जरूरी है. बेहतर सुरक्षा जांच, प्रशिक्षित केबिन क्रू और जागरूक यात्रियों के जरिए ही विमान यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है.





