जिस सतलुज को 3 साल तक सेंसर बोर्ड ने रोका,OTT ने 48 घंटे में हटाया वो अब हर घर तक पहुंचेगी,पंजाब के इस दर्द को लेकर ऐसी प्लानिंग
फिल्म की थियेटर रिलीज को रोक दिया गया था. फाइनल फिल्म में 120 कट्स लगाने का सुझाव दिया गया था. 2022 में फिल्म बनकर तैयार हो गई थी. दिलजीत फिल्म में लीड एक्टर का रोल कर रहे हैं.
एक्टर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को OTT से 48 घंटों में हटाए जाने के बाद यह विवाद थम नहीं रहा है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टीफिकेशन का कहना है कि सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को पूरे किए बिना ही इसे रिलीज कर दिया गया. लेकिन इसी विरोध के बीच अब दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सामने आई है और उनका कहना है कि वह बैन के बावजूद इसकी स्क्रीनिंग करेंगे, सेमिनार आयोजित करेंगे और फिल्म को पंजाब के घर-घर तक पहुंचाएंगे क्योंकि फिल्म में वास्तविकता को दर्शाया गया है. इसमें 25000 लावारिस शवों से जुड़े मामले को उजागर किया गया है.
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा है कि यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा से संबंधित है. फिल्म में दिखाया गया है कि 25000 शवों को जला दिया गया था और किस तरह से एक सामाजिक कार्यकर्ता लोगों के सामने सच लेकर आता है.
उनका कहना है कि इस मुद्दे को केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर करना चाहिए. सच को छिपाना गलत है. उन्होंने कहा कि प्रबंधक कमेटी फिल्म का स्क्रीनिंग करेगी और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार आयोजित करेगी.
हमने कमिटी के सदस्यों से कहा है कि वे अपने इलाकों में फिल्म दिखाएं. उन्होंने कहा कि हम जल्द ही स्कूल और कॉलेजों के अध्यक्षों से मिलकर बैठक भी करेंगे. हम लोगों को बताना चाहते हैं कि एक सामाजिक कार्यकर्ता का समाज पर क्या प्रभाव हो सकता है. अगर एक व्यक्ति सब कुछ पा सकता है तो क्यों न हम सब मिलकर वो पा लें.
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क्या है मामला
साल 2022 में डायरेक्टर हनी त्रेहान ने सतलुज पूरी कर ली थी और सर्टीफिकेशन का लिए अप्लाई किया था. हालांकि इस प्रोसेस को 4 सालों तक डिले कर दिया गया. लेकिन बहुक संघर्ष के बाद अब इसके इनकट वर्जन को ZEE5 पर रिलीज कर दिया गया. थियेटर लेवल पर फिल्म को ब्लॉक कर दिया गया था क्योंकि फाइनल फिल्म में 120 कट्स लगाने का सुजाव दिया गया था. दिलजीत दोसांझ और फिल्ममेकर्स ने इसकी कल्पना तक नहीं की थी.
बैंक क्लर्क से सोशल एक्टीविस्ट बने थे खालड़ा
उल्लेखनीय है कि इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ जसवंत सिंह खालड़ा के किरदार को निभा रहे हैं. खालड़ा एक बैंक क्लर्क थे जिसके बाद वो सोशल एक्टीविस्ट बने. इन्होंने 1980 के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब में कथित अवैध हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों की घाटनाओं का खुलासा किया. इसके बाद वो 1995 में लापता हो गए थे. लापता होने के 10 साल के बाद पंजाब पुलिस के 4 अधिकारियों को उनके अपहरण, प्रताड़ना और कथित हत्या के लिए दोषी माना गया. खालड़ा का शव तक बरामद नहीं हुआ था.




