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चांदी की रफ्तार ने चौंकाया: एक साल में 200% उछाल के बाद निवेशकों के लिए खतरे की घंटी क्यों?

बीते एक साल में चांदी ने करीब 200% का जबरदस्त रिटर्न दिया है, हालांकि जनवरी 2026 में ऑल-टाइम हाई छूने के बाद इसमें करीब 6% की गिरावट भी दर्ज की गई. सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, AI और डेटा सेंटर जैसे सेक्टरों से बढ़ती मांग चांदी को मजबूत सपोर्ट दे रही है, जबकि सप्लाई सीमित बनी हुई है. लेकिन तेज़ तेजी के बाद मौजूदा स्तरों पर नया निवेश जोखिम भरा हो सकता है. विशेषज्ञ एकमुश्त निवेश से बचने, SIP या चरणबद्ध निवेश अपनाने और चांदी को पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा रखने की सलाह दे रहे हैं.

चांदी की रफ्तार ने चौंकाया: एक साल में 200% उछाल के बाद निवेशकों के लिए खतरे की घंटी क्यों?
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Updated on: 17 Jan 2026 3:37 PM IST

पिछले एक साल में चांदी ने ऐसा उछाल दिखाया है, जिसने आम निवेशक से लेकर बड़े फंड मैनेजर तक सबका ध्यान खींचा है. जनवरी 2026 की शुरुआत में चांदी ने ₹2,59,692 प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छू लिया था, लेकिन इसके बाद इसमें करीब 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और भाव फिसलकर ₹2,43,324 प्रति किलो पर आ गया. यह गिरावट तेज़ी के बाद आई मुनाफावसूली का नतीजा मानी जा रही है.

हालांकि कीमत थोड़ी नीचे आई है, लेकिन सच्चाई यह है कि बीते 12 महीनों में चांदी करीब 200 फीसदी तक चढ़ चुकी है. इतनी तेज़ तेजी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब भी इसमें पैसा लगाना समझदारी है या जोखिम?

तेजी के पीछे क्या हैं असली वजहें?

1. सोलर और ग्रीन एनर्जी की भूख

चांदी बिजली और गर्मी की बेहतरीन कंडक्टर है, यही वजह है कि सोलर पैनल इंडस्ट्री में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. अनुमान है कि 2030 तक सोलर एनर्जी सेक्टर सालाना करीब 17 फीसदी की दर से बढ़ेगा. नई पीढ़ी के सोलर सेल, जैसे TOPCon टेक्नोलॉजी, पुराने सेल्स की तुलना में लगभग 50 फीसदी ज्यादा चांदी खपत करते हैं.

2. EV क्रांति का असर

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में पारंपरिक पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तुलना में 67 से 79 फीसदी तक ज्यादा चांदी इस्तेमाल होती है. बैटरी सिस्टम, चार्जिंग स्टेशन, केबल और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट - हर जगह चांदी की जरूरत है.

3. AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और हाई-एंड सर्वर के दौर में भी चांदी की भूमिका अहम होती जा रही है. अमेरिका में ही अगले 10 वर्षों में डेटा सेंटर निर्माण में करीब 57 फीसदी तक बढ़ोतरी का अनुमान है, जो चांदी की मांग को और मजबूती देता है.

डिमांड बनाम सप्लाई: यहीं फंसा खेल

जहां एक तरफ टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर चांदी की मांग को ऊपर धकेल रहे हैं, वहीं सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही. 2025 में चांदी की सप्लाई में सिर्फ करीब 1 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान है. यही असंतुलन बाजार में “चांदी की कमी” जैसी स्थिति बना रहा है और कीमतों को सहारा दे रहा है.

निवेश से पहले क्यों जरूरी है सतर्कता?

समस्या यह नहीं है कि चांदी का फ्यूचर कमजोर है, बल्कि यह है कि कीमतें पहले ही बहुत आगे निकल चुकी हैं. 200 फीसदी की रैली के बाद नए निवेशकों के लिए रिस्क-रिवार्ड संतुलन बिगड़ जाता है. इस स्तर पर FOMO यानी “छूट न जाए” के डर में किया गया निवेश नुकसान दे सकता है.

तो अब क्‍या करें?

  • लॉन्ग टर्म कहानी मजबूत है, क्योंकि EV, सोलर और AI जैसे सेक्टर सपोर्ट दे रहे हैं.
  • एकमुश्त निवेश से बचें, बेहतर है कि SIP या चरणबद्ध निवेश करें.
  • जिनके पास पहले से सिल्वर ETF है, वे होल्ड कर सकते हैं, लेकिन नई खरीदारी में संयम रखें.
  • चांदी को हमेशा पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा रखें, इसे मुख्य निवेश न बनाएं.

चांदी की चमक फिलहाल बरकरार है, लेकिन तेज़ रफ्तार के बाद रास्ता फिसलन भरा हो सकता है. आने वाले समय में इसकी मांग बनी रह सकती है, मगर मौजूदा ऊंचे स्तर पर समझदारी, धैर्य और संतुलन ही निवेशकों की सबसे बड़ी ताकत होगी.

सोना-चांदी
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