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तोतों ने बाग उजाड़ा, अब सरकार भरेगी 20 लाख मुआवज़ा; Bombay HC ने आखिर क्यों दिया ये फैसला?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि तोते भी वन्यजीव हैं, इसलिए उनके कारण हुए नुकसान की भरपाई सरकार करेगी. महाराष्ट्र के किसान को अनार के पेड़ों के नुकसान पर मुआवजा देने का आदेश दिया गया है.

तोतों ने बाग उजाड़ा, अब सरकार भरेगी 20 लाख मुआवज़ा; Bombay HC ने आखिर क्यों दिया ये फैसला?
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( Image Source:  ANI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय3 Mins Read

Published on: 27 April 2026 9:35 AM

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया है कि एक किसान के अनार के पेड़ों को जंगली तोतों ने जो नुकसान पहुंचाया है, उसके लिए सरकार को किसान को मुआवजा देना होगा. न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की नागपुर पीठ ने कहा कि जंगली तोते भी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत 'वन्य प्राणी' (wild animals) माने जाते हैं. इसलिए राज्य सरकार को अपने इन वन्य प्राणियों के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए.

क्या हुआ था मामले में?

वर्धा जिले के हिंगी गांव के 70 वर्षीय किसान महादेव डेकाटे ने कोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्होंने बताया कि मई 2016 में पास के वन्यजीव अभयारण्य से आए जंगली तोतों के झुंड ने उनके अनार के बाग पर हमला कर दिया. तोतों ने अनार के लगभग 200 पेड़ों को बहुत नुकसान पहुंचाया. किसान ने दावा किया कि उन्हें कुल करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ. उन्होंने वन विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों से शिकायत की. अधिकारियों ने बाग का निरीक्षण किया और पाया कि लगभग 50% फल तोतों द्वारा खराब कर दिए गए थे. लेकिन उन्होंने मुआवजा देने से मना कर दिया, क्योंकि सरकारी नियमों में तोतों जैसे पक्षियों के नुकसान के लिए कोई मुआवजा देने का प्रावधान नहीं था.

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क सही नहीं है कि केवल हाथी या बाइसन जैसे बड़े जानवरों से नुकसान होने पर ही मुआवजा दिया जाए, और तोते जैसे छोटे पक्षियों से होने वाले नुकसान को नजरअंदाज कर दिया जाए.

कोर्ट की टिप्पणी थी:

अगर किसानों को संरक्षित वन्यजीवों के कारण हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलेगा, तो वे खुद ही तोतों या अन्य पक्षियों को मारने या भगाने के तरीके अपनाने लगेंगे. इससे वन्यजीव संरक्षण कानून का पूरा मकसद ही खत्म हो जाएगा.

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम एक संसदीय कानून है, जो सरकारी प्रस्तावों (GR) से ऊपर है

अधिनियम में तोतों (अलेक्जेंड्राइन तोता आदि) को भी वन्य प्राणी माना गया है. ये राज्य की संपत्ति हैं

कानून हर नागरिक से उम्मीद करता है कि वे वन्यजीवों की रक्षा करें. इसलिए नागरिकों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे वन्यजीवों के कारण अपना नुकसान चुपचाप सहते रहें

केवल कुछ जानवरों को मुआवजे के लिए शामिल करना और बाकी को बाहर रखना समानता के अधिकार (संविधान का अनुच्छेद 14) का उल्लंघन है.

कोर्ट का अंतिम आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया कि किसान महादेव डेकाटे को उनके 200 अनार के पेड़ों के नुकसान के लिए प्रति पेड़ 200 रुपये का मुआवजा देना होगा. यह आदेश 24 अप्रैल 2026 को दिया गया था और इसकी कॉपी 26 अप्रैल को सार्वजनिक की गई.

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