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अतुल सुभाष की सैलरी थी 84 हजार रुपये, तो पत्नी को कितना मिलता था गुजारा भत्ता?

अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद न्याय पालिका को दोषी ठहराया जा रहा है. इस मामले में अब कई नई चीजें सामने आ रही हैं. अतुल AI इंजीनियर थे, जो हर महीने 84 हजार रुपये कमाते थे. अब ऐसे में सवाल बनता है कि उनकी पत्नी को कोर्ट ने गुजारा भत्ता के लिए कितना पैसा देने का आदेश दिया था?

अतुल सुभाष की सैलरी थी 84 हजार रुपये, तो पत्नी को कितना मिलता था गुजारा भत्ता?
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( Image Source:  Instagram/thetherapistmommy )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 12 Dec 2024 4:07 PM IST

बेंगलुरु के अतुल सुभाष की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. इस मामले ने चर्चा को जन्म दिया है, जिसमें कानूनी प्रावधानों के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई है. खासतौर पर सेक्शन 498 (ए) को लेकर. अतुल की मौत ने देश भर के उन मामलों को फिर से हवा दे दी है, जिसमें पुरुष और उनके परिवार को इस एक्ट के तहत कथित तौर गलत आरोप लगाकर फंसाया जाता है.

दूसरी ओर फैमिली कोर्ट में अतुल सुभाष की तरफ से वकील दिनेश मिश्रा ने कहा कि अतुल ने न्याय प्रणाली को अपने अनुभव के बारे में सही-सही बताया था. उनके इस कदम के लिए न तो कोर्ट और न ही जस्टिस जिम्मेदार थे. वकील के अनुसार, कोर्ट का फैसला अतुल की आत्महत्या का कारण नहीं था. बता दें कि अतुल की सैलरी 84 हजार थी. ऐसे में चलिए जानते हैं कि उनकी पत्नी को कितना गुजारा-भत्ता मिलता था?

बच्चे के लिए था आदेश

दिनेश मिश्रा ने इस मामले में कहा कि बेंगलुरु में अतुल सुभाष की महीने के सैलरी लगभग 84,000 रुपये थी. जहां जुलाई में जौनपुर की फैमिली कोर्ट ने सुभाष के बच्चे के लिए 40,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था. साथ ही, वकील ने यह भी बताया कि यह आदेश बच्चे के खर्चों के लिए था. इसमें पत्नी से जुड़ा कोई एक्ट शामिल नहीं था.

इसके आगे उन्होंने कहा कि 'अतुल ने शायद सोचा होगा कि 40,000 रुपये बहुत ज्यादा हैं.' यह रकम देने के बाद भी उनके पास अपना गुजारा चलाने के लिए 44,000 रुपये बचे थे. अगर उन्हें यह रकम ज्यादा लग रही थी, तो उन्हें इसे चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट जाना चाहिए था".

न्याय प्रणाली को नहीं ठहराया जा सकता जिम्मेदार

इसके आगे उन्होंने बताया कि क्योंकि सुभाष की पत्नी अच्छी कमाई करती है. इसलिए कोर्ट ने उनके गुजारे के लिए भुगतान करने का आदेश नहीं दिया था. इसके आगे वकील ने बताया कि किसी व्यक्ति के अपनी जिंदगी को खत्म करने के फैसले के लिए न्याय प्रणाली को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कोर्ट ने अपने फैसले तक पहुंचने में सही प्रोसीजर फॉलो किया है. इसलिए किसी भी तरह का कोई गलत काम नहीं हुआ है.

दिनेश मिश्रा ने कहा कि अगर अतुल के परिवार के सदस्य उनसे बात करना चाहते हैं, तो वे इस मामले पर आगे कानूनी सलाह देने के लिए तैयार हैं. वकील ने कहा कि जो कोई भी मानता है कि कोर्ट का आदेश गलत था, उसे अपील करने का अधिकार है.


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