15 हजार ODI रन और 55वां शतक, फिर भी तेंदुलकर से तुलना पर विराट कोहली ने क्यों कहा- 'सचिन पाजी हमेशा सचिन पाजी रहेंगे'?
विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर से तुलना पर कहा कि उनके लिए सचिन पाजी की जगह हमेशा खास रहेगी और उनके क्रिकेट पर पड़े प्रभाव को सिर्फ रिकॉर्ड्स से नहीं आंका जा सकता. 15,000 वनडे रन और 55वां शतक लगाने के बाद भी कोहली का मानना है कि सचिन की विरासत आंकड़ों और तुलना से कहीं बड़ी है.
भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली का नाम जब भी वनडे क्रिकेट के बड़े रिकॉर्ड्स के साथ जुड़ता है, सचिन तेंदुलकर से उनकी तुलना शुरू हो जाती है. अब जब कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में 55वां शतक जड़ने के साथ 15,000 वनडे रन भी पूरे कर लिए हैं, तो एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है. हालांकि खुद कोहली इस तुलना को ज्यादा महत्व नहीं देते.
कोहली ने साफ कहा कि उनके लिए सचिन तेंदुलकर की जगह हमेशा अलग रहेगी. उन्होंने कहा, “मेरे लिए सचिन पाजी हमेशा सचिन पाजी रहेंगे. एमएस धोनी भी हमेशा मेरे पहले कप्तान के तौर पर एमएस धोनी रहेंगे. ये चीजें मेरे अंदर कभी नहीं बदल सकतीं.”
कोहली ने क्या कहा?
कोहली के मुताबिक, वह खुद को कभी ऐसी जगह नहीं देखते जहां वह यह कहें कि उन्होंने सब कुछ हासिल कर लिया है. उनका मानना है कि खेल में प्रदर्शन और तैयारी पर ध्यान देना जरूरी है और खिलाड़ी को अपने अंदर यह अहंकार नहीं आने देना चाहिए कि वह बाकी सभी से बेहतर है.
'सचिन ने क्रिकेट में क्रांति ला दी थी'
कोहली ने तेंदुलकर के योगदान को आंकड़ों से कहीं ऊपर बताया. उन्होंने कहा कि सचिन ने अपने दौर में क्रिकेट में क्रांति ला दी थी और लोगों पर उनकी छोड़ी हुई छाप को सिर्फ रिकॉर्ड्स या आपसी तुलना के जरिए नहीं समझा जा सकता. यही वजह है कि लगातार रिकॉर्ड तोड़ने के बावजूद कोहली खुद को तेंदुलकर के बराबर खड़ा करने से बचते हैं. कोहली पिछले एक दशक से अधिक समय से तेंदुलकर के साथ तुलना का सामना करते रहे हैं. करीब 2017 में भी उन्होंने ऐसी तुलना पर अपनी विनम्रता जाहिर की थी और अब इतने साल बाद भी उनका नजरिया नहीं बदला है.
15 हजार रन तक पहुंचने में कोहली ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड
वेस्टइंडीज के खिलाफ थिरुवनंतपुरम में खेले गए पहले वनडे में कोहली ने नाबाद 139 रन बनाए. इसी पारी के दौरान उन्होंने वनडे क्रिकेट में 15,000 रन पूरे किए और इस मुकाम तक पहुंचने वाले दुनिया के सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बने. उनसे पहले यह उपलब्धि सचिन तेंदुलकर के नाम थी. खास बात यह रही कि कोहली ने यह आंकड़ा सिर्फ 303 पारियों में हासिल किया, जबकि तेंदुलकर को 15,000 वनडे रन पूरे करने के लिए 377 पारियां लगी थीं. यानी कोहली ने तेंदुलकर से 74 पारियां कम खेलकर यह उपलब्धि हासिल की.
इसी मुकाबले में कोहली ने अपना 55वां वनडे शतक पूरा किया. उन्होंने 88 गेंदों पर नाबाद 139 रन की पारी खेली और भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ 8 विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
रिकॉर्ड बनने के बावजूद कोहली का फोकस अलग
कोहली के लिए व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा अहम लगातार बेहतर प्रदर्शन करना है. 15,000 रन और 55वां शतक पूरा करने के बाद भी उनका जोर इस बात पर रहा कि खिलाड़ी को अपनी तैयारी और खेल पर ध्यान देते रहना चाहिए. उन्होंने लोगों की नजर में अपनी छवि को लेकर भी कहा कि वह खुद को उस नजर से नहीं देखते, जिस नजर से बाहर के लोग उन्हें देखते हैं. फैंस उन्हें उनकी उपलब्धियों और प्रदर्शन के आधार पर देखते हैं, लेकिन वह खुद को आज भी उसी इंसान के रूप में देखते हैं, जहां से उन्होंने शुरुआत की थी.
कोहली का कहना है कि बाहर से लोग किसी खिलाड़ी की उपलब्धियों को देखकर एक अलग छवि बना लेते हैं, लेकिन खिलाड़ी खुद अपनी यात्रा और अपनी जड़ों को ज्यादा करीब से जानता है. इसलिए वह खुद को दूसरों की नजर से नहीं देखते.
सचिन से तुलना के बीच कोहली का सम्मान कायम
कोहली ने वनडे शतकों के मामले में सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और अब 15,000 वनडे रन तक भी उनसे तेज पहुंचे हैं, लेकिन कोहली के बयान से साफ है कि इन आंकड़ों के बावजूद उनके लिए तेंदुलकर सिर्फ एक रिकॉर्ड या आंकड़ा नहीं हैं. सचिन उनके लिए वह खिलाड़ी हैं जिन्होंने उनके जैसे क्रिकेटरों की पीढ़ी को प्रेरित किया और भारतीय क्रिकेट पर गहरा प्रभाव छोड़ा. इसलिए कोहली के लिए रिकॉर्ड की तुलना अपनी जगह है, लेकिन सचिन तेंदुलकर की क्रिकेट में विरासत और लोगों पर उनका प्रभाव उससे अलग और कहीं व्यापक है.




