308 पहियों वाले 'बाहुबली ट्रक' पर लदी 200 टन की मशीन, आखिर इसका काम क्या है? FAQ से जानिए हर सवाल का जवाब
308 पहियों वाले ट्रक पर लदी 200 टन की मशीन बेल्जियम से यूपी पहुंची है. जानें यह मशीन क्या है, एथेनॉल से इसका क्या कनेक्शन है और इसे कैसे ले जाया जा रहा है.
उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों 308 पहियों वाला एक विशाल ट्रांसपोर्टर लोगों का ध्यान खींच रहा है. इस पर करीब 200 टन वजनी औद्योगिक मशीन लदी है, जिसे बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए भारत लाया गया है. अब इसे सड़क मार्ग से बलरामपुर चीनी मिल तक पहुंचाया जा रहा है. मशीन को देखकर सोशल मीडिया पर कई सवाल उठ रहे हैं. आइए जानते हैं इस भारी-भरकम मशीन और इसके सफर से जुड़े सवालों के जवाब FAQ से जानते हैं...
200 टन की मशीन से जुड़े सवालों के जवाब
मिली जानकारी के मुताबिक, यह मशीन बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंची थी. इसके बाद इसे सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश में बलरामपुर चीनी मिल की ओर ले जाया जा रहा है. फिलहाल ये चंदौली पर रुकी हुई है.
मशीन का वजन और आकार सामान्य ट्रकों की क्षमता से काफी ज्यादा है. इसलिए इसे मल्टी-एक्सल हैवी हॉल ट्रेलर पर रखा गया है. बड़ी संख्या में पहियों की मदद से भारी वजन को अलग-अलग एक्सल पर बांटा जाता है, जिससे इसे सड़क पर ले जाना संभव हो सके.
जानकारी के अनुसार, मशीन का इस्तेमाल चीनी मिल की औद्योगिक प्रोसेसिंग और बाय-प्रोडक्ट से जुड़ी व्यवस्था में किया जाना है. बलरामपुर चीनी मिल में चीनी के साथ एथेनॉल और दूसरे बाय-प्रोडक्ट से जुड़ा काम भी होता है.
इस तरह के औद्योगिक Vessel का इस्तेमाल मोलासेस यानी शीरे की प्रोसेसिंग से जुड़ी एथेनॉल उत्पादन प्रक्रिया में किया जा सकता है. हालांकि, इस खास मशीन का प्लांट में सटीक तकनीकी इस्तेमाल कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज के बिना निश्चित रूप से बताना मुश्किल है.
चीनी उत्पादन के बाद बचे मोलासेस को डिस्टिलरी प्रक्रिया में भेजा जाता है. वहां इसे नियंत्रित परिस्थितियों में प्रोसेस और फर्मेंट किया जाता है. इसके बाद डिस्टिलेशन समेत आगे की प्रक्रियाओं के जरिए एथेनॉल तैयार किया जाता है.
यह एक बड़ा Industrial Vessel होता है, जिसका इस्तेमाल चीनी मिल जैसे बड़े औद्योगिक प्लांट में निर्धारित प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है. ऐसे उपकरण मजबूत धातु से बनाए जाते हैं और इनके भीतर नियंत्रित तापमान, दबाव या अन्य निर्धारित परिस्थितियों में औद्योगिक प्रक्रिया कराई जा सकती है.
वायरल जानकारी में मशीन का वजन करीब 200 टन बताया जा रहा है, जबकि एक रिपोर्ट में 180 टन का भी उल्लेख है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे लखीमपुर खीरी स्थित बलरामपुर चीनी मिल की कुंभी यूनिट तक ले जाया जा रहा है.
ऐसे भारी उपकरणों के लिए विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर और पहले से तय रूट का इस्तेमाल किया जाता है. रास्ते में पुल, सड़क, मोड़ और अन्य बाधाओं की क्षमता को ध्यान में रखा जाता है. इसी वजह से ऐसे ट्रेलर सामान्य वाहनों की तुलना में काफी धीमी गति से चलते हैं.
भारी ट्रेलर को रास्ता देने के लिए बिहार के कैमूर में एक फुट-ओवरब्रिज को अस्थायी रूप से हटाने की बात सामने आई है. चंदौली में भी इसे आगे निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल किया गया.
Balrampur Chini Mills Limited एक लिस्टेड कंपनी है. इसलिए इसे किसी एक व्यक्ति की निजी चीनी मिल के तौर पर नहीं देखा जा सकता. कंपनी का स्वामित्व शेयरधारकों और प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी के जरिए तय होता है.




