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Mardaani 3 Full Story Explained: कैसे अम्मा का अंत कर 90 माइनर गर्ल्स को बचाती है शिवानी शिवाजी रॉय?

फिल्म ‘मर्दानी 3’ में रानी मुखर्जी एक बार फिर निडर पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में नजर आती हैं. यह कहानी बच्चों की तस्करी, भिखारी माफिया और अमीर-गरीब के भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दों पर आधारित है. एक राजदूत की बेटी और एक गरीब बच्ची के किडनैप से शुरू हुई जांच 90 से ज्यादा लड़कियों के गायब होने का खुलासा करती है.

Mardaani 3 Full Story Explained: कैसे अम्मा का अंत कर 90 माइनर गर्ल्स को बचाती है शिवानी शिवाजी रॉय?
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( Image Source:  Instagram: yrf )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 31 Jan 2026 9:36 AM

Mardaani 3 Full Story Explained: फिल्म 'मर्दानी 3' में रानी मुखर्जी फिर से अपनी मजबूत और निडर पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में नजर आती हैं. यह फिल्म एक नई कहानी लेकर आई है, जहां शिवानी एक बहुत बड़े और दिल दहला देने वाले अपराध की जांच करती हैं. फिल्म में दिखाया गया है कि समाज में गरीब और कमजोर लोग कैसे 'सस्ते' समझे जाते हैं और उनके बच्चों का जीवन बिकने लायक माना जाता है. शिवानी इस अन्याय के खिलाफ लड़ती हैं और अंत में न्याय दिलाती हैं.

कहानी शुरू होती है जब एक राजदूत (साहू) की इकलौती बेटी रूहानी का किडनैप हो जाता है. रूहानी उस समय अपनी देखभाल करने वाली की बेटी झिमली के साथ खेल रही थी. दोनों बच्चियों का साथ में किडनैप हो जाता है क्योंकि एक बच्ची अमीर और प्रभावशाली परिवार से है, इसलिए सरकार और पुलिस पर बहुत दबाव आता है. एनआईए (NIA) के जरिए शिवानी शिवाजी रॉय को इस केस की जिम्मेदारी दी जाती है.

अम्मा का जाल और मौत

जांच के दौरान पता चलता है कि यह कोई छोटी-मोटी किडनैपिंग नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ा गिरोह काम कर रहा है. इस गिरोह की मुखिया है अम्मा (मल्लिका प्रसाद), जो भिखारी माफिया चलाती है. अम्मा छोटी-छोटी लड़कियों का अपहरण करवाती है. इनमें से कुछ लड़कियों की जांच में कैंसर जैसी बीमारी पाई जाती है और उन्हें मार दिया जाता है. जो लड़कियां स्वस्थ रहती हैं, उन्हें अम्मा के जाल में फंसाकर रखा जाता है. कुल मिलाकर करीब 93 लड़कियां गायब हो चुकी थीं, लेकिन गरीब परिवार होने के कारण किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

शिवानी के साथी और चुनौतियां

शिवानी इस केस में दो बच्चों को बचाने की कोशिश करती हैं, लेकिन उन्हें दबाव दिया जाता है कि सिर्फ रूहानी (अमीर बच्ची) को प्राथमिकता दो, झिमली (गरीब बच्ची) को छोड़ दो. लेकिन शिवानी दोनों के लिए बराबर लड़ती हैं. इस दौरान शिवानी की मुलाकात फातिमा (जानकी बोडीवाला) से होती है. फातिमा एक नई कांस्टेबल है, जिसकी मां की मौत हो चुकी है. फातिमा ने किडनैपिंग के समय कुछ अपराधियों को देखा था, इसलिए वह शिवानी की मदद करती है. एक एनजीओ चलाने वाले रामानुजन (प्रजेश कश्यप) भी शिवानी के संपर्क में आते हैं. वह भिखारी माफिया से पीड़ित बच्चों को बचाने का काम करते दिखते हैं. लेकिन बाद में बड़ा ट्विस्ट आता है- रामानुजन ही असली मास्टरमाइंड निकलता है। वह दिखने में अच्छा और मददगार इंसान है, लेकिन अंदर से बहुत क्रूर है.

खतरा घर तक पहुंचता है

एक दिन जब शिवानी ड्यूटी पर होती हैं, अम्मा उनके घर पहुंच जाती है और शिवानी के पति डॉ. बिक्रम रॉय (जिस्सू सेनगुप्ता) को धमकी देती है. दोनों के बीच बहुत तीखी बहस होती है. शिवानी जल्दी से पति को अस्पताल पहुंचाती हैं. उसी बीच उन्हें रूहानी के ठिकाने का सुराग मिलता है. फातिमा और रामानुजन की मदद से वह बच्ची को बचाने की कोशिश करती हैं, लेकिन पूरी तरह सफल नहीं हो पाती.

पॉजिटिव और नेगेटिव का राज

फिल्म में 'पॉजिटिव' और 'नेगेटिव' शब्द कैंसर टेस्ट से जुड़े हैं. एक लड़की, जो अपनी आखिरी सांसें ले रही होती है, रामानुजन की साजिश का बड़ा सुराग देती है. शिवानी और फातिमा रामानुजन को फंसाने की कोशिश करती हैं और अम्मा के घर पर उसे पकड़ लेती हैं. शिवानी उसे बेरहमी से पीटती हैं, लेकिन उस पर असर नहीं होता. अम्मा और रामानुजन (जिसे अम्मा बेटे जैसा मानती थी) को गिरफ्तार कर लिया जाता है. लेकिन फातिमा की एक छोटी सी लापरवाही से एकमात्र चश्मदीद गवाह जेल में आत्महत्या कर लेता है. ऊपरी पुलिस अधिकारी रामानुजन का साथ देते हैं और उसे छोड़ देते हैं. शिवानी को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया जाता है.

अंत में शिवानी कैसे जीतती हैं?

शिवानी हार नहीं मानतीं सस्पेंड होने के बावजूद वह फातिमा की मदद से रामानुजन को फंसाने का प्लान बनाती हैं. फातिमा रामानुजन का भरोसा जीत लेती है और उसके साथ श्रीलंका (कोलंबो) की यात्रा पर जाती है. वहां रामानुजन अपना राज खोलता है वह लड़कियों पर एक दवा का प्रयोग करता था, जिससे कुछ में कैंसर हो जाता था और कुछ में नहीं. रूहानी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, इसलिए उसे मारना पड़ा. दूसरी तरफ शिवानी अम्मा को ढूंढती हैं और उससे मुठभेड़ होती है. मुठभेड़ में अम्मा की मौत हो जाती है फिर शिवानी और फातिमा मिलकर रामानुजन को धोखा देती हैं. वे सभी किडनैप लड़कियों (90 से ज्यादा) को सुरक्षित बाहर निकाल लेती हैं. अंत में शिवानी रामानुजन को सजा देने के लिए उसी दवा को उसके खून में इंजेक्ट कर देती हैं. वह अचेत हो जाता है, लेकिन मरता नहीं यानी वह जिंदा रहता है, लेकिन उसकी ताकत और कंट्रोल खत्म हो जाता है. शिवानी का निलंबन वापस ले लिया जाता है. उन्हें जल्द ही राष्ट्रपति पदक से सम्मानित करने की बात होती है. फिल्म के अंत में शिवानी समाज से अपील करती हैं कि क्लास डिस्क्रिमिनेशन यानी अमीर-गरीब का फर्क को खत्म किया जाए, ताकि ऐसे अपराध हमेशा के लिए रुक सकें.

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