फिलहाल कम नहीं होगी आपके लोन की EMI, रिजर्व बैंक ने नहीं घटाया रेपो रेट
फरवरी 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, न्यूट्रल स्टांस के साथ महंगाई और विकास पर संतुलन का भरोसा जताया.
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने फरवरी 2026 की द्विमासिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का सर्वसम्मत फैसला किया है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को एलान किया कि नीति का रुख 'न्यूट्रल' बना रहेगा. यानी न सख्ती, न ढील ताकि महंगाई नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन कायम रहे.
इस फैसले का सीधा मतलब है कि होम लोन, कार लोन और अन्य रेपो-लिंक्ड लोन की EMI में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा. बाजार की उम्मीदों के अनुरूप आए इस निर्णय से उधारकर्ताओं को राहत और निवेशकों को स्थिर संकेत मिला है.
रेपो रेट 5.25% पर क्यों बरकरार रखा गया?
RBI के मुताबिक, दिसंबर 2025 के बाद से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बढ़ी हैं, लेकिन सफल व्यापार समझौतों से आर्थिक परिदृश्य को सहारा मिला है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछली एमपीसी बैठक (दिसंबर 2025) के बाद से वैश्विक स्तर पर चुनौतियाँ और तेज़ हुई हैं. हालांकि, व्यापार समझौतों का सफलतापूर्वक पूरा होना आर्थिक परिदृश्य के लिए सकारात्मक संकेत देता है. कुल मिलाकर, निकट अवधि में घरेलू महंगाई और आर्थिक वृद्धि का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है.'
नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ रखने का क्या अर्थ है?
‘न्यूट्रल’ स्टांस का मतलब है कि RBI डेटा-आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए आगे बढ़ेगा. नीतिगत दरों में बदलाव तभी होगा जब महंगाई या विकास के आंकड़े स्पष्ट दिशा देंगे. इससे बाजार को स्थिरता और नीति में पूर्वानुमेयता मिलती है.
SDF, MSF और बैंक रेट पर क्या फैसला हुआ?
- RBI ने ब्याज दर कॉरिडोर में भी यथास्थिति रखी है.
- SDF (Standing Deposit Facility): 5.00% (निचला बैंड)
- MSF (Marginal Standing Facility): 5.50% (ऊपरी बैंड)
- बैंक रेट: 5.50%
महंगाई की स्थिति कैसी है?
गवर्नर ने स्पष्ट किया कि महंगाई नियंत्रण में है और RBI की सहनशील सीमा के भीतर बनी हुई है. नवंबर और दिसंबर 2025 में महंगाई के आंकड़े नियंत्रण में रहे हैं,' जिसका अर्थ है कि उद्योग और उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव सीमित है.
GDP ग्रोथ अनुमान क्यों बढ़ाया गया?
RBI ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 7.3% से बढ़ाकर 7.4% कर दिया है. इसके पीछे-
घरेलू अर्थव्यवस्था की लचीलापन
कृषि गतिविधियों में सकारात्मक रुझान
औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार
निजी उपभोक्ता खर्च में मजबूती
ग्रामीण और शहरी मांग का विस्तार
जैसे कारक प्रमुख रहे. गवर्नर ने यह भी कहा कि बजट 2026 के कई उपाय विकास के अनुकूल हैं और सेवाओं के निर्यात में मजबूती बने रहने की उम्मीद है. संजय मल्होत्रा ने बताया कि अगले दो दिनों में GDP और महंगाई. दोनों के लिए नया बेस ईयर आएगा. इससे आंकड़ों की गणना अधिक यथार्थवादी होगी और नीति-निर्माण को बेहतर इनपुट मिलेंगे.
आम लोगों के लिए इसका मतलब क्या है?
- EMI स्थिर: होम/कार/पर्सनल लोन की किस्तों में बदलाव नहीं
- स्थिर नीति संकेत: निवेश और खपत के फैसलों में भरोसा
- विकास का सपोर्ट: महंगाई काबू में रहते हुए ग्रोथ को बढ़ावा.





