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कैसे Botox कल्चर Heroines का कर रहा है करियर तबाह? परफेक्ट फेस की चाह में फीकी पड़ रही एक्टिंग

फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों “परफेक्ट फेस” का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. स्मूद स्किन, शार्प फीचर्स और फिल्टर जैसा लुक पाने की चाह में कई हीरोइन्स बोटॉक्स और फिलर्स का सहारा ले रही हैं, लेकिन ये उनके करियर को बना नहीं बल्कि तबाह कर रहा है.

bhumi pednekar
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हेमा पंत
By: हेमा पंत7 Mins Read

Updated on: 26 Feb 2026 6:00 PM IST

बॉलीवुड में आजकल हर हीरोइन का चेहरा एक जैसा लगने लगा है. चीकबोन्स हाई, लिप्स फुल, चिन शार्प. लेकिन ये नेचुरल ब्यूटी नहीं, बोटॉक्स, फिलर्स और सर्जरी का कमाल है. ये कल्चर हीरोइन्स को ग्लैमरस दिखाने के चक्कर में उनकी एक्टिंग और करियर को तबाह कर रहा है. चेहरा स्टीफ हो जाता है, एक्सप्रेशन फ्रीज हो जाते हैं, और ऑडियंस ट्रोल करने लगती है. भूमि पेडनेकर इसका लाइव एग्जांपल हैं.

डेब्यू में सिंपल गर्ल नेक्स्ट डोर से आज 'क्या हो गया चेहरे को?' तक भूमि के बोटॉक्स ने उन्हें दूसरी एक्ट्रेसेस जैसा तो बना दिया, लेकिन इसके चलते उनके करियर पर जो धब्बा लग गया है, वह शायद ही हट पाए.

भूमि पेडनेकर का डेब्यू: नेचुरल लुक्स का जादू

भूमि पेडनेकर का बॉलीवुड सफर 2015 में फिल्म 'दम लगा के हाइशा' से शुरू हुआ. उसमें उन्होंने एक ओवरवेट लड़की का रोल निभाया था, जहां उनका चेहरा गोल-गोल था, चीकबोन्स छिपी हुई लग रही थीं, लेकिन नाक, होंठ और ठुड्डी पूरी तरह नेचुरल दिखते थे. ऑडियंस ने उनकी शानदार एक्टिंग की तारीफ की और उनके सिंपल 'गर्ल नेक्स्ट डोर' लुक को खूब पसंद किया. नॉन-ग्लैमरस और बिल्कुल रियल चेहरा ही उनकी यूएसपी थी.

जब भूमि ने किया वेट लॉस

फिर 2017 में भूमि पेडनेकर की दूसरी फिल्म 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' रिलीज हुई. इस फिल्म में एक्ट्रेस को नए अवतार में देखा गया. यानी भूमि ने वजन काफी कम कर लिया था. वेट लॉस के चलते उनके फीचर्स ज्यादा प्रोमिनेंट हो गए. इस फिल्म में उनके सारे एक्सप्रेशन साफ नजर आते हैं, चाहे वह हंसी, गुस्सा या उदासी हो. इसके बाद 'शुभमंगल सावधान', 'पति पत्नी और वो', 'लव स्टोरी', 'सोन चिड़िया' और 'बाला' इन सभी फिल्मों में एक बार फिर से फैंस को भूमि की एक्टिंग काफी पसंद आई. कुल मिलाकर 2015 से 2020 तक उन्होंने 11 फिल्में कीं. अगर आप नोटिस करेंगे, तो ज्यादातर फिल्मों में एक्ट्रेस ने टियर-2/3 शहरों की साधारण लड़कियों के रोल किए हैं. शायद यही बात उन्हें खटकने लगी होगी और भूमि को लगा होगा कि वह इस इंडस्ट्री में टाइप कास्ट न हो जाए. ऐसे में इसके हमें कोई दूसरी भूमि नजर आई.

2020 से शुरू हुआ बोटोक्स का सिलसिला

इसके बाद भूमि पेडनेकर 'डॉली किटी और वो चमकते सितारे' में नजर आई, जहां उनके फीचर कुछ बदले हुए दिखे. इस फिल्म में एक्ट्रेस की नाक अल्टर्ड लगी और चीक्स फुलर थे. साथ ही, अगर आप नोट करेंगे तो साल 2020 के बाद भूमि डीवा गर्ल लुक वाली फिल्मों में नजर आने लगी, जिसमें 'थैंक यू फॉर कमिंग' 'द लेडी किलर', 'भक्षक', 'मेरे हस्बैंड की बीवी' और 'द रॉयल्स' जैसे फिल्में शामिल हैं.

जब भूमि के हुए लिप्स थिक और फुलर चिक

2023 में 'थैंक यू फॉर कमिंग' फिल्म के लिए भूमि को जमकर ट्रोल किया गया. इस फिल्म तक आते-आते एक्ट्रेस का पूरा चेहरा बदल गया था. खासतौर पर उनके होंठ. डायलॉग बोलते वक्त अक्सर उनके लिप्स पाउट हो जाते. इसके बाद हर फिल्म में लोगों का ध्यान उनके होंठों पर ही गया

'द रॉयल्स' और दलदल में नो एक्सप्रेशन

2025-26 में 'द रॉयल्स' (नेटफ्लिक्स) और 'दलदल' (अमेजन प्राइम) फिल्म रिलीज हुई. जहां फिल्म के क्लोज-अप्स में चेहरा फ्रोजन नजर आए. भूमि चाहकर भी किसी भी सीन में एक्सप्रेशन नहीं दे पा रही थीं. दुख, हंसी और डर हर सीन में उनका फेस स्टिफ नजर आया. इसकी वजह बोटॉक्स है. साल 2017 में भूमि ने एक इंटरव्यू में कहा था कि लोग उनसे कहते हैं कि उनके लिप्स हैवी हैं, तो इस पर एक्ट्रेस ने कहा था कि लोग मेरे जैसे होठों के लिए सर्जरी कराते हैं.

पीयर प्रेशर और ग्लैमर का जाल

यह कहना गलत नहीं होगा कि शायद यह एक पीयर प्रेशर भी हो सकता है, जहां भूमि जैसी आउटसाइडर्स एलिट सर्कल्स में अपनी जगह बना सके. भूमि शायद स्टीरियोटाइप से बचने को ग्लैमरस रोल्स चाहती थीं, या फिर प्रोड्यूसर्स- डायरेक्टर्स का प्रेशर कि आपका शार्प फीचर्स, व्रिंकल-फ्री फेस होना चाहिए, क्योंकि अगर आप देखेंगे तो आजकल हर हीरोइन का चेहरा ऐसा ही दिखने लगा है.

नेपो स्टार्स: खुशी, शनाया, जान्हवी का केस

ये बोटॉक्स कल्चर नेपो किड्स को भी अपनी चपेट में ले चुका है. उदाहरण के लिए, शनाया कपूर की फिल्म 'तू या मैं' में डर, खुशी या अन्य इमोशंस सब एक जैसे लगते हैं. उनका चेहरा पूरी तरह स्टीफ हो चुका है. जान्हवी कपूर के मामले में हाई चीकबोन्स और फिलर्स के साफ साइन हैं. 'गुंजन सक्सेना' के बाद उनका चेहरा बदला, और अब एक्सप्रेशन बहुत लिमिटेड रह गए हैं. खुशी कपूर के डेब्यू से पहले ही रूमर्स हैं कि उनके होंठ और ठुड्डी अल्टर्ड हैं. साथ ही, उन्होंने यह बात खुद बताई थी कि वह सुंदर दिखना चाहती हैं. इसलिए उन्होंने इन सर्जरी का सहारा लिया. ये सभी एक्ट्रेसेस ग्लैमरस डिवा बनने के चक्कर में फंस गई हैं, लेकिन उनकी एक्टिंग पूरी तरह फ्लैट हो चुकी है. इंडस्ट्री में ओजेंपिक और मुंजारो का एपिडेमिक चल रहा है. करण जौहर का 'डेथ फेस' देख लो, वो बिल्कुल नेचुरल नहीं लगता.

पुरानी एक्ट्रेसेस नेचुरल ब्यूटी जीतती है

80 और 90 के दौर की एक्ट्रेस बढ़ती उम्र को छिपाने के बजाय उसे अपनाती थीं. माधुरी दीक्षित, जूही चावला और तबु जैसी स्टार्स के चेहरे समय के बदले, उनके हाव-भाव की गहराई कभी कम नहीं हुई. खासकर माधुरी की मुस्कान आज भी उतनी ही असली और दिलकश लगती है, जो बिना किसी आर्टिफिशियल टच के दर्शकों से सीधा जुड़ती है. भले ही श्रीदेवी ने अपने करियर के आखिरी दौर में कुछ कॉस्मेटिक एक्सपेरिमेंट जरूर किए, लेकिन उनके शुरुआती सालों में उनकी नैचुरल स्क्रीन प्रेजेंस ही सुपरहिट फिल्मों की पहचान बनी.

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