नक्सलवाद के खात्मे के बाद नए मिशन पर सरकार, 2029 तक के लिए बनाया है ये प्लान?
केंद्र सरकार नक्सलवाद पर काबू के बाद अब उत्तर-पूर्व में उग्रवाद खत्म करने की तैयारी में है. 2029 तक मिशन पूरा करने का लक्ष्य है, CAPF बलों की तैनाती मणिपुर समेत कई राज्यों में होगी.
केंद्र सरकार अब देश में वामपंथी उग्रवाद (LWE) पर काबू पाने के बाद नॉर्थ-ईस्ट में सक्रिय उग्रवाद को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है. एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक इस बारे में जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक इस मिशन को पूरा करना है.
अधिकारियों के मुताबिक, जिन सुरक्षाबलों को अब तक नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया था, उन्हें मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे उग्रवाद प्रभावित राज्यों में भेजा जाएगा. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) का यह पुनर्गठन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और अमरनाथ यात्रा के बाद शुरू होने की संभावना है. पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जबकि अमरनाथ यात्रा जुलाई-अगस्त में होती है.
बटालियन को कब भेजा जाएगा नॉर्थ ईस्ट?
आने वाले महीनों में, मुमकिन है कि 2026 के बीच तक, गुरिल्ला वॉर में ट्रेनिंग खास यूनिट्स जैसे सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन को नॉर्थ ईस्ट भेजा जाएगा. हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों से बलों की पूरी तरह वापसी नहीं होगी, बल्कि धीरे-धीरे उनकी संख्या कम की जाएगी.
मणिपुर के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वहां नई माइन-प्रोटेक्टेड गाड़ियों की पहली खेप पहुंच चुकी है, जिनका इस्तेमाल संवेदनशील इलाकों में किया जाता है. उत्तर-पूर्व में फिलहाल कुल 16 उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं. इनमें मणिपुर में सबसे ज्यादा 8, असम में 3, मेघालय और त्रिपुरा में 2-2 और नागालैंड में 1 संगठन सक्रिय है.
क्या उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में आई कमी?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में काफी कमी आई है. 2014 में 824 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जिसमें 1,934 उग्रवादियों की गिरफ्तारी, 181 के मारे जाने और 212 नागरिकों की मौत हुई थी. वहीं 2024 में घटनाएं घटकर 294 रह गईं, जिसमें 31 उग्रवादी मारे गए, 571 गिरफ्तार हुए और 30 नागरिकों की मौत हुई. 2024 में ज्यादातर घटनाएं मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़ी थीं, जो पूरे क्षेत्र के 77 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार थीं.
कैसे होगी सुरक्षाबलों की तैनाती?
मणिपुर के एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षाबलों की तैनाती की शुरुआत मणिपुर से होगी, क्योंकि यहां उग्रवाद की चुनौती बाकी राज्यों की तुलना में ज्यादा है. उन्होंने कहा कि बंद कमरे में हुई बैठकों में शीर्ष अधिकारियों ने साफ कहा है कि उत्तर-पूर्व में उग्रवाद और ड्रग तस्करी को खत्म करना जरूरी है और इसके लिए 2029 की समयसीमा तय की गई है.
अधिकारी के अनुसार, नक्सल प्रभावित राज्यों में इस्तेमाल हो रही माइन-प्रोटेक्टेड और बुलेटप्रूफ गाड़ियों को भी उत्तर-पूर्व में लाया जाएगा. कुछ हल्की बुलेटप्रूफ गाड़ियां मणिपुर के उखरूल जिले में पहले ही पहुंच चुकी हैं, जहां नागा और कुकी समुदायों के बीच झड़पें हुई हैं. मणिपुर को काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन के लिए अपनी गाड़ियां भी मिल रही हैं.




