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The Kerala Story 2 : इमोशनल मैनिपुलेशन, लव-जिहाद के बीच फंसी क्या है 3 लड़कियों की कहानी? जानें फिल्म का कलेक्शन

'द केरल स्टोरी 2' रिलीज से पहले कानूनी और राजनीतिक विवादों में घिरी रही, लेकिन थिएटर्स में आते ही चर्चा का केंद्र बन गई. पहले दिन सुस्त ओपनिंग के बाद दूसरे दिन 520% उछाल ने बॉक्स ऑफिस पर हलचल.

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( Image Source:  IMDB )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय8 Mins Read

Published on: 1 March 2026 11:28 AM

The Kerala Story 2: एक विवादित फिल्म की पूरी कहानी 2026 की शुरुआत में बॉलीवुड की सबसे ज्यादा चर्चित और विवादास्पद फिल्मों में से एक बनी 'द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड'. यह 2023 में रिलीज हुई पहली फिल्म 'द केरल स्टोरी' की सीक्वल है, जिसने 'लव जिहाद' और जबरन धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बात की थी. अब इस दूसरी फिल्म ने भी रिलीज से पहले ही तहलका मचा दिया.

फिल्म की कहानी मुख्य रूप से जबरन धर्म परिवर्तन, लव जिहाद और ऐसी साजिशों पर आधारित है, जो पूरे भारत में फैली हुई बताई गई हैं. पहले पार्ट की तरह यह भी 'सच्ची घटनाओं' से प्रेरित होने का दावा करती है, लेकिन इसमें केरल से आगे बढ़कर देशभर की घटनाओं को दिखाया गया है. इसलिए इसका पूरा नाम 'द केरल स्टोरी 2 गोज़ बियॉन्ड' रखा गया है.

निर्माता और टीम कौन है?

फिल्म के निर्माता हैं विपुल अमृतलाल शाह, जो पहली फिल्म के भी प्रोड्यूसर थे. निर्देशक कमाख्या नारायण सिंह हैं. मुख्य कलाकारों में उल्का गुप्ता, अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा जैसे नाम शामिल हैं. फिल्म हिंदी में बनी है और इसे UA16+ सर्टिफिकेट मिला है.

रिलीज से पहले क्या-क्या विवाद हुए?

फिल्म का ट्रेलर और टीजर आने के बाद ही विरोध शुरू हो गया. कई लोगों ने इसे इस्लाम विरोधी, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला और झूठी कहानियां फैलाने वाला बताया. केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने भी इसे राज्य की सेक्युलर परंपरा के खिलाफ बताया. सोशल मीडिया पर प्रोटेस्ट, हैशटैग कैंपेन और यहां तक कि अनऑफिशियल बैन की बातें होने लगीं. सबसे बड़ा झटका लगा जब केरल हाई कोर्ट ने 26 फरवरी 2026 को फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि फिल्म का कंटेंट सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ सकता है और CBFC (सेंसर बोर्ड) ने इसे ठीक से जांचा नहीं.

पिटीशन करने वालों ने दावा किया कि यह केरल और एक खास समुदाय को बदनाम करती है. लेकिन निर्माताओं ने तुरंत अपील की. अगले ही दिन यानी 27 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने रोक हटा दी और फिल्म को रिलीज की हरी झंडी मिल गई. विपुल शाह ने कहा, 'हम केरल या किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं. हम अपराधियों और गलत कामों के खिलाफ हैं. केरल भगवान की भूमि है, हम बस सच दिखा रहे हैं ताकि लोग जागरूक हों.'

रिलीज के बाद क्या हुआ?

फिल्म 27 फरवरी 2026 को थिएटर्स में आई Sacnilk के अनुसार, फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोस बियॉन्ड' ने पहले दिन (शुक्रवार) केवल 75 लाख रुपये (नेट) की मामूली कमाई की, जो रिलीज में देरी और सीमित शो के कारण थी. दूसरे दिन (शनिवार) इसमें 520% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई और फिल्म ने 4.65 करोड़ रुपये (नेट) कमाए. इससे इसका घरेलू टोटल कलेक्शन 5.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. शनिवार को हिंदी सिनेमाघरों में फिल्म की औसत ऑक्यूपेंसी 12.20% रही. शो-वार ब्रेकडाउन इस प्रकार था:

  • सुबह के शो: 6.45%
  • दोपहर के शो: 11.88%
  • शाम के शो: 11.42%
  • रात के शो: 19.05% (सबसे अधिक)

रीजनल परफॉरमेंस में दिल्ली-एनसीआर में 806 शो हुए और ऑक्यूपेंसी 10.25% रही, जबकि मुंबई में 770 शो के साथ ऑक्यूपेंसी 14.75% दर्ज की गई. वहीं केरल में विरोध प्रदर्शन हुए कुछ शहरों जैसे त्रिशूर और कोझिकोड में थिएटर्स ने शो रद्द कर दिए या बहुत कम दर्शक आए. दूसरे दिन 28 फरवरी कलेक्शन बढ़ा और फिल्म ने अच्छी कमाई की. पहले पार्ट 'द केरल स्टोरी' (2023) की तुलना में यह आंकड़े काफी कम हैं. मूल फिल्म ने पहले दिन 8.03 करोड़ रुपये की ओपनिंग की और दूसरे दिन 11 करोड़ रुपये कमाए थे. विवादों, व्यापक आलोचना और राजनीतिक बहस के बावजूद उसने वैश्विक स्तर पर 302 करोड़ रुपये का कुल बिजनेस किया.

दर्शकों की प्रतिक्रियाएं क्या हैं?

फिल्म देखने के बाद लोगों की राय बंटी हुई है. कुछ दर्शकों को यह बहुत प्रभावशाली लगी. एक यूजर ने लिखा कि फिल्म दिल को झकझोर देती है और यह एक चेतावनी की तरह है. एक महिला दर्शक ने कहा कि यह लोगों को जागरूक करती है और छिपी सच्चाई सामने लाती है. दूसरी तरफ कई लोगों ने इसे नापसंद किया. एक यूजर ने कहा कि फिल्म बेहद नाराज करने वाली है, इसमें हिंसा ज्यादा है और यह सिर्फ प्रोपेगेंडा लगती है. कुछ ने इसे इस्लाम विरोधी बताया और कहा कि यह आराम क्षेत्र से बाहर निकालकर डर फैलाती है. कुल मिलाकर, जो लोग पहले पार्ट को पसंद करते थे, वे इसे सपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन विरोध करने वाले इसे प्रोपेगैंडा कह रहे हैं.

क्या कहती है फिल्म की कहानी

द केरल स्टोरी 2: गोस बियॉन्ड' की कहानी मूल फिल्म की तरह ही लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के मुद्दे पर आधारित है, लेकिन इस बार यह केरल से आगे बढ़कर भारत के अलग-अलग राज्यों में फैली हुई दिखाई गई है. फिल्म तीन युवा हिंदू लड़कियों की समांतर कहानियां बताती है, जो परिवार की परंपराओं को चुनौती देकर प्यार के नाम पर रिश्तों में पड़ती हैं. लेकिन बाद में धोखे, नियंत्रण, जबरन कन्वर्जन और आजादी की हानि का शिकार हो जाती हैं.

सुरेखा (उल्का गुप्ता): कोच्चि (केरल) की एक प्रगतिशील, लिबरल लड़की जो UPSC की तैयारी कर रही है. उसे सलीम (एक शादीशुदा जर्नलिस्ट) से प्यार हो जाता है, जो खुद को उदार दिखाता है और वादा करता है कि वह उसे कभी धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं करेगा. लेकिन बाद में उसका असली चेहरा सामने आता है.

दिव्या (अदिति भाटिया): जोधपुर (राजस्थान) की एक युवा डांसर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, जो अपने कंजर्वेटिव परिवार की पाबंदियों से आजादी चाहती है. रशीद उसे शादी के बाद अपनी पैशन (डांस और रील्स बनाने) की आजादी देने का लालच देता है, लेकिन धोखा देता है.

नेहा (ऐश्वर्या ओझा): ग्वालियर (मध्य प्रदेश) की एक प्रतिभाशाली जैवलिन थ्रोअर एथलीट, जो स्पोर्ट्स में बड़ा नाम कमाना चाहती है. फैजान (जो अपनी असली पहचान छिपाता है) उसे बेहतरीन कोचिंग और सपोर्ट का वादा करके फंसाता है, लेकिन बाद में उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाती है (कुछ रिव्यूज में प्रॉस्टिट्यूशन तक की बात है).

ये तीनों कहानियां अलग-अलग शहरों में चलती हैं, लेकिन थीम एक ही है. प्यार के नाम पर इमोशनल मैनिपुलेशन, शादी के बाद सख्त धार्मिक नियम थोपना, आजादी छीनना और गंभीर परिणाम. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे ये लड़कियां धीरे-धीरे फंसती हैं और अंत में कानूनी या अन्य तरीकों से इस रैकेट को एक्सपोज करने की कोशिश करती हैं.

अंत में क्या कहें?

'द केरल स्टोरी 2' एक ऐसी फिल्म है जो बहस छेड़ने में कामयाब रही है. यह समाज में छिपे कुछ मुद्दों को उठाती है, लेकिन तरीका इतना तीखा है कि यह कई लोगों को असहज कर देती है. चाहे आप इसे पसंद करें या न करें, यह फिल्म 2026 की सबसे ज्यादा बात होने वाली फिल्मों में शुमार हो गई है. अगर आप संवेदनशील विषयों पर फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो इसे देखकर अपनी राय खुद बनाइए। लेकिन याद रखिए, फिल्में सच का एक नजरिया दिखाती हैं, पूरी सच्चाई हमेशा जांच-पड़ताल से ही पता चलती है.

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