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50 हजार बनेंगे 1 लाख! PFC बॉण्ड दे रहा FD से भी ज्यादा रिटर्न, समझ लीजिए इसका पूरा गणित

पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन (PFC) का नया ऑफर फायदेमंद साबित हो सकता है. PFC ने निवेशकों के लिए जीरो कूपन बॉण्ड (ZCB) का पब्लिक इश्यू पेश किया है, जिसमें लंबी अवधि में आकर्षक रिटर्न मिल रहा है.

PFC Bond vs FD
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PFC Bond

( Image Source:  AI: Sora )

हर कोई आज के समय में सुरक्षित और स्थिर मुनाफे वाला निवेश की तलाश में रहता है. ऐसे में अब लोगों के लिए पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन (PFC) का नया ऑफर फायदेमंद साबित हो सकता है. PFC ने निवेशकों के लिए जीरो कूपन बॉण्ड (ZCB) का पब्लिक इश्यू पेश किया है, जिसमें लंबी अवधि में आकर्षक रिटर्न मिल रहा है.

इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बॉण्ड 10 साल और 1 महीने की अवधि के हैं और इनमें निवेश करने की आखिरी तारीख 30 जनवरी तय की गई है. खास बात यह है कि ये बॉण्ड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे, जिससे जरूरत पड़ने पर निवेशक इन्हें बीच में बेचकर भी पैसा निकाल सकेंगे.

क्या है PFC का जीरो कूपन बॉण्ड

PFC के ये जीरो कूपन बॉण्ड ऐसे बॉण्ड हैं जिनमें निवेशक को हर साल ब्याज नहीं मिलता, बल्कि मैच्योरिटी पर एकमुश्त रकम दी जाती है. आम निवेशकों के लिए एक बॉण्ड की कीमत 50,780 रुपये रखी गई है. 10 साल और 1 महीने बाद निवेशक को 1 लाख रुपये मिलेंगे. इस निवेश पर सालाना रिटर्न करीब 6.95% बैठता है। टैक्स कटने के बाद यह रिटर्न लगभग 6.04% रह जाता है, जो मौजूदा सुरक्षित निवेश विकल्पों के मुकाबले काफी बेहतर माना जा रहा है.

बड़े निवेशकों के लिए अलग कीमत और रिटर्न

जो निवेशक 10 लाख रुपये से अधिक का निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए एक बॉण्ड की कीमत 51,263 रुपये तय की गई है. इस कैटेगरी में टैक्स कटने के बाद निवेशकों को लगभग 5.96% का रिटर्न मिलेगा.

बैंक FD और टैक्स-फ्री बॉण्ड से क्यों बेहतर?

जानकारों के मुताबिक, PFC के ये बॉण्ड बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा फायदेमंद हैं. उदाहरण के तौर पर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की 10 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट पर फिलहाल 6.05% ब्याज मिलता है. लेकिन ऊंचे टैक्स स्लैब में आने वाले निवेशकों के लिए टैक्स कटने के बाद यह रिटर्न घटकर सिर्फ 4.24% रह जाता है. वहीं टैक्स-फ्री बॉण्ड्स में भी मौजूदा समय में रिटर्न 5.1% से 5.15% के बीच ही सीमित है, जो PFC के जीरो कूपन बॉण्ड के मुकाबले कम है.

ब्याज दरों में गिरावट से बढ़ सकता है फायदा

निवेश एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में इन बॉण्ड्स की वैल्यू और बढ़ सकती है. सिनर्जी कैपिटल के एमडी विक्रम दलाल के अनुसार "अगले 12 से 18 महीनों में अगर ब्याज दरें 0.25% से 0.50% तक गिरती हैं, तो इन बॉण्ड की वैल्यू बढ़ सकती है." यानी जो निवेशक लंबी अवधि के साथ-साथ सेकेंडरी मार्केट में संभावित मुनाफे की भी तलाश में हैं, उनके लिए यह इश्यू खासा आकर्षक हो सकता है.

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