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'ना' न कह पाने से Sanya Malhotra को होते थे पैनिक अटैक, इंडस्ट्री में 10 साल पूरे होने पर अपनाया नया मूलमंत्र

सान्या मल्होत्रा ने अपने 10 साल के करियर में ‘ना’ कहना सीखने को सबसे बड़ा सबक बताया. उन्होंने खुलासा किया कि शुरुआत में मना करने पर उन्हें पैनिक अटैक और गिल्ट महसूस होता था.

ना न कह पाने से Sanya Malhotra को होते थे पैनिक अटैक, इंडस्ट्री में 10 साल पूरे होने पर अपनाया नया मूलमंत्र
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( Image Source:  Instagram: sanyamalhotra_ )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Updated on: 20 April 2026 10:27 AM IST

इस साल सान्या मल्होत्रा (Sanya Malhotra) ने एक्टिंग के क्षेत्र में पूरे 10 साल पूरे कर लिए हैं. उन्होंने साल 2016 में आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 'दंगल' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. फिल्म में उन्होंने पहलवान बबीता कुमारी का रोल निभाया था. भले ही उनका स्क्रीन टाइम ज्यादा नहीं था, लेकिन सान्या ने अपने बेहतरीन एक्टिंग से सबका ध्यान खींच लिया. उसके बाद उन्होंने कई मध्यम बजट वाली फिल्मों में काम किया और कुछ कमर्शियल रूप से सफल फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई. छोटे-छोटे रोल में भी उन्होंने इतना अच्छा काम किया कि लोग उन्हें याद रखने लगे.

दिल्ली से आई सान्या मल्होत्रा ने शोबिज की इस चमक-दमक भरी दुनिया में बिना किसी बड़े सपोर्ट के, पूरी मेहनत और लगन से अपनी जगह बनाई है. लेकिन उनके इस सफर में सबसे मुश्किल हिस्सा यह सीखना था कि 'ना' कैसे कहा जाए. हाल ही में न्यूज़18 को दिए एक खास इंटरव्यू में सान्या ने बताया, 'मैंने बहुत धीरे-धीरे 'ना' कहना सीखा. अब तो मैं आसानी से मना कर देती हूं. लेकिन शुरुआत में यह मेरे लिए बहुत मुश्किल था. पहले जब मैं 'ना' कहने की कोशिश करती थी, तो मुझे पैनिक अटैक जैसा हो जाता था.'

उन्हें सबसे ज्यादा डर इस बात का लगता था कि अगर उन्होंने कोई काम मना कर दिया, तो आगे उन्हें काम के ऑफर ही कम मिलने लगेंगे. सान्या कहती हैं, 'मैं सोचती थी कि मैं कैसे मना कर सकती हूं? अगर मैंने मना कर दिया तो शायद मुझे उसके बाद कोई काम न मिले और अगर किसी तरह मना भी कर देती, तो महीनों तक मुझे गिल्ट फील होता रहता. मुझे सिर्फ काम न मिलने का डर नहीं था, बल्कि यह भी डर लगता था कि जिसने मुझे काम ऑफर किया है, उसे बुरा लग जाएगा.'

अब सान्या का अपना एक साफ-सुथरा मूलमंत्र है- हम्बल लेकिन स्ट्रांग रहना. वे कहती हैं, “आपको यह समझना चाहिए कि फिल्म डायरेक्टर का अपना विजन होता है. लेकिन एक एक्टर के तौर पर आप अपने सुझाव भी दे सकते हैं. कभी डायरेक्टर आपकी बात मान लेते हैं, तो कभी नहीं. लेकिन मैंने यह बहुत मुश्किल से सीखा है कि अगर मैं 'ना' नहीं कहूंगी, तो मैं सिर्फ दूसरे लोगों के सपने पूरे कर रही हूं. मैं अपनी जिंदगी नहीं जी रही हूं, बल्कि दूसरों के तरीके से जी रही हूं.'

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'टोस्टर' में काम करने वाली सान्या ने आगे कहा, 'मेरा मानना है कि अपनी बात कहने का एक सही तरीका होता है. अगर आप सम्मान के साथ और सही तरीके से अपनी बात रखते हैं, तो कोई समस्या नहीं होती. खासकर अगर कोई सीन स्टंट या खतरनाक हो, तो आपको बहुत सख्ती से मना करना चाहिए. इन चीजों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए.'

फिल्म 'टोस्टर' की सान्या की को-एक्ट्रेस अर्चना पूरन सिंह सेट पर हुई एक घटना को याद करते हुए बताती हैं, 'टोस्टर के शूटिंग के दौरान सान्या के साथ काम करते हुए मैंने उनसे एक बहुत अच्छी बात सीखी. एक शॉट में उन्हें स्कूटर चलाते हुए दिखाना था, लेकिन सान्या ने साफ-साफ मना कर दिया. मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन बाद में पता चला कि पहले स्कूटर चलाते समय उनका एक एक्सीडेंट हो चुका था. इसलिए उन्हें स्कूटर चलाने में कॉन्फिडेंस नहीं था.'

अर्चना आगे कहती हैं, 'क्योंकि उन्हें खुद पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्होंने अच्छे से मना कर दिया. वे खराब शॉट नहीं देना चाहती थीं. अंत में प्रोडक्शन टीम को एक बॉडी डबल बुलानी पड़ी. उस समय मैंने सान्या से बात की और उनके इस कॉन्फिडेंस और साफ मना करने के लिए उनकी तारीफ की. तब उन्होंने मुझे बताया कि यह सबक उन्होंने अपने करियर में बहुत मुश्किल से सीखा है.' सान्या मल्होत्रा का यह सफर दिखाता है कि सफलता सिर्फ अछि एक्टिंग करने से नहीं आती, बल्कि खुद को सम्मान देना, अपनी सीमाओं को समझना और सही समय पर 'ना' कहने की हिम्मत रखने से भी आती है.

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