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Ikkis X Review: रुला देगी आपको अरुण खेतरपाल की बायोपिक, अगस्त्य नंदा से ज्यादा Dharmendra के चर्चे

सिनेमाघरों में श्रीराम राघवन निर्देशित वॉर ड्रामा 'इक्कीस' रिलीज हो गई है. फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बसंतर की लड़ाई के दौरान शहीद हुए सबसे युवा परम वीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची कहानी पर आधारित है.

Ikkis X Review: रुला देगी आपको अरुण खेतरपाल की बायोपिक, अगस्त्य नंदा से ज्यादा Dharmendra के चर्चे
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( Image Source:  X: @smilingsword1 )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 1 Jan 2026 12:57 PM

Ikkis X Review: अगस्तय नंदा स्टारर इक्कीस सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. 'इक्कीस (Ikkis) एक इमोशनल वॉर ड्रामा और बायोपिक है, जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बसंतर की लड़ाई के दौरान शहीद हुए सबसे युवा परम वीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची कहानी पर आधारित है. फिल्म को निर्देशित किया है श्रीराम राघवन ने, जो अपनी फिल्मों जैसे 'अंधाधुन' और 'मैरी क्रिसमस' के लिए जाने जाते हैं.

यह फिल्म दिवंगत महान स्टार धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है, जो अरुण के पिता की भूमिका में हैं. मुख्य भूमिका में हैं अगस्त्य नंदा (अरुण खेत्रपाल), जयदीप अहलावत और डेब्यू कर रही सिमर भाटिया. फिल्म आज (1 जनवरी 2026) रिलीज हुई है और शुरुआती रिव्यूज काफी पॉजिटिव आ रहे हैं. अधिकांश क्रिटिक्स और दर्शकों ने इसे इमोशनल, हार्ट टचिंग और एंटी-वार फिल्म बताया है, जो जिंगोइज्म से दूर रहकर युद्ध के मानवीय नुकसान और बलिदान पर फोकस करती है.

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इमोशनल ट्रिब्यूट है 'इक्कीस'

धर्मेंद्र की आखिरी परफॉर्मेंस को दिल छू लेने वाली और ग्रेसफुल बताया गया है. यह फिल्म उनके लिए एक इमोशनल ट्रिब्यूट जैसी है. अगस्त्य नंदा अपनी डेब्यू फिल्म में अच्छे लगे हैं और युवा सैनिक की भूमिका में फिट बैठते हैं. लेकिन सरप्राइज पैकेज हैं जयदीप अहलावत, जिनकी एक्टिंग की खूब तारीफ हो रही है. श्रीराम राघवन ने कहानी को संवेदनशील तरीके से हैंडल किया है. फिल्म युद्ध के शोर से दूर, यादों और इमोशंस पर केंद्रित है. दूसरा हाफ और क्लाइमेक्स बेहद इमोशनल है, जो दर्शकों को रुला देता है. यह एक नॉन-जिंगोइस्टिक वार फिल्म है, जो मानवता और शांति की बात करती है. वीएफएक्स और बैकग्राउंड स्कोर प्रभावी हैं. पहला हाफ थोड़ा स्लो और असमान लग सकता है। रोमांटिक ट्रैक कुछ जगह बोझिल लगता है. गाने ज्यादा प्रभावी नहीं हैं, बैकग्राउंड म्यूजिक ही मुख्य है.

यूजर्स का रिएक्शन

एक ने कहा, 'धुरंधर का अगला शिकार! रिलीज़ के लगभग एक महीने बाद भी, यह फिल्म 'इक्कीस' को प्रति घंटे 7,000 से ज़्यादा टिकटों की बिक्री से मात दे रही है. रणवीर सिंह की फिल्म धूम मचा रही है! क्या 'राजा साहब' को भी धुरंधर के कहर का सामना करना पड़ेगा?.'

फिल्म क्रिटिक हेत तन्ना लिखते है,' यह एक औसत दर्जे की फिल्म है. लेकिन सबसे पहले, #धर्मेंद्र सर की विदाई फिल्म - धर्म जी, आप हर सिनेमा प्रेमी के दिल में हमेशा एक खास जगह रखेंगे. पूरी फिल्म में उनकी दमदार अपीयरेंस देखने लायक है. #इक्कीस में सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल के जीवन को दर्शाया गया है. इसे देखकर सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल को सलाम करने का मन करता है तो, #इक्कीस की बात करें तो, इससे देशभक्ति की भावना जागृत होनी चाहिए थी - लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हां, कुछ दृश्य वाकई अच्छे हैं और #श्रीरामराघवन ने इसे एक आदर्श बायोपिक के रूप में बनाया है, लेकिन पटकथा और संपादन मुझे प्रभावित नहीं कर पाए.'

एक ने कहा, 'धर्मेंद्र जी लास्ट मैसेज अपने लास्ट इंटरव्यू में, धर्मेंद्र जी ने गर्व और दृढ़ विश्वास के साथ फिल्म 'इक्कीस' के बारे में बात की. यह एक शानदार फिल्म है। हर किसी को इसे देखना चाहिए. ये सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि सिनेमा प्रेमियों के लिए एक महान हस्ती का लास्ट मैसेज था. उनकी आवाज भले ही मिट जाए, लेकिन उनकी विरासत अमर रहेगी.'

एक यूजर का कहना है- भाई #इक्कीस पूरी फिल्म ही नेपोस्टिज्म से भारी हुई है - #अगस्त्यनंदा कपूर वंश और बच्चन वंश के पोते - लेकिन क्या करे विरासत मिली लेकिन उनका टैलेंट नहीं.'

कुल मिलाकर, इक्कीस एक दिल को छू लेने वाली फिल्म है, खासकर अगर आपको सच्ची कहानियां, इमोशनल ड्रामा और अच्छी एक्टिंग पसंद है. यह उन वार फिल्मों से अलग है जो सिर्फ एक्शन और देशभक्ति पर फोकस करती हैं. धर्मेंद्र के फैंस के लिए तो यह देखना जरूरी है. अगर आप थिएटर जा सकते हैं, तो जरूर देखें – यह नए साल की शुरुआत के लिए परफेक्ट इमोशनल फिल्म है.

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