टर्म इंश्योरेंस क्यों है सबसे समझदारी भरा फैसला? फायदे जानकर आप भी कहेंगे - लेना तो बनता है
Term Insurance Benefits Explained : टर्म इंश्योरेंस सिर्फ बीमा नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक ढाल है. यह कम प्रीमियम में बड़ी सुरक्षा देता है और संकट के समय अपनों को संभालने की ताकत बनता है.
Term Insurance Benefits Explained : अक्सर लोग निवेश, म्यूचुअल फंड और टैक्स सेविंग की योजनाओं पर पूरा फोकस करते हैं, लेकिन जिस चीज पर सबसे पहले ध्यान जाना चाहिए, वही सबसे ज्यादा नजरअंदाज हो जाती है - टर्म इंश्योरेंस. बहुत से लोग इसे यह सोचकर टाल देते हैं कि अभी इसकी जरूरत नहीं है या यह सिर्फ खर्च बढ़ाने वाला प्रोडक्ट है.
हकीकत यह है कि टर्म इंश्योरेंस आपकी गैरमौजूदगी में आपके परिवार की आर्थिक रीढ़ बनता है. यह एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो मुश्किल वक्त में आपके अपनों को टूटने से बचाता है.
टर्म इंश्योरेंस आखिर है क्या?
टर्म इंश्योरेंस एक शुद्ध जीवन बीमा योजना होती है. इसमें अगर पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है, तो नॉमिनी को पहले से तय की गई बड़ी रकम (सम एश्योर्ड) मिलती है. इस प्लान में निवेश जैसा रिटर्न नहीं होता, लेकिन इसकी खास बात यह है कि बहुत कम प्रीमियम में बहुत बड़ी सुरक्षा मिलती है.
कम खर्च में बड़ी सुरक्षा
टर्म इंश्योरेंस को सबसे किफायती लाइफ इंश्योरेंस माना जाता है. थोड़े से मासिक या सालाना प्रीमियम में करोड़ों रुपये की कवरेज ली जा सकती है. यही वजह है कि यह मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बन जाता है.
परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ हल्का करता है
अगर परिवार का कमाने वाला सदस्य अचानक नहीं रहा, तो घर की EMI, बच्चों की पढ़ाई, किराया, मेडिकल खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें बड़ा संकट बन जाती हैं. टर्म इंश्योरेंस से मिलने वाली रकम इन सभी जिम्मेदारियों को संभालने में मदद करती है, ताकि परिवार को आर्थिक तंगी से जूझना न पड़े.
टैक्स बचत का अतिरिक्त फायदा
टर्म इंश्योरेंस सिर्फ सुरक्षा ही नहीं देता, बल्कि टैक्स प्लानिंग में भी मदद करता है. इस पर दिए गए प्रीमियम पर आयकर कानून की धारा 80C के तहत छूट मिल सकती है और क्लेम पर मिलने वाली राशि आमतौर पर धारा 10(10D) के तहत टैक्स फ्री होती है. यानी सुरक्षा भी और टैक्स में राहत भी.
क्लेम प्रोसेस अब पहले से ज्यादा आसान
पहले बीमा क्लेम को लेकर लोगों में डर रहता था, लेकिन अब ज्यादातर कंपनियां डिजिटल सिस्टम के जरिए क्लेम प्रोसेस को सरल बना चुकी हैं. ऑनलाइन डॉक्यूमेंट अपलोड, ट्रैकिंग सिस्टम और तय समय सीमा में भुगतान जैसी सुविधाओं से परिवार को भटकना नहीं पड़ता.
लंबी अवधि तक सुरक्षा का विकल्प
आजकल कई टर्म प्लान ऐसे हैं जो 75 या 80 साल की उम्र तक कवरेज देते हैं. इससे व्यक्ति को लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है और परिवार को यह भरोसा रहता है कि संकट की स्थिति में आर्थिक सहारा मौजूद है.
गंभीर बीमारियों का अलग कवर भी संभव
टर्म इंश्योरेंस के साथ क्रिटिकल इलनेस राइडर जोड़ा जा सकता है. इसके तहत कैंसर, हार्ट अटैक, किडनी फेल जैसी गंभीर बीमारियों की स्थिति में एकमुश्त रकम मिलती है. यह रकम इलाज, दवाइयों और काम से छुट्टी के दौरान खर्चों को संभालने में मदद करती है.
महंगाई को ध्यान में रखकर बढ़ने वाली कवरेज
कुछ टर्म प्लान ऐसे होते हैं जिनमें समय के साथ कवरेज बढ़ती जाती है. इससे महंगाई के असर को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है और भविष्य में मिलने वाली रकम की वैल्यू बनी रहती है.
सिर्फ पैसे की नहीं, मानसिक सुकून की सुरक्षा
टर्म इंश्योरेंस केवल वित्तीय प्लान नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति भी देता है. यह सोच कि “मेरे बाद भी मेरा परिवार सुरक्षित रहेगा” इंसान को जिंदगी में ज्यादा निश्चिंत बनाती है. यही असली फायदा है, जिसे कोई निवेश योजना नहीं दे सकती.
टर्म इंश्योरेंस जितनी जल्दी लिया जाए उतना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि कम उम्र में प्रीमियम कम पड़ता है और लंबी अवधि की सुरक्षा मिलती है. सामान्य टर्म प्लान में मैच्योरिटी पर कोई रकम वापस नहीं मिलती, हालांकि कुछ खास योजनाओं में पॉलिसी अवधि पूरी होने पर जमा प्रीमियम लौटाया जाता है. आमतौर पर टर्म इंश्योरेंस लेने के लिए नियमित आय का प्रमाण जरूरी होता है, इसलिए बिना कमाई वाले व्यक्ति को पॉलिसी मिलने में कठिनाई हो सकती है.
कवरेज राशि तय करते समय यह देखा जाता है कि वह आपकी सालाना आय का कम से कम 10 से 15 गुना हो, ताकि परिवार की जरूरतें लंबे समय तक पूरी की जा सकें. ज्यादातर मामलों में मेडिकल टेस्ट जरूरी होता है, क्योंकि इससे बीमा कंपनी जोखिम का सही आकलन कर पाती है, जबकि बिना मेडिकल टेस्ट वाले प्लान महंगे होते हैं और उनमें शर्तें भी ज्यादा होती हैं.





