Begin typing your search...

Bengal Election 2026: मुस्लिम वोट बैंक पर किस नेता की पकड़ सबसे मजबूत? क्या है पूरा सियासी गणित

बंगाल चुनाव 2026 में मुस्लिम नेताओं की भूमिका निर्णायक बनती दिख रही है. मतता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को Asaduddin Owaisi, ISF और बागी नेताओं से चुनौती मिल रही है. इस बार उन्हें हुमायूं कबीर भी चुनौती दे रहे हैं. जानिए किसका कहां कितना असर.

Bengal Election 2026 Mamata Banerjee Muslim leaders West Bengal
X
( Image Source:  Twitter )

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है. स्टेट की करीब 27 फीसद मुस्लिम आबादी एक बार फिर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में है. खासतौर पर मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण बंगाल के कई इलाकों में मुस्लिम वोट बैंक सत्ता की कुंजी माना जा रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अभी भी मजबूत स्थिति में है, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा जटिल और बहुकोणीय नजर आ रहा है.

1. ​फिरहाद हकीम

शहरी बंगाल में टीएमसी के Firhad Hakim एक मजबूत मुस्लिम चेहरा बनकर उभरे हैं. कोलकाता के मेयर और राज्य मंत्री होने के कारण उनका प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव काफी है. कोलकाता, हावड़ा और आसपास के शहरी क्षेत्रों में उनकी पकड़ साफ दिखती है. पार्टी के भीतर उन्हें भरोसेमंद मुस्लिम नेतृत्व के तौर पर देखा जाता है, जो 2026 में संगठन को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

2. सिद्दीकुल्लाह चौधरी

ग्रामीण और धार्मिक नेटवर्क की बात करें तो Siddiqullah Chowdhury का प्रभाव काफी है. जमाएत उलेमा ए हिंद से जुड़े होने के कारण उनकी पहुंच मदरसों, मस्जिदों और ग्रामीण समाज तक है. बीरभूम और ईस्ट बर्धमान जैसे जिलों में वे तृणमूल कांग्रेस के लिए मजबूत आधार तैयार करते हैं और चुनाव के समय वोट ट्रांसफर में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है.

3. अबु ताहेर खान

मुर्शिदाबाद में अबु ताहेर खानको एक स्थिर और संतुलित नेता के रूप में देखा जाता है. वे विवादों से दूर रहकर संगठन को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान देते हैं. उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस की स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है, जहां विपक्ष के लिए सेंध लगाना आसान नहीं होता.

4. हुमायूं कबीर

Humayun Kabir इस चुनाव के सबसे दिलचस्प और अनिश्चित चेहरे बनकर उभरे हैं. तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के बाद वे खुद को एक स्वतंत्र मुस्लिम नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. मुर्शिदाबाद में उनकी पकड़ और आक्रामक शैली उन्हें चर्चा में बनाए रखती है. अगर वे सीमित सीटों पर भी प्रभाव डालते हैं, तो वे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. यानी वे “किंगमेकर” भी साबित हो सकते हैं और “स्पॉइलर” भी.

5. नौसाद सिद्दीकी

नई राजनीति के रूप में Nausad Siddique का उभार भी ध्यान देने योग्य है. इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के जरिए उन्होंने खुद को एक विकल्प के रूप में पेश किया है. Furfura Sharif और दक्षिण बंगाल के कई हिस्सों में उनका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, खासकर युवाओं और धार्मिक वर्ग के बीच.

6. मोईनुल हसन

इसी तरह कुछ चेहरे ऐसे भी हैं, जिनका असर सीधे वोट पर भले कम हो, लेकिन वे चुनावी नैरेटिव को प्रभावित करते हैं. Moinul Hassan मीडिया और बहसों में सक्रिय रहते हैं और मुद्दों को दिशा देने में भूमिका निभाते हैं.

7. अबदुर रज्जाक मोल्ला

Abdur Razzak Molla जैसे नेता वामपंथी पृष्ठभूमि से आते थे और South 24 Parganas में उनका प्रभाव अब भी है.

8. सैफुद्दीन चौधरी

सैफुद्दीन चौधरी (Safiuddin Chowdhury) जैसे नेता पर्दे के पीछे संगठन को मजबूत करते हैं.

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 साफ संकेत दे रहा है कि मुस्लिम वोट बैंक इस बार पूरी तरह एकतरफा नहीं रहेगा. तृणमूल कांग्रेस अभी भी मजबूत है, लेकिन ओवैसी की एंट्री, ISF का उभार और बागी नेताओं की सक्रियता मुकाबले को बहुकोणीय बना रही है. ऐसे में नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि कौन नेता वोटों को जोड़ पाता है और कौन उन्हें बांट देता है.

बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को सियासी पारा चरम पर है. कुल 294 सीटों पर दो चरणों मतदान होगा. पहले चरण में मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में मतदान 29 अप्रैल होगा. चार मई को वोटों की गिनती के बार परिणाम घोषित किए जाएंगे.

विधानसभा चुनाव 2026ममता बनर्जी
अगला लेख