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30 हजार से शुरुआत, छठे साल में अग्निवीरों को कितनी मिलेगी सैलरी? परमानेंट हुए तो कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी, पूरा गणित

अग्निवीरों की सैलरी 30 हजार से बढ़कर छठे साल में कितनी होगी? दो साल के सेवा विस्तार और नियमित सैनिक बनने पर मिलने वाले वेतन व सुविधाओं का पूरा गणित जानें.

30 हजार से शुरुआत, छठे साल में अग्निवीरों को कितनी मिलेगी सैलरी? परमानेंट हुए तो कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी, पूरा गणित
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भारतीय सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अग्निवीर योजना में बड़ा बदलाव किया गया है. अब चार साल की सेवा पूरी होने के बाद बाहर होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल और सेना में काम करने का मौका मिलेगा. इससे उनकी कमाई बढ़ेगी और नियमित सैनिक बनने का एक अतिरिक्त रास्ता भी खुलेगा. अग्निवीरों की पहले साल की सैलरी 30 हजार रुपये से शुरू होती है, जो छठे साल में बढ़कर 47,500 रुपये मासिक पैकेज तक पहुंच जाएगी. लेकिन इस रकम में से कितना पैसा हर महीने हाथ में आएगा, सेवा निधि में कितनी राशि जमा होगी और नियमित सैनिक बनने के बाद कौन-कौन से लाभ मिलेंगे? कर्नल अमरदीप त्यागी के हवाले से समझें पूरी बात.

भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल अमरदीप त्यागी ने भी नई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जब सरकार अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनाने का रास्ता खोल रही है तो फिर दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल और उसके बाद चयन की शर्त लगाने की जरूरत क्यों है? यह केवल नौकरी और वेतन का मामला नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा से भी जुड़ा है.

कर्नल त्यागी के मुताबिक सेना के जवानों के भविष्य को लेकर सरकार का नजरिया साफ होना चाहिए. उन्हें मजदूरों की तरह नहीं देखना चाहिए. उनकी तनख्वाह और पेंशन युद्ध जैसे मुश्किल हालात में देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के सम्मान और सुरक्षा का आधार हैं. खास कर उस समय में जब चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन भारत को युद्ध में जबरन धकेल देते हैं.

अग्निवीरों की भर्ती के बाद पहले चार साल में कितनी मिलती है सैलरी?

उन्होंने आगे कहा कि जहां तक सेलरी का सवाल है तो अग्निवीरों को पहले साल 30 हजार रुपये का मासिक वेतन पैकेज मिलता है. इसमें से 70 फीसदी यानी 21 हजार रुपये हर महीने उनके खाते में आते हैं, जबकि बाकी 9 हजार रुपये सेवा निधि में जमा होते हैं. सरकार भी इसमें अग्निवीर के बराबर योगदान करती है. दूसरे साल मासिक पैकेज बढ़कर 33 हजार रुपये हो जाता है. इसमें 23,100 रुपये हाथ में मिलते हैं और 9,900 रुपये सेवा निधि में जमा होते हैं. तीसरे साल पैकेज 36,500 रुपये होता है. इस दौरान 25,550 रुपये हाथ में आते हैं और 10,950 रुपये जमा होते हैं. चौथे साल वेतन बढ़कर 40 हजार रुपये हो जाता है. इसमें 28 हजार रुपये अग्निवीर को मिलते हैं और 12 हजार रुपये सेवा निधि में जमा होते हैं.

4 साल की सेवा पर अग्निवीरों को कितना पैसा मिलेगा?

चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर अग्निवीरों को सेवा निधि की एकमुश्त रकम दी जाती है. इसमें अग्निवीर और सरकार, दोनों की ओर से जमा की गई राशि शामिल होती है. चार साल के दौरान दोनों पक्षों का कुल योगदान करीब 10.04 लाख रुपये होता है. इस पर मिलने वाला ब्याज जोड़ने के बाद अग्निवीरों को करीब 11.71 लाख रुपये मिल सकते हैं. यह रकम सेवा पूरी होने पर दी जाती है और आयकर से मुक्त होती है.

पांचवें और छठे साल में कितनी होगी सैलरी?

नई व्यवस्था के तहत चार साल की सेवा पूरी करने के बाद दो साल अतिरिक्त काम करने वाले अग्निवीरों का वेतन भी बढ़ेगा. पांचवें साल उन्हें हर महीने 43,500 रुपये का वेतन पैकेज मिलेगा. वहीं, छठे साल यह रकम बढ़कर 47,500 रुपये हो जाएगी. इसके अलावा उन्हें नियमानुसार लागू भत्ते भी मिलेंगे. पहले साल के 30 हजार रुपये के मुकाबले छठे साल का मासिक पैकेज 17,500 रुपये अधिक होगा. यानी शुरुआती वेतन की तुलना में करीब 58.3 फीसदी की बढ़ोतरी होगी.

दो साल के अतिरिक्त कार्यकाल में सेवा निधि का हिसाब भी बदलेगा. नई व्यवस्था में सरकार की ओर से सेवा निधि में योगदान बढ़ाने का प्रावधान किया गया है. घोषित जानकारी के मुताबिक, इस दौरान सरकार का योगदान अग्निवीर के सेवा निधि योगदान का 70 फीसदी होगा. दो साल की अतिरिक्त सेवा पूरी होने पर अग्निवीरों को ब्याज से अलग 10.92 लाख रुपये की सेवा निधि मिलेगी. यह रकम भी आयकर से मुक्त होगी.

स्थायी सैनिक बनने के बाद कितनी बढ़ जाएगी सैलरी, क्या मिलेंगी सुविधाएं?

अग्निवीरों के नियमित सैनिक बनने के बाद उनकी सैलरी का हिसाब अग्निपथ योजना से अलग होगा. उन्हें सेना में जिस रैंक और पद पर शामिल किया जाएगा, उसी के मुताबिक वेतनमान लागू होगा. इसमें मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता और पद व तैनाती के अनुसार मिलने वाले दूसरे सैन्य भत्ते शामिल होंगे. इसलिए सभी अग्निवीरों के लिए एक जैसी सैलरी बताना सही नहीं होगा. उनकी मासिक कमाई संबंधित रैंक और लागू सेवा नियमों पर निर्भर करेगी.

नियमित कैडर में शामिल होने के बाद जवानों को सैन्य सेवा से जुड़ी चिकित्सा सुविधाएं, अवकाश, आवास और अन्य कल्याणकारी सुविधाएं मिलेंगी. पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे लाभ भी नियमित सैनिकों पर लागू सेवा शर्तों के अनुसार दिए जाएंगे. हालांकि, इनका लाभ पाने के लिए निर्धारित अर्हकारी सेवा और दूसरे नियम पूरे करना जरूरी होगा. केवल छह साल तक अग्निवीर के रूप में सेवा करने से पेंशन का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाएगा.

4 साल और 6 साल बाद चयनित होने वालों में क्या होगा अंतर?

नई व्यवस्था में नियमित सैनिक बनने के दो रास्ते होंगे. पहले रास्ते के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले 25 फीसदी योग्य अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल किया जाएगा. दूसरे रास्ते में बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलेगा. छह साल पूरे होने के बाद इनमें से नियमित सैनिक बनने के इच्छुक अग्निवीरों का चयन तय मानकों के आधार पर किया जाएगा.

इन दोनों समूहों की वरिष्ठता में भी अंतर रहेगा. चार साल की सेवा के बाद नियमित हुए अग्निवीरों को छह साल बाद नियमित होने वाले जवानों से वरिष्ठ माना जाएगा. यानी एक ही भर्ती समूह से सेना में आए जवानों की वरिष्ठता अलग-अलग हो सकती है. छह साल की अग्निवीर सेवा को नियमित सैनिक की कुल सेवा और पेंशन योग्य अवधि में किस तरह जोड़ा जाएगा, यह संबंधित सेवा नियमों पर निर्भर करेगा.

कब लागू हुई थी अग्निवीर योजना और अब क्या बदल गया?

केंद्र सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना लागू की थी. इसके तहत 17.5 से 21 साल की उम्र के युवाओं को तीनों सेनाओं में चार साल के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती करने की व्यवस्था शुरू की गई थी. चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलता था, जबकि बाकी 75 फीसदी को सेवा से बाहर होना पड़ता था.

अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए शेष 75 फीसदी अग्निवीरों के लिए दो साल की अतिरिक्त सेवा का रास्ता खोला है. इस तरह उनका कुल कार्यकाल छह साल हो सकेगा और इसके बाद उन्हें भी निर्धारित चयन प्रक्रिया के जरिए नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा. यानी पहले जहां चार साल बाद सेवा समाप्त होने का प्रावधान था, वहीं अब छह साल तक सेना में काम करने और नियमित कैडर में शामिल होने का एक अतिरिक्त मौका मिल सकेगा.

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