'लगान' के देवा और 'गजनी' के खतरनाक विलेन प्रदीप रावत का निधन, 5 साल ब्लड कैंसर से लड़ी जंग, फिल्म इंडस्ट्री में शोक
'लगान' और 'गजनी' से मशहूर अभिनेता प्रदीप रावत का 73 वर्ष की उम्र में निधन. 5 साल तक ब्लड कैंसर से जूझते रहे. जानिए उनका फिल्मी सफर और आखिरी दिनों की पूरी कहानी.
फिल्मी दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में अपने दमदार विलेन किरदारों के लिए मशहूर अभिनेता प्रदीप रावत अब इस दुनिया में नहीं रहे. 73 वर्षीय अभिनेता ने मंगलवार शाम महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित एक अस्पताल में अंतिम सांस ली.
वह पिछले करीब पांच वर्षों से ब्लड कैंसर (रक्त कैंसर) से जूझ रहे थे. इलाज के दौरान उनकी तबीयत में कुछ समय के लिए सुधार भी हुआ था, लेकिन कुछ महीने पहले बीमारी दोबारा लौट आई और आखिरकार जिंदगी की यह लंबी लड़ाई हार गए.
उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई. सोशल मीडिया पर अभिनेता को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया. कई कलाकारों ने उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए उन्हें भारतीय सिनेमा का शानदार कलाकार बताया.
5 साल तक बीमारी से लड़े, आखिरकार जिंदगी की जंग हार गए
प्रदीप रावत के बिजनेस मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने उनके निधन की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि अभिनेता पिछले कुछ महीनों से अस्पताल में भर्ती थे. शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ था, लेकिन कैंसर दोबारा फैलने के बाद उनकी सेहत लगातार बिगड़ती चली गई. पिछले कुछ दिनों में उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और मंगलवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि बुधवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. हालांकि परिवार की ओर से अभी अंतिम संस्कार को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है.
यशपाल शर्मा ने दी निधन की जानकारी
'लगान' में उनके साथ काम कर चुके अभिनेता यशपाल शर्मा ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए सबसे पहले इस दुखद खबर की पुष्टि की. उन्होंने लिखा कि 'हमारे गजनी... हमारे लगान के देवा प्रदीप रावत अब हमारे बीच नहीं रहे. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे." इसके बाद सोशल मीडिया पर हजारों प्रशंसकों ने अभिनेता को श्रद्धांजलि अर्पित की.
'लगान' और 'गजनी' से मिली अलग पहचान
प्रदीप रावत ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता 'लगान' में देवा सिंह सोढ़ी और 'गजनी' में खतरनाक विलेन धर्मात्मा के किरदार से मिली. 'गजनी' के तमिल संस्करण में उन्होंने यह भूमिका निभाई थी और बाद में हिंदी रीमेक में भी उसी किरदार को दोहराया. उनकी दमदार आवाज, सख्त व्यक्तित्व और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद विलेन कलाकारों में शामिल कर दिया.
महाभारत से शुरू हुआ था अभिनय का सफर
21 जनवरी 1952 को जन्मे प्रदीप रावत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा के मशहूर टीवी धारावाहिक 'महाभारत' से की थी. इस सीरियल में उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया था, जिसने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई.इसके बाद उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे हिंदी के साथ-साथ दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बना ली.
सिर्फ बॉलीवुड नहीं, कई भाषाओं की फिल्मों में छोड़ी छाप
प्रदीप रावत उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने कई भारतीय भाषाओं की फिल्मों में काम किया. उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी फिल्मों में अभिनय किया. तेलुगु फिल्म 'Sye' से उन्होंने वहां के दर्शकों के बीच पहचान बनाई. इसके अलावा उन्होंने कन्नड़ फिल्म 'Parodi', मलयालम फिल्म 'China Town', बंगाली फिल्म 'Hero 420' और भोजपुरी फिल्म 'Crack Fighter' में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई.
खलनायक के किरदारों से बनाई अलग पहचान
प्रदीप रावत को अक्सर फिल्मों में नकारात्मक किरदार निभाने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने हर भूमिका में ऐसा प्रभाव छोड़ा कि दर्शक उन्हें लंबे समय तक याद रखते थे. चाहे निर्दयी गैंगस्टर हो, ताकतवर गुंडा या राजनीतिक अपराधी, उन्होंने हर किरदार को अपनी अलग शैली से जीवंत बनाया. यही वजह रही कि बॉलीवुड से लेकर दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री तक उन्हें एक भरोसेमंद चरित्र अभिनेता और दमदार विलेन के रूप में सम्मान मिला.
फिल्म इंडस्ट्री ने खोया एक मजबूत कलाकार
प्रदीप रावत का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है. उन्होंने चार दशकों से अधिक लंबे करियर में दर्जनों यादगार किरदार निभाए और अपनी अभिनय क्षमता से अलग पहचान बनाई. आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन 'लगान' के देवा, 'गजनी' के धर्मात्मा और 'महाभारत' के अश्वत्थामा के रूप में उनका अभिनय हमेशा दर्शकों की यादों में जीवित रहेगा.




