बंगाल विजय का फुटबॉल कनेक्शन, 2021 में ममता तो 2026 में मोदी का लगा गोल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तस्वीर जैसे-जैसे साफ हो रही है, सियासी पिच पर एक दिलचस्प 'फुटबॉल कनेक्शन' भी चर्चा में आ गया है. इस बार बीजेपी ने बहुतम का आंकड़ा पार करते हुए करीब 200 सीटों के करीब है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तस्वीर जैसे-जैसे साफ हो रही है, सियासी पिच पर एक दिलचस्प 'फुटबॉल कनेक्शन' भी चर्चा में आ गया है. इस बार बीजेपी ने बहुतम का आंकड़ा पार करते हुए करीब 200 सीटों के करीब है. ऐसे में इस बार के इस चुनावी मुकाबले में फुटबॉल का कनेक्शन भी सामने आया है जैसे कि साल 2021 में ममता ने दूसरे चरण के वोटिंग के दौरान फुटबॉल खेला और साल 2026 के चुनावी वोटिंग के दौरान पीएम मोदी फुटबॉल खेला है जिसके बाद अब बंगाल का रंग भगवा होता दिख रहा है.
2021 में ममता का फुटबॉल स्टाइल
2021 के चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हावड़ा की एक रैली में व्हीलचेयर पर बैठकर फुटबॉल उछालकर प्रचार का अलग अंदाज दिखाया था. उस समय यह नजारा और उनका रिएक्शन काफी वायरल हुआ था और इसे उनके 'आक्रामक चुनावी मूड' के रूप में देखा गया.
2026 में मोदी का मैदान कनेक्शन
साल 2026 के चुनावी रण में प्रचार खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का भी अलग अंदाज सामने आया. सिक्किम दौरे के दौरान उन्होंने युवाओं के साथ मैदान में उतरकर फुटबॉल खेला, जिसे 'फुटबॉल डिप्लोमेसी' कहा जा रहा है.
2021 में कैसा था किसका हाल?
साल 2021 में जब ममता दीदी ने फुटबॉल खेलने की खूब चर्चा हुई जिसके बाद इस दौरान यहां पर ममता की सरकार बनी और 215 सीट आई थी और भाजपा की 77 सीट. साल 2026 के चुनावी रण में पीएम मोदी ने फुटबॉल खेलने के कनेक्शन के बाद अब बंगाल में भाजपा का दबदबा नजर आता दिख रहा है. तो वहीं वोटों कि गिनती जाती है फिलहाल बंगाल में भाजपा 200 सीटों के करीब है तो वहीं टीएमसी 100 पर ही निपटती हुई नजर आ रही है. हालांकि गिनती अभी जारी है.
बंगाल में फुटबॉल का कितना महत्व?
पश्चिम बंगाल में फुटबॉल केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह यहां की सामाजिक पहचान, इतिहास और जनभावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ एक जुनून है. यही वजह है कि इसे अक्सर 'भारतीय फुटबॉल की मक्का' कहा जाता है. बंगाल में फुटबॉल का इतिहास एक सदी से भी पुराना है. औपनिवेशिक दौर में यह खेल ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध और आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया था. 1911 में Mohun Bagan AC की ऐतिहासिक जीत ने भारतीय राष्ट्रीयता की भावना को नई ऊर्जा दी और इसे आज भी गौरव के रूप में याद किया जाता है.
कोलकाता डर्बी और जुनून की हद
बंगाल की फुटबॉल पहचान को जिन चीजों ने सबसे ज्यादा आकार दिया, उनमें सबसे बड़ा नाम है कोलकाता डर्बी- East Bengal FC और मोहन बागान के बीच का मुकाबला. यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भावनाओं का टकराव है, जिसे दुनिया की सबसे तीव्र क्लब प्रतिद्वंद्विताओं में गिना जाता है. इसी जुनून की वजह से यहां फुटबॉल स्टेडियम हमेशा खचाखच भरे रहते हैं.
क्रिकेट से भी बड़ा क्रेज
- पश्चिम बंगाल में फुटबॉल का क्रेज कई बार क्रिकेट से भी ज्यादा देखा जाता है.
- गली-मोहल्लों में रोज़ाना मैच
- ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देशों की टीमों के लिए दीवानगी
- यूरोपियन क्लब फुटबॉल का भारी फैन बेस
- यहां फुटबॉल एक खेल नहीं, बल्कि जीवनशैली बन चुका है.
राजनीति में भी फुटबॉल की एंट्री
बंगाल की राजनीति में भी फुटबॉल का प्रभाव साफ दिखता है. चुनावी नारों और जनसंपर्क अभियानों में “खेला होबे” जैसे नारे इसे राजनीतिक संवाद का हिस्सा बना देते हैं. ईस्ट बंगाल और मोहन बागान की प्रतिद्वंद्विता केवल खेल तक सीमित नहीं है. यह विभाजन के बाद की सामाजिक पहचान, शरणार्थी समुदायों की भावनाओं और बंगाल की सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाती है.




