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जनगणना 2027: लिव-इन कपल्स को मिलेगा शादीशुदा का दर्जा, सरकार ने बदले नियम

Census 2027 में सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जिसमें स्थिर रिश्ते में रहने वाले कपल्स को शादीशुदा माना जाएगा. यह बदलाव समाज की बदलती तस्वीर को दर्शाता है और डेटा को अधिक सटीक बनाने में मदद करेगा.

जनगणना 2027: लिव-इन कपल्स को मिलेगा शादीशुदा का दर्जा, सरकार ने बदले नियम
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( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय3 Mins Read

Published on: 30 March 2026 12:42 PM

भारत में होने वाली जनगणना 2027 को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है. यह जानकारी लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ी है. सेंसस विभाग ने अपने सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर जारी किए गए FAQ में साफ-साफ बताया है कि अगर कोई लड़का और लड़की बिना शादी के एक ही घर में लंबे समय से साथ रह रहे हैं और खुद को स्थिर रिश्ते (Stable Relationship) में मानते हैं, तो जनगणना में उन्हें शादीशुदा कपल की तरह ही दर्ज किया जाएगा.

लेकिन ऐसा होने से पहले अगर दोनों खुद कहते हैं कि उनका रिश्ता स्थिर और लंबे समय का है, तो जनगणना अधिकारी उन्हें विवाहित (Married) श्रेणी में गिनेंगे और यह नियम दोनों पर लागू होगा. पहला जब लोग खुद ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर अपना डेटा भर रहे हों. दूसरा जब जनगणना अधिकारी (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा कर रहे हों. अगर कपल कई सालों से साथ रह रहा है, तो वे फॉर्म में अपनी वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित के रूप में भर सकते हैं.

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का कहना है कि समाज अब पहले से काफी बदल चुका है. आजकल बहुत से युवा बिना शादी किए भी लंबे समय तक साथ रह रहे हैं. इसलिए जनगणना के आंकड़ों में इन रिश्तों को भी सही और आधिकारिक जगह मिलनी चाहिए. इससे वास्तविक सामाजिक स्थिति का बेहतर आंकलन हो सकेगा.

पहले भी यही होता था

अधिकारियों ने बताया कि यह कोई नई बात नहीं है. पिछली जनगणनाओं (जैसे 2011) में भी अगर कोई लिव-इन कपल खुद को शादीशुदा बताता था, तो उसे उसी तरह दर्ज किया जाता था. अब बस इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट निर्देशों के साथ लिखित रूप में जारी किया गया है.

जनगणना की प्रक्रिया

जनगणना का हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन फेज लगभग 45 दिनों तक चलेगा. इसमें कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. इन सवालों के जरिए हर घर में रहने वाले लोगों की संख्या, शादीशुदा कपल्स की संख्या, परिवार की आर्थिक स्थिति और कई अन्य सामाजिक पहलुओं की जानकारी इकट्ठा की जाएगी. इस बार जनगणना को और ज्यादा आसान और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल ऑप्शन भी दिया गया है. लोग घर बैठे सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर खुद अपना और अपने परिवार का डेटा ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे.

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