अधिकारी परिवार की राजनीति बंगाल का नया ‘पावर हाउस’ कैसे? क्यों बढ़ा दबदबा
शुभेंदु, सिसिर, दिव्येंदु और सौमेंदु अधिकारी ने कैसे पूर्व मेदिनीपुर से बंगाल की राजनीति में मजबूत नेटवर्क बनाकर खुद को पावर हाउस बनाया.
सीएम शुभेंदु अधिकारी का नाम आज पश्चिम बंगाल की राजनीति में की राजनीति में सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है, लेकिन उनकी ताकत सिर्फ व्यक्तिगत राजनीति तक सीमित नहीं है. पिछले दो दशकों में अधिकारी परिवार ने पूर्व मेदिनीपुर और आसपास के इलाकों में ऐसा राजनीतिक नेटवर्क खड़ा किया, जिसने उन्हें बंगाल की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक फैमिली में शामिल कर दिया. कभी यह परिवार तृणमूल कांग्रेस का मजबूत स्तंभ माना जाता था, लेकिन अब वही परिवार भारतीय जनता पार्टी के जरिए ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. यहां तक शुभेंदु ने ना केवल ममता को सत्ता से बाहर किया, बल्कि अब टीएमसी के टूटने की खबरें भी सामने आने लगी हैं. समझें अधिकारी परिवार कैसे बन गया बंगाल का पावर हाउस.
सिसिर अधिकारी: जिस नेता ने रखी परिवार की राजनीतिक नींव
Sisir Adhikari को अधिकारी परिवार की राजनीति का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है. उन्होंने कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की, लेकिन बाद में All India Trinamool Congress के साथ जुड़कर पूर्व मेदिनीपुर में मजबूत पकड़ बनाई. ग्रामीण बंगाल की राजनीति, पंचायत नेटवर्क और स्थानीय संगठन पर उनकी पकड़ इतनी मजबूत रही कि कांथी क्षेत्र लंबे समय तक अधिकारी परिवार का गढ़ माना जाने लगा.
सिसिर अधिकारी 2009 में पहली बार Kanthi लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. इसके बाद 2014 और 2019 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की. लगातार तीन बार सांसद बनने से उनका कद सिर्फ जिले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य स्तर पर भी बढ़ा. संगठन और कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना गया.
शुभेंदु अधिकारी: कभी ममता के भरोसेमंद, अब बीजेपी के CM
शुभेंदु अधिकारी परिवार का सबसे बड़ा और आक्रामक राजनीतिक चेहरा बनकर उभरे. नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों के नेता के रूप में पहचान बनाई. TMC में रहते हुए वह ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे. लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व से टकराव के बाद BJP में चले गए. 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने खुद ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हराकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश दिया. आज बंगाल में BJP के सीएम हैं.
शुभेंदु अधिकारी अपने सियासी करियर में कई बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव जीते हैं. वह पहली बार 2006 में कांथ्ज्ञी दक्षिण सीट से विधायक बने. इसके बाद 2011, 2016, 2021 और 2026 में लगातार Nandigram से विधायक चुने गए. 2021 का चुनाव सबसे चर्चित रहा, क्योंकि उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था.
लोकसभा में वह पहली बार 2009 में Tamluk से सांसद बने. 2014 में भी इसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की. उस समय वह तृणमूल कांग्रेस में थे. बाद में राज्य राजनीति में सक्रिय भूमिका के लिए उन्होंने विधानसभा की राह चुनी और बंगाल सरकार में मंत्री भी रहे. 2020 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक पहचान और ज्यादा आक्रामक हिंदुत्ववादी नेता के रूप में बनी.
दिव्येंदु अधिकारी: शांत छवि लेकिन मजबूत राजनीतिक पकड़
Dibyendu Adhikari अधिकारी परिवार की दूसरी पीढ़ी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. उनकी राजनीति अपेक्षाकृत शांत लेकिन रणनीतिक मानी जाती है. परिवार के भीतर उन्हें बैकएंड मैनेजमेंट और चुनावी रणनीति संभालने वाला नेता माना जाता है. पूर्व मेदिनीपुर में संगठन और स्थानीय समीकरणों पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है.
दिव्येंदु अधिकारी 2019 के लोकसभा चुनाव में Tamluk सीट से सांसद चुने गए. उन्होंने TMC के टिकट पर जीत दर्ज की थी. इस जीत के बाद अधिकारी परिवार का प्रभाव कांथी से आगे बढ़कर तमलुक और आसपास के इलाकों तक मजबूत हो गया.
सौमेंदु अधिकारी: नगरपालिका राजनीति से उभरा चेहरा
Soumendu Adhikari ने स्थानीय निकाय राजनीति के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. उन्होंने नगरपालिका स्तर पर संगठन मजबूत करने और स्थानीय कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम किया. परिवार की जमीनी पकड़ बनाए रखने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है.
सौमेंदु अधिकारी Contai नगरपालिका के चेयरमैन भी रहे. बाद में उन्होंने TMC छोड़कर BJP का दामन थामा. BJP में आने के बाद उन्होंने पूर्व मेदिनीपुर में संगठन विस्तार और कार्यकर्ता नेटवर्क मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई.
पूर्व मेदिनीपुर में कैसे बना मजबूत नेटवर्क
अधिकारी परिवार की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत जमीनी नेटवर्क माना जाता है. पंचायत, नगरपालिका, सहकारी संस्थाओं और स्थानीय संगठनों के जरिए परिवार ने वर्षों तक अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की. यही वजह है कि पूर्व मेदिनीपुर में चुनावी राजनीति अक्सर अधिकारी परिवार के प्रभाव के आसपास घूमती दिखाई देती है.
पंचायत से संसद तक फैला प्रभाव
अधिकारी परिवार का असर सिर्फ विधानसभा या लोकसभा तक सीमित नहीं रहा. पंचायत राजनीति से लेकर संसद तक परिवार की मौजूदगी ने उन्हें बंगाल की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक फैमिली में शामिल कर दिया. स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ ने उन्हें लगातार राजनीतिक ताकत दी.
कैसे बदली परिवार की राजनीतिक दिशा
एक समय अधिकारी परिवार All India Trinamool Congress का सबसे भरोसेमंद राजनीतिक परिवार माना जाता था. लेकिन Suvendu Adhikari के BJP में जाने के बाद परिवार की राजनीतिक दिशा पूरी तरह बदल गई. इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भी धीरे-धीरे BJP के करीब आते गए.
बंगाल का नया ‘पावर हाउस’ क्यों?
आज बंगाल की राजनीति में अधिकारी परिवार को नया “पावर हाउस” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनके पास चुनावी ताकत के साथ मजबूत संगठन, सामाजिक प्रभाव और क्षेत्रीय नेटवर्क भी है. पूर्व मेदिनीपुर में परिवार की पकड़ इतनी मजबूत मानी जाती है कि कई राजनीतिक विश्लेषक इसे बंगाल की सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय राजनीतिक फैमिली मानते हैं.




